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गृह मंत्री  अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह|Twitter
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गृह मंत्री तो बन गए अमित शाह, लेकिन इन चुनौतियों से कैसे निपटेंगे ?

मोदी मंत्रिमंडल के सेनापति अमित शाह

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

भारतीय जनता पार्टी के सेनापति अमित शाह को मोदी मंत्रिमंडल में नंबर दो की जगह मिल चुकी हैं। आज अमित शाह ने भारत के 30वें गृहमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। उनके कार्यभार संभालते ही चर्चा शुरू हो गई कि राजनाथ सिंह की जगह लेने वाले अमित शाह मोदी मंत्रिमंडल की सबसे जटिल समस्या से कैसे निपटेगें।

बतौर गृहमंत्री अमित शाह की मुश्किलें

अमित शाह ऐसे समय में देश के गृहमंत्री बने हैं जब देश आतंकवाद, अलगाववाद और नक्सलवाद की सबसे घातक चुनौतियों का सामना कर रहा है। लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रवाद को चुनावी मुद्दा बनाया था।

मोदी ने जनता को यकीन दिलाया था कि "केवल उनकी सरकार ही आतंकवाद का सामना कर सकती हैं।”

मोदी सरकार के बड़े-बड़े राष्ट्रवादी बयानों के बाद अमित शाह के ऊपर अब इन्हें पूरा करने का दबाव होगा।

उरी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद देश की जनता आतंकवाद के मुद्दे पर चुप नहीं बैठने वाली है।

इन सब के अलावा गृह मंत्री बनने के बाद अमित शाह का बंगाल की सियासत पर क्या रुख होगा इसपर भी सबकी निगाहें टिकी हैं। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह के हैलकॉप्टर को कई बार बंगाल में उतरने नहीं दिया गया था।

आए दिन बंगाल से राजनीतिक हिंसा की खबर आती रही हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान बंगाल में बीजेपी के 57 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई थी, जिनके परिवार को प्रधानमंत्री ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में भी बुलाया था। खुद अमित शाह के खिलाफ बंगाल में एक आपराधिक मामला दर्ज है।

अमित शाह का जम्मू-कश्मीर रुख

सरदार पटेल से लेकर राजनाथ सिंह तक, किसी भी गृहमंत्री ने जम्मू-कश्मीर की मूल समस्या का समाधान नहीं निकाला है।

पुरानी कई सरकारों ने जम्मू-कश्मीर की धारा-370 और आर्टिकल-15A पर राजनीति की है, गृह मंत्रालय का रुख भी इस राज्य की सियासत पर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है।

ऐसे में अमित शाह इस स्थिति से कैसे निजात पाते हैं ये देखना काफी दिलचस्प होगा।

जिस तरह पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षाबलों को खुली छूट दी थी, जिस वजह से बड़ी संख्या में आतंकवादी भी मारे गए। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह उनसे भी कहीं ज्यादा कड़ा रूख अपनाएंगे। क्योंकि अमित शाह को चुनाव प्रचार के दौरान कई बार इसको हटाने की बात कही थी।

अमित शाह से उम्मीदें

मोदी मंत्रिमंडल के इस हाई-प्रोफाइल मंत्रालय के नेतृत्व में परिवर्तन संभवत: कठिन निर्णय लेने और आतंक, उग्रवाद और अलगाववाद से कड़ाई से निपटने के तहत लिया गया है।

इसलिए अब ये उम्मीद जताई जा रही है कि गृह मंत्री बनते ही अमित शाह जम्मू-कश्मीर में लागू धारा-370 और आर्टिकल 15A पर कड़ा रुख अपना सकते हैं।

अमित शाह बीजेपी के तेज-तर्रार नेता हैं। गुजरात में कई सालों तक ग्रहमंत्री भी रहे हैं। उनके जानकर बताते हैं कि अमित शाह एक बार जो ठान लेते हैं वो पूरा करके ही रुकते हैं।

उनकी सफलता का कारण भी यही है। अमित शाह को चुनौतियां पसंद हैं शायद इसलिए ही प्रधानमंत्री मोदी के उनकी प्रतिभा का मूल्यांकन करते हुए उन्हें ग्रहमंत्री बनाया है।

आपको बता दें, आज जब अमित शाह ग्रह मंत्रालय पहुंचे तो केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा और खुफिया विभाग के प्रमुख राजीव जैन ने शाह का नार्थ ब्लॉक कार्यालय में स्वागत किया।