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 राहुल गांधी  
राहुल गांधी  |Google
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बर्थडे स्पेशल: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के जन्मदिन पर जानिए उनकी 10 खास बातें 

बर्थडे स्पेशल में राहुल गांधी  

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

स्वर्गीय राजीव गांधी और सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी आज अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं। राहुल गांधी आज के समय में एक जाने-माने राजनेता हैं। लेकिन एक राजनीतिज्ञ से अलग राहुल की क्या पहचान हैं, इस बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। गांधी परिवार में जन्में राहुल के पास क्या जन्म से ही राजनेता बनने की चाहत थी ? राहुल व्यक्तिगत तौर पर कैसे हैं ? कौन हैं राहुल ? जिनका नाम तो हर कोई जनता है पर कितने लोग उनके जीवन के अनछुए पहलू को जानते हैं ? अगर आप भी ये जानना चाहते हैं तो राहुल से जुड़ी कुछ खास बातें आपके लिए -

राहुल गांधी का परिचय

राहुल गांधी का जन्म आज के दिन यानी 19 जून 1970 को दिल्ली में हुआ था। राहुल देश के सबसे बड़े राजनीतिक घराने गांधी नेहरू परिवार के वारिस हैं। राहुल की माँ सोनिया UPA चेयरपर्सन हैं और उत्तर प्रदेश के रायबरेली से सांसद हैं। राहुल के पिता स्वर्गीय राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

राहुल कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और केरल के वायनाड लोकसभा सीट से सांसद हैं। राजनीति में कदम रखने के बाद राहुल गांधी को सबसे पहली और बड़ी जीत 2009 के लोकसभा चुनाव में मिली। उस समय राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकते थे लेकिन उन्होंने सरकार में कोई भूमिका निभाने के बजाए पार्टी संगठन में काम करना बेहतर समझा। उन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी मनमोहन सिंह को दी और पार्टी के साथ जुड़ गए।

राहुल को बचपन से ही घूमना पसंद हैं। शायद ही भारत का कोई ऐसा शहर होगा जहां राहुल अब तक नहीं गए हो। घूमने के अलावा राहुल स्पोर्ट में भी आगे हैं। तैराकी, साईलिंग और स्कूबा-डायविंग का राहुल को शौक है। इसके अलावा राहुल ने बॉक्सिंग सीखी और पैराग्लाइडिंग की ट्रैंनिंग ली है।

तैराकी में माहिर राहुल

स्पोर्ट्स कोटे के तहत लिया सेंट स्टीफेंस कॉलेज में दाखिला

राहुल की शुरूआती शिक्षा दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल से हुई। उसके बाद उन्होंने अपने पिता के स्कूल यानि दून स्कूल में दाखिला लिया। इंदिरा गांधी की मौत के बाद सुरक्षा कारणों की वजह से कुछ समय तक राहुल और उनकी बहन प्रियंका को घर पर ही पढाई लिखाई करनी पड़ी। कॉलेज की पढ़ाई के लिए राहुल ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस कॉलेज में दाखिला लिया।

सेंट स्टीफेंस कॉलेज में उनका दाखिला स्पोर्ट्स कोटे के तहत हुआ। बहुत कम लोगों को पता हैं कि राहुल पिस्टल शूटिंग में माहिर हैं। राहुल ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज में अपनी पढाई पूरी नहीं की। उन्होंने फर्स्ट ईयर के बाद कॉलेज छोड़ दिया और फ्लोरिडा के हार्वर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। जहां उन्होंने डिग्री की पढाई पूरी की। उसके बाद उन्होंने 1995 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट स्टडीज में एम.फ़िल.की पढाई पूरी की। राहुल गांधी की डिग्री को लेकर कई बार विवाद भी बनाया गया।

आलोचक राहुल से हमेसा ये सवाल पूछते हैं कि उन्होंने पीजी की पढ़ाई नहीं की तो एम.फ़िल.कैसे कर ली ?

दरअसल विदेशों में स्नातक के बाद एम.फ़िल. किया जा सकता है। वहां पैसे देकर भी पीजी की डिग्री ली जा सकती है। लेकिन एम.फ़िल. की नहीं।

लन्दन में नौकरी

लन्दन में पढ़ाई पूरी करने के बाद राहुल गांधी ने तीन साल तक फाइनेंस कंसलटेंट कंपनी में काम किया। राहुल ने जिस कंपनी में काम किया वह कंपनी हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर माइकल यूजीन पोर्टर की थी। जो ब्रैंड स्ट्रैटजी के विद्वान माने जाते हैं। इस कंपनी में काम करते हुए राहुल ने सुरक्षा कारणों की वजह से अपना नाम रॉल विंसी बताया था। उनके साथ काम करने वाला कोई भी इंसान नहीं जनता था कि राहुल राजीव गाँधी के बेटे हैं।

