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मुजफ्फरपुर में मर रहे बच्चों 
मुजफ्फरपुर में मर रहे बच्चों |Google
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मुजफ्फरपुर में मरते बच्चों की जान क्यों नहीं बचा पा रहा है आयुष्मान भारत?

मुजफ्फरपुर में एक्यूट इनसेफ़िलाइटिस सिंड्रोम की वजह से हो रही बच्चों की मौत को लेकर कई तरह के सवाल सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं, जिसमें से एक सवाल आयुष्मान भारत को लेकर भी उठाया जा रहा है।  

Puja Kumari

Puja Kumari

बिहार के मुजफ्फरपुर की स्तिथि काफी दयनीय हो गयी है, और इसके बारे में पूरा देश जान चुका है। हां ये बात भी सच है कि मुजफ्फरपुर में हुए बच्चों की मौत को लेकर यहां की सरकार थोड़ी देर से जागी लेकिन अभी भी स्थिति नियंत्रण में नही आई है। ताजा जानकारी के अनुसार बच्चों की मौत का आंकड़ा 109 से 130 के बीच पहुंच चुका है। बिगड़ती स्थिति का जायजा लेने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब जाकर मुजफ्फरपुर के SKMCH (Sri Krishna Medical College and Hospital) Muzaffarpur का दौरा करने पहुंचे क्योंकि उन्होंने जो कुछ दिन पहले यहां चिकित्सक अधिकारियों को मामले पर नियंत्रण करने को भेजा था जो कि हो नहीं सका।

यहां अस्पताल के बाहर आये दिन मीडिया वालों की लाइनें लगी होती हैं जो इस मामले से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी जनता तक पहुंचा रहे हैं इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर काफी चर्चाएं हो रही है जिसमें बिहार सरकार की लापरवाही के साथ अस्पताल में डॉक्टरों, दवा की कमी और अन्य बातें हो रही हैं। लेकिन इनसब के बीच एक बड़ा सवाल ये उठाया जा रहा है कि आखिर मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat scheme) इन बच्चों की जान क्यों नहीं बचा पा रही है? केंद्र सरकार को भी इस मुद्दे पर घेरा जा रहा है। हर किसी को इन बच्चों की मौत का जवाब चाहिए।

क्या है आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat scheme)

आयुष्मान भारत
आयुष्मान भारत
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आयुष्मान भारत की शुरुआत पीएम मोदी ने की थी जिसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PradhanMantri Jan Arogya Yojana) भी कहा जाता है। इस योजना के प्रचार के दौरान कहा जाता था कि ‘अब नहीं रहा कोई लाचार, बीमार को मिल रहा है मुफ्त इलाज’। इतना ही नहीं सरकार का कहना था कि इसके जरिये वो हर वर्ष ग़रीब परिवार को पाँच लाख रुपए के स्वास्थ्य बीमा भी देगी।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए इसमें के तरह की कई तरह के गंभीर बीमारियों को भी शामिल किया गया है जिसमें लीची खाने पर हुई एक्यूट इनसेफ़िलाइटिस सिंड्रोम (AES) (Acute encephalitis syndrome) बीमारी भी शामिल है। अब जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि मरने वाले सभी बच्चे गरीब वर्ग के थे फिर सवाल ये उठता है कि आयुष्मान भारत से उनकी जान क्यों नहीं बची?

मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत 
मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत 
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आयुष्मान भारत से क्यों नहीं बची बच्चों की जान

इसके पीछे कारण कई हैं - जब आंकङों पर एक नजर डाला गया तो कई सारी बातों का खुलासा हुआ जो हैरान कर देने वाला था। जैसा कि आपको भी पता होगा मुजफ्फरपुर में एक्यूट इनसेफ़िलाइटिस सिंड्रोम (AES) से पीड़ित सभी बच्चों का इलाज 2 अस्पतालों में चल रहा है जिसमे से एक मुजफ्फरपुर का सबसे बड़ा अस्पताल कहा जाने वाला श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (Sri Krishna Medical College and Hospital) है और दूसरा कृष्णादेवी देवीप्रसाद केजरीवाल अस्पताल (Krishnadevi Deviprasad Kejriwal Maternity Hospital) है। इनमें से दूसरा सबसे बड़ा हॉस्पिटल केजरीवाल अस्पताल है, जिसमें मरीजों की संख्या भी सबसे ज्यादा है लेकिन आपको ये जानकर झटका लगेगा कि ये अस्पताल आयुष्मान भारत में रजिस्टर ही नहीं है।

इसके अलावा ये बात भी सामने आई है कि SKMCH (Sri Krishna Medical College and Hospital) में भर्ती बच्चों में से महज 32 बच्चों को ही आयुष्मान भारत का लाभ मिल पा रहा है जिसमें से एक कि मौत हो गयी है बाकियों का इलाज अभी जारी है। कई लोग इस योजना का लाभ गोल्डन कार्ड न होने के कारण भी नहीं उठा पा रहे हैं।

एक तरफ़ बिहार सरकार इन बच्चों की मौत को रोकने में अपनी नाकाम कोशिशों पर पर्दा डालने के लिए मृतक के परिवार को 4 लाख का मुआवजा देने की घोषणा कर चुकी है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के अनुसार आयुष्मान भारत योजना के तहत 32 बच्चों के इलाज में 5 लाख रुपये खर्च किये हैं। पर बाकी बच्चों का क्या? और सरकार के इन मुआवजों से क्या उन माओं को उनका बच्चा वापस मिल सकता है? शर्म आती है ऐसी सरकार पर जो परिस्थितियों को नियंत्रण न करने के कारण मुआवजा देकर उनके दुखों की कीमत लगती है।