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मुजफ्फरपुर में मासूमों की मौत
मुजफ्फरपुर में मासूमों की मौत|google
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थम नहीं रहा मुजफ्फरपुर में मासूमों की मौत का आंकड़ा, ऐक्शन में कब आएगी सरकार ? 

बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई मासूमों की मौत की चर्चा हर तरफ हो रही है लेकिन सरकार के कानों तले जूं तक नहीं रेंग रहा है। 

Puja Kumari

Puja Kumari

गर्मियों का मौसम चल रहा है ऐसे में हम बच्चे बूढ़े हर किसी का पसंदीदा फल आम व लीची बन जाता है, पर आपने कभी सोचा भी नहीं होगा कि इन फलों के खाने की वजह से आपकी जान तक जा सकती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बीते एक माह से बिहार (Bihar) के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) जिले में लीची के कारण ताजा आकड़ों के अनुसार अब तक 69 बच्चों की मौत हो चुकी है और 179 बच्चे अभी भी बीमार हैं। जी हां ये वहीं मुजफ्फरपुर हैं जहां कि लीची की मिठास दुनिया भर में मशहूर है, लोग यहां के लीची का बड़े ही चाव से सेवन करते हैं।

मुजफ्फरपुर की लीची को शाही लीची माना जाता है। लेकिन इस माह जो घटना सुनने में आई है उससे हर व्यक्ति लीची (lychees) को हाथ लगाने से भी डर रहा है। दरअसल अभी तक मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) में जिन बच्चों की लीची खाने से तबीयत खराब होने की खबर आ रही थी अब उसको लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। लोगों को यह यकीन कर पाना मुश्किल हो रहा है कि आखिर लीची खाने से इन बच्चों की जान कैसे चली गई ?

अगर बात करें कारण की तो कई लोग का कहना है कि इन बच्चों की जान 'चमकी बुखार' से गई तो वहीं कुछ लोग 'लीची' पर दोष लगा रहे हैं। अगर गौर किया जाए तो जिस इलाके के बच्चों को भर्ती कराया जा रहा था उसमें ज्यादातर गरीब तबके व कुपोषण के शिकार बच्चे थें जिसकी वजह से डॉक्टरों ने अनुमान लगाया कि इनकी मौत सुबह के खाली पेट लीची खाने से हुई है।

बिहार में मौत का कहर 
बिहार में मौत का कहर 
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अगर विज्ञान की भाषा में समझें तो लीची में 'हायपोग्लायसिन-ए' (Hypoglycaemia-a) और 'मेथिलीन सायक्लोप्रोपाइल ग्लायसीन' जैसे तत्व पाए जाते हैं जो कि कुपोषित बच्चों के लिए जहर साबित होते हैं क्योंकि इसके शरीर में जाते ही खुन व शुगर का लेवल कम हो जाता है। जब बच्चे खाली पेट लीची खा लें तब उनकी मौत का कारण ये बन जाता है। इसके अलवा चमकी बुखार को भी इसका कारण बताया जा रहे हैं जिसे मेडिकली भाषा में ‘एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम’ (acute encephalitis syndrome) के नाम से जाना जाता है। इसमें व्यक्ति को तेज बुखार, शरीर में ऐंठन व सुन्न होने लगता है। ये खासकर तपती गर्मी वाले मौसम में बच्चो पर अपना प्रकोप दिखाता है।

कौन है जिम्मेदार

बिहार के मुजफ्फरपुर में लीची का कहर 
बिहार के मुजफ्फरपुर में लीची का कहर 
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सवाल ये उठता है कि इन सभी घटनाओं के दरमियान सरकार हाथ पर हाथ रखकर क्यों बैठी थी? जब 50 बच्चों की जान चली गई तब जाकर स्वास्थ विभाग के अधिरियों को इस घटना के निरीक्षण के लिए भेजा गया। अब यह समझ नहीं आता है कि सरकार को जागने में इतनी देर क्यों लगी? क्योंकि यह घटना पहली बार नहीं हुई है बल्कि इससे पहले भी अगर इतिहास उठाकर देखें तो साल 2012 में 12, 2013 में 39, 2014 में 90 और 2015 में 11, 2016 में 4 और अब 2019 में 69 बच्चों की मौत हो चुकी है।

जिस बीमारी से इन बच्चों की मौत हुई है सरकार का कहना है कि लोगों को इसे लेकर जागरूक होना चाहिए। लेकिन लोग जागरूक होंगे कैसे? सरकार इसपर गंभीर क्यों नही हो रही? क्या सोचना गलत है कि हर साल इतनी मौतें होने के बाद भी सरकार उस इलाके में इस बीमारी को लेकर जागरूकता क्यों नहीं फैला रही?