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IPS अधिकारी संजीव भट्ट
IPS अधिकारी संजीव भट्ट|Social Media
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गुजरात के IPS अधिकारी संजीव भट्ट को क्यों मिली उम्रकैद की सजा

ना जाने कितनी मौत का जिम्मेदार हैं आईपीएस संजीव भट्ट

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आज जामनगर सेशंस कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट के इस फैसले से उन तमाम नौकरशाह को सबक मिलेगा जो अपने पद के नशे में दादागिरी करते हैं। और कानून की रखवाली करने के बजाये कानून की धज्जियाँ उड़ाते हैं। जामनगर सेशंस कोर्ट ने आज गुजरात के बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को उम्रकैद की सजा सुनाई है। संजीव भट्ट के साथ-साथ कोर्ट ने उन लोगों को भी सजा सुनाई है जो अपराध में उनके साथ थे।

दरअसल बर्खास्त पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को कोर्ट ने IPC की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है। संजीव भट्ट पर 1990 में जामनगर बंद के दौरान अपनी कस्टडी में कई मासूम लोगों की निर्ममता से हत्या करवाने का अपराध दर्ज है। जिसके लिए आज 20 जून 2019 को उन्हें जामनगर सेशंस कोर्ट सजा सुनाई है।

1990 में जामनगर बंद के दौरान एक भीषण हिंसा हुई थी। पुलिस ने हिंसा के बाद 133 लोगों की गिरफ़्तारी की थी। इस गिरफ़्तारी में पुलिस ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट की । मारपीट की वजह से पुलिस कस्टडी में ही उस व्यक्ति की मौत हो गई थी। जिसके बाद संजीव भट्ट और उनके साथियों पर मारपीट को लेकर कार्यवाई की गई। साल 2011 के बाद गुजरात सरकार ने सजीव भट्ट के खिलाफ ट्रायल की इजाजत दे दी। और उन्हें 2015 में बर्खास्त कर दिया गया। 

शिकायतकर्ता मृतक प्रभुदास के परिवार वालों ने संजीव भट्ट पर आरोप लगाया है कि भट्ट ने अपने साथियों के साथ मिल कर प्रभुदास की पिटाई की जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई।

वहीं बचाव पक्ष ने कहा ये मामला सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा हुआ था। पुलिस ने 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया और प्रभुदास की मौत अस्पताल में हुई थी।

फैसला सुनाते हुए जामनगर जिला व सत्र न्यायाधीश डी.एम.व्यास ने भट्ट व तत्कालीन कांस्टेबल प्रवीण सिंह झाला को हत्या का दोषी करार दिया।

कौन हैं संजीव भट्ट

55 वर्षीय संजीव भट्ट गुजरात काडर के IPS अधिकारी थे। उनकी पढाई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई से हुई है। उनकी पत्नी स्वेता भट्ट भी पुलिस अधिकारी हैं। संजीव भट्ट का नाम 2002 में हुए गुजरात दंगों से भी जुड़ा हुआ है। संजीव भट्ट एक आपराधिक छवि वाला पुलिस ऑफिसर हैं।