करीब 10 सालों तक विदेश में रहने के बाद राहुल गांधी साल 2002 में भारत लौटे। भारत आकर भी उन्होंने राजनीतिक को छोड़ व्यापार को चुना। उन्होंने मुंबई में एक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिग फर्म, बेकॉप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की। इस कंपनी का काम भारत और विदेशी ग्राहकों को सहायता मुहैया कराना और परामर्श देना था। लेकिन साल 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल के अपना ध्यान व्यापार से हटा कर राजनीतिक में लगा लिया। इस कंपनी में राहुल की 83 फीसदी हिस्सेदारी थी।

राहुल का राजनीतिक लगाव

राहुल गांधी ने अचानक ही राजनीति में उतरने का फैसला लिया था। साल 2003 के बाद वो कई बार पार्टी मीटिंग में नज़र आने लगे। राहुल एक बार बहन प्रियंका के साथ मैच देखने पाकिस्तान गए थे। जिसे मीडिया ने खूब हवा दी और इस घटना के बाद राहुल को जानने वालों की संख्या बढ़ती चली गई । साल 2004 में राहुल ने अपने पिता की संसदीय सीट अमेठी का दौरा किया। जिसके बाद उन्होंने वहीं से चुनाव लड़ने का फैसला लिया। साल 2004 से 2019 तक राहुल अमेठी के सांसद रहे। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने उन्हें यहां से हरा दिया।

राहुल के लिए उपाध्यक्ष पद का सृजन

राजनीति में उतरने के बाद धीरे-धीरे राहुल गाँधी की पार्टी में एहमियत बढ़ती गई। हालांकि कांग्रेस में राहुल से कई बेहतर नेता मौजूद थे लेकिन गांधी नेहरू परिवार से ताल्लुख होने के कारन उन्हें पार्टी में विशेष दर्जा दिया गया। जनवरी 2006 में कांग्रेस पार्टी की हैदराबाद में हुई बैठक के दौरान हजारों कार्यकर्ता ने राहुल से पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की गुजारिश की। जिसके बाद साल 2007 में उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का महासचिव बनाया गया। और राहुल युवा कांग्रेस के चेहरे बन गए। साल 2009 में हुए उत्तर प्रदेश लोकसभा चुनाव में राहुल की अध्यक्षता में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली और पार्टी ने 80 में से 21 सीटें जीत लीं। इस जीत के बाद राहुल को साल 2013 में कांग्रेस का उपाध्यक्ष बना दिया गया। वैसे पार्टी में पहले उपाध्यक्ष का पद नहीं था। यह पद राहुल के लिए तैयार किया गया था।

युवा नेता राहुल

राजनीति में कदम रखने के बाद राहुल युवा कांग्रेस के चेहरे बन गए थे। उन्होंने पार्टी में युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ा, कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में युवा नेताओं को मौका दिया। युवाओं के साथ साथ बच्चे भी राहुल से जुड़े, कभी मदरसे में जाकर तो कभी खेल के मैदान में बातचीत कर उन्होंने बच्चों को पार्टीसे जोड़ा। इतना ही नहीं उन्होंने कई कार्यक्रम में अपने भांजा-भांजी (मिराया और रेहान) के साथ भी देखा गया।

विश्वसनीयता के मामले में पिछड़े

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस को भारतीय जनता पार्टी के हाथों करार हार मिली तो राहुल चुप नहीं बैठे। उन्होंने कई पदयात्रा निकाली, खाट पर चर्चा, किसान आंदोलन, रोड शो किया। लोगों को पार्टी से जोड़ा। चारपाई पर सोए, झोपडी में रोटी खाई। आम आदमी का जीवन बिताया। लेकिन विश्वसनीयता के मामले में वो हमेसा पीछे रहे। आज भी पार्टी में सोनिया गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी विश्वसनीयता के मामले में उनसे आगे हैं। हालांकि प्रियंका सक्रिय राजनीति में अभी-अभी उतरी है।

राजनीति के अलावा राहुल

राजनीति के अलावा राहुल को दिल्ली की खान मार्केट में शॉपिंग करना बहुत पसंद है। बरिस्ता में कॉफी के साथ किताबें पढ़ना राहुल गांधी का फेवरेट टाइमपास है। राहुल को खाने के मामले में पुरानी दिल्ली बेस्ट लगती है। राहुल चुप रहना पसंद करते हैं। दुनिया की चकाचौंध राहुल को नहीं लुभाती। वो रिश्तों को अहमियत देते हैं इसलिए लोग उन्हें प्यार से RG कहते हैं।