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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया 
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया |Twitter
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दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की फ्री एंट्री को लेकर अब क्या बोल गए उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया 

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दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा को लेकर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच खींचतान जारी है। दिल्ली की महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त यात्रा करने का लाभ मिलेगा या नहीं इसपर अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। मगर सूत्र बताते हैं कि सरकार इस विकल्प के बारे में गम्भीरता से विचार कर रही है।

वहीं बीजेपी इसे आने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा रही है। इसी बीच दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मेट्रोमैन ई श्रीधरन को एक खत लिखा है जो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

दरअसल, दो दिन पहले राजधानी दिल्ली की मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्रा को लेकर मेट्रोमैन ई श्रीधरन ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खत लिखा था जिसमें उन्होंने दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की मुफ्त यात्र का विरोध किया था और कहा था कि सरकार अपने बजट का आधा हिस्सा महिलाओं की यात्रा पर खर्च करना चाहती है। जो कि ठीक नहीं है। 

मेट्रोमैन ई श्रीधरन के इस खत के जवाब में, दिल्ली के मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि "मुश्किल कुछ भी नहीं है, बस नियत साफ़ होनी चाहिए। दिल्ली सरकार महिलाओं को मुफ्त यात्रा देने में इसलिए संभव हो पा रही है क्योंकि हमारी नियत साफ़ है। और मैं यह जानकर स्तब्ध हूं कि ई श्रीधरन को दिल्ली सरकार का यह प्रस्ताव पसंद नहीं आ रहा है।”

उन्होंने कहा कि मेट्रोमैन ई श्रीधरन ने मेट्रो में मुफ्त यात्रा योजना को लेकर उनका जो पक्ष है वो हमारी योजना के प्रति आपकी गलतफहमी को दर्शाता है।

मीडिया से बात करते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री ने कहा "मैंने श्रीधरन साहब को पत्र लिखा है और उनसे कहा है कि दिल्ली मेट्रो घाटे में चल रहा है। अगर इसकी क्षमता 40 लाख यात्रियों की है और यह वर्तमान में केवल 25 लाख यात्रियों को ले जा रहा है। तो दिल्ली सरकार की योजना उनके लिए फायदेमंद रहेगी।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि "मेट्रो में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा का हमारा प्रस्ताव दिल्ली मेट्रो के लिए फायदेमंद होगा, इसकी राइडरशिप बढ़ेगी और किराए में कमी आएगी। अगर दिल्ली सरकार महिला यात्रियों का किराया चुकाती है, तो दिल्ली मेट्रो को इससे खुश होना चाहिए। ना की प्रधानमंत्री को खत लिखकर इसका विरोध करना चाहिए।