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बांदा: किसानों का केन संरक्षण और जलापूर्ति के लिए कलेक्ट्रेट का घेराव एवं जल सत्याग्रह

किसानों का जलसत्याग्रह कलेक्ट्रेट घेराव

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

ज्यों-ज्यों गर्मी अपने उफान पर आ रही है , वैसे ही जिले में जलसंकट सिर उठा रहा है ,जिसकी सबसे बड़ी कीमत किसानों और गरीबों को उठानी पड़ रही है, इसी आक्रोश के चलते बुंदेलखंड किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में भारी संख्याबल किसानों ने कलेक्ट्रेट को घेराव कर नारेबाजी के साथ ज्ञापन सौपा।

किसानों ने हांथो में जो तख्तियां उठाई थी उनमे उनका आक्रोश साफ झलक रहा था,

ज्ञात हो इन दिनों केन नदी जो कि किसानों की जीवनदायनी है, वह बालू(रेत) माफियाओं के चंगुल में है , रेत माफिया जब चाहे बहती नदी में पोकलैंड मशीनों को चलवा कर जलधार को रोक लेते है ताकि उन्हें मनमाफिक रेत उपलब्ध हो सके जिसके कारण शहर समेत समूचे क्षेत्र को सिंचाई, एवम पेयजल के लिए त्राहिमाम करना पड़ जाता है,

farmers protest for water
farmers protest for water
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आक्रोशित लोगों के अनुसार जिलाधिकारी हीरालाल का माफियाओं के प्रति रवैया बेहद नरम और उन्हें प्रोत्साहित करने वाला है ,जिसके कारण माफिया समूचे जलक्षेत्र को अपनी जागीर समझ कर दुरपयोग कर रहे है जो कि आमजन के लिए बेहद कष्टदायी है,

सनद रहे कि प्रदेश सरकार और एनजीटी के नियमावली के अनुसार बहती नदी में किसी भी प्रकार की बड़ी मशीनों का प्रयोग रेत बजरी की खुदाई दंडनीय अपराध है तथा नदी की धार को रोकना अक्षम्य अपराधों में शामिल है ,लेकिन प्रशासन के सुस्त रवैये के कारण माफियाओ के हौसले बुलन्दी पर है,
एक ओर जहां किसान कलेक्ट्रेट का घेराव कर के ज्ञापन सौप रहे है वही किसानों ने जल सत्याग्रह भी खोल रखा है ,जहां किसान पानी मे खड़े होकर प्रशासन को कुम्भकर्णी नींद से जगाने का प्रयास कर रहे है,
गौरतलब हो कि जहां जिलाधिकारी हीरालाल तालाब कुआँ जीवाओ की मुहिम चला रहे है वही उनकी नाक के नीचे बहती नदी का दम घोटा जा रहा है , देखते है किसानों की समस्याओं को सुलझाने का साहस कौन करेगा

  • यह स्टोरी उदय बुलेटिन के स्पेशल करेस्पांडेंट शिवजीत तिवारी ने कवर की है।