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Amit Sharma
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पत्रकारों के लिए सेफ नहीं है उत्तर प्रदेश, पिटाई और गिरफ़्तारी के कई मामले सामने आये !

उत्तर प्रदेश में पत्रकारों का क्या है हाल ?

AKANKSHA MISHRA

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था को देखते हुए आज एक समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में राज्य की कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी।

पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक रेंज से नाबालिग बालिकाओं के साथ हुए जघन्य अपराधों के 10-10 मामले चिन्हित कर,फास्ट ट्रैक अदालतों द्वारा अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए ।

इससे पहले भी मुख्यमंत्री ने 10 जून को समीक्षा बैठक बुलाई थी और इन्ही सब मुद्दों पर चर्चा की गई थी। लेकिन राज्य की कानून व्यवस्था सुधरने का नाम ही नहीं ले रही है। और इस बार कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने वाले बन गए हैं।

पत्रकार की पिटाई का पहला मामला

यह घटना उत्तर प्रदेश के शामली की है। जहां रेलवे पुलिस के जवानों ने धीमनपुरा के पास ट्रेन के पटरी से उतरने की खबर को कवर कर रहे न्यूज़ 24 के पत्रकार अमित शर्मा की जबरदस्त पिटाई कर दी। पुलिस ने पत्रकार को अपनी बात कहने का मौका भी नहीं दिया बस उसे पीटते रहे। यहां तक की पत्रकार के कपड़े उतार दिए और मुंह पर पेशाब किया गया। घटना का वीडियो जब सोशल मीडिया में वायरल होने लगा तो उत्तर प्रदेश, शामली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हरकत में आए और स्टेशन हाउस अधिकारी राकेश कुमार और जीआरपी कांस्टेबल सुनील कुमार को निलंबित कर दिया गया। और घटना की जांच का आदेश दिया गया है।

प्रशांत कनौजिया विवाद

इससे पहले स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अवमानना के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिर सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। प्रशांत कनौजिया पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए ट्विटर पर अपशब्द का इस्तेमाल करते हुए उनका एक आपत्तिजनक वीडियो शेयर किया है।

अब तक उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के खिलाफ 9 FIR दर्ज किये जा चुके हैं। जिसमें से तीन मामले कन्नौज, बस्ती और गोरखपुर के हैं।

सोशल मीडिया की आड़ में पत्रकारों पर कार्यवाई

सूत्रों के मुताबिक सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करने के आरोप में कन्नौज के पत्रकार संतोष गुप्ता को भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार किया है। संतोष गुप्ता पर आरोप था कि इन्होंने व्हाट्सअप पर मुख्यमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्द का उपयोग किया और फोटो शेयर किया।

बस्ती के पत्रकार विजय यादव के खिलाफ भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने FIR दर्ज की है। इन पर आरोप है कि इन्होंने मुख्यमंत्री के लिए फेसबुक पर अपशब्द का इस्तेमाल किया, कमेंट किए। बस्ती की सिटी कोतवाली पुलिस ने विजय यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।

गोरखपुर के पत्रकार राम प्रकाश यादव पर कथित तौर पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि इन्होंने वॉट्सऐप पर मुख्यमंत्री का आपत्त‍िजनक फोटो शेयर किया है। जिसके बाद गोरखपुर पुलिस इन्हें गिरफ्तार करने पहुंच गई।

नेशन लाइव पर गिरी गाज

जिस विवाद में स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनोजिया की गिरफ़्तारी हुई थी, उसी मामले में टीवी चैनल नेशन लाइव के एक पत्रकार को गिरफ्तार किया गया। नेशन लाइव के एंकर अंशुल कौशिक पर आरोप है कि उन्होंने बिना लाइसेंस चैनल का प्रसारण किया है। अंशुल कौशिक वहीं हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए खिलाफ अवमानना वाला प्रोग्राम होस्ट किया था।

टीवी चैनल नेशन लाइव के मैनेजिंग डायरेक्‍टर इशिका सिंह और मैनेजिंग एडिटर अनुज शुक्ला को पुलिस ने पहले ही इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने योगी आदित्यनाथ के साथ एक महिला के प्रेम संबंध का दावा करने वाला एक प्रोग्राम चलाया । पुलिस ने दोनों पत्रकारों को प्रशांत कनौजिया के साथ ही गिरफ्तार किया था। हालांकि प्रशांत का इस चैनल से कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने इस चैनल का वीडियो बस अपने ट्विटर पर शेयर किया था।