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महिला IAS टॉपर सृष्टि जयंत देशमुख
महिला IAS टॉपर सृष्टि जयंत देशमुख|Twitter-ANI
देश

UPSC 2018: मिलिए महिला UPSC टॉपर सृष्टि जयंत देशमुख से, जिसने पहले प्रयास में ही सफलता प्राप्त कर ली 

UPSC द्वारा शुक्रवार को सार्वजनिक कि गई 759 सफल अभ्यर्थियों की सूची में मध्य प्रदेश की सृष्टि जयंत देशमुख को AIR में 5वां स्थान मिला है। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

UPSC परीक्षा का रिजल्ट आ चुका है। इस परीक्षा के दो टॉपर हैं। पहला, AIR में प्रथम स्थान पाने वाले राजस्थान के कनिष्क कटारिया और दूसरी AIR में 5वां स्थान पाने वाली मध्यप्रदेश की सृष्टि जयंत देशमुख।

मध्य प्रदेश के भोपाल में रहने वाली सृष्टि जयंत देशमुख UPSC देने वाली महिलाओं में टॉपर रही हैं। सृष्टि ने अपने पहले प्रयास में ही ये सफलता प्राप्त कर यह साबित कर दिया है कि लड़कियां किसी से कम नहीं हैं। कैमिकल इंजीनियरिंग की पढाई करने के बावजूद सृष्टि ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा देने का फैसला लिया और अच्छी रैंक हासिल कर ली।

सृष्टि ने UPSC परीक्षा की तैयारी कॉलेज के दूसरे साल से ही शुरू कर दी थी। सृष्टि को लगता था कि, वह कैमिकल इंजीनियरिंग कर के अपने समाज के लिए काम नहीं कर पाएंगी। इसलिए उन्होंने सिविल सेवा के जरिये सीधे तौर से समाज से जुड़ने का फैसला लिया और आज उनके इस फैसले पर ना सिर्फ उनके परिवार को गर्व है बल्कि पूरा भोपाल गर्व कर रहा है।

महिला IAS टॉपर सृष्टि जयंत देशमुख
महिला IAS टॉपर सृष्टि जयंत देशमुख
Twitter-ANI

स्कूल से UPSC तक

सृष्टि के स्कूल से लेकर UPSC परीक्षा तक का सफर उनके होमटाउन भोपाल से ही पूरा हुआ। भोपाल के कान्वेंट स्कूल में 12वीं तक पढ़ने के बाद उन्होंने इसके आगे की पढाई भी यहीं से जारी रखने का फैसला लिया और भोपाल के ही LNCT कॉलेज से केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। छोटे शहरों के लोग अक्सर UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख करते हैं लेकिन उन्होंने भोपाल में ही रहकर सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी की और अपने पहले ही प्रयास में मिसाल कायम कर दी। सृष्टि केवल दिल्ली अपने इंटरव्यू के लिए गई थी।

महिला IAS टॉपर सृष्टि जयंत देशमुख
महिला IAS टॉपर सृष्टि जयंत देशमुख
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बड़े शहरों से दुरी क्यों

सृष्टि ने स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढाई भोपाल से पूरी की है। सृष्टि कहती हैं मेरे दिल्ली जा कर UPSC की तैयारी करने से कुछ फायदे भी होते और कुछ नुकसान भी। फायदा यह कि मुझे यहां मेरे माँ के हाथ का खाना खाने