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बिहार में चमकी बुखार
बिहार में चमकी बुखार |Social Media 
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बिहार में चमकी बुखार से 108 बच्चों की मौत हो गई है और 100 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

बिहार इन दिनों चमकी से त्रस्त है। आये दिन, हर घंटे कोई ना कोई नैनिहाल अपनी जिंदगी से जंग हार रहा है। लेकिन सरकार अपने मुगालते में है। किसी को अपनी वोट बैंक की चिंता है तो कोई खेल के चक्कर मे सब कुछ भुलाए बैठा है।

बिहार समेत पूरे देश मे चमकी को लेकर चिंता है। अब तक प्राप्त सूचना के आधार पर 108 बच्चे अब तक काल के मुँह में समा गए हैं। लेकिन सरकारे सिर्फ मीटिंग पर मीटिंग करके अपनी जिम्मेदारी निभाये जा रही है। उस पर 16 जून की मीटिंग में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने अपनी भीषण असंवेदनशीलता का भी परिचय दे दिया है।

जनाब मीटिंग के दौरान, अब तक कितने विकेट हुए पूंछते नजर आए।

हालांकि खेल प्रेमी होना कोई गुनाह नहीं है। लेकिन ऐसे मौके पर इस तरह के प्रेम को दर्शाना या तो आपकी मानसिक निम्नता को दर्शाता है, या फिर आप अपने पद के लिए जिम्मेदार ही नहीं है।

यह ठीक वैसा है जैसे कि आप पॉप संगीत प्रेमी है और किसी की अंतिम संस्कार के दुखदायी समय में आप अपनी संगीत प्रतिभा का प्रदर्शन कर बैठे हो।

आखिर चमकी बला क्या है ?

एक प्रकार का विचित्र दिमागी बुखार है जिसे अंग्रेजी में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम कहा जाता है। यह बीमारी कम उम्र से शिशुओं से लेकर 15 साल के बच्चों में अधिकांश पायी गयी है। वर्तमान में यह बीमारी बिहार के सितामढी, मोतिहारी, शिवहर, वैशाली और बेतिहर जिले में तबाही मचाई हुए है।

इस बीमारी में बच्चों को तीव्रता से बुखार चढ़ता है। जो लंबे समय तक चढ़ा ही रहता है। बच्चे कमजोरी और शरीर की अकड़न से दांतों पर दांत भीचते भी नजर आते है। शरीर बुखार की अधिकता के कारण सुन्न हो जाने की नौबत में होता है। बुखार और दर्द की अधिकता से शरीर में लकवा जैसी स्थिति बन जाती है जो बच्चों की असमय मृत्यु का मुख्य कारण बनती है।

चमकी का कारण

देखने में यह भी आया है कि यह चमकी बीमारी उन्हीं बच्चों को हुई जहां गर्मी ने अपना कहर बरपाया है। तथा जो बच्चे खुली धूप में ज्यादा रहे उन पर ज्यादा असर रहा। वहीं कुछ लोगों ने इसे अधपकी लीची से जनित बीमारी भी माना है, हालांकि इस पर जांच जारी है।