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रहस्यमयी रेल पटरी 
रहस्यमयी रेल पटरी |Social Mofia
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चमत्कार या विज्ञान , दिन के एक समय मे आपस मे जुड़ जाती है रेल की पटरियां

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

झारखंड राज्य में हजारीबाग से बरकाकाना रेल लाइन है। इसी लाइन के बीच पड़ता है गांव लोहारिया टांड। यही होता है प्रतिदिन चमत्कार, यहां की एक विचित्र गतिविधि ने वैज्ञानिकों समेत अन्य विद्वानों को हैरत में डाल रखा है। जैसे ही सुबह का 8 बजता है ट्रेन की दोनों पटरियां अपने आप मुड़ती हुई आपस मे चिपक जाती है, औऱ मजे की बात यह है कि दिन के 3 बजे के आसपास ये पटरियां अपने आप एक दूसरे से अलग होने लगती है। और देर शाम तक ये दोनों पटरियां अपनी पूर्ववत स्थिति में आ जाती है।

चमत्कार या विज्ञान

हालांकि रेल विभाग द्वारा इन पटरियों को अलग रखने का प्रयास किया गया है , इन दोनों पटरियों के बीच , लकड़ी के स्लीपर डालकर इन दोनों पटरियों के बीच दूरी बनाने की कोशिश की गई है। लेकिन मोटा से मोटा स्लीपर भी इन पटरियों को जुड़ने से नही रोक पाया।

जहां वैज्ञानिक इसे चुम्बकीय खिंचाव या अन्य भौतिक बल बताकर जांच कर रहे है , वहीं ग्रामीण इसे दैवीय और परभौतिक चमत्कार मानकर स्थान पर पूजा अर्चना करते हुए देखे जाते है।

समाधान पृथ्वी के गर्भ में छुपा है

हालांकि इस गतिविधि का दायरा सिर्फ 15-20 मीटर ही है ,लेकिन इस स्थिति ने रेलवे को बड़ी अजीब स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। इस लाइन पर उद्घाटन तो हो चुका है लेकिन ट्रेन नही चली, जिसका एकमात्र कारण यह घटना है।

रेलवे और अन्य संबंधित वैज्ञानिक दलों ने यहां अपनी जांच की है। लेकिन कोई निष्कर्ष न निकलने पर उन्होंने ड्रिलिंग की बात कही है। उन्होंने तर्क दिया कि इस समस्या का समाधान पृथ्वी के गर्भ में छुपा है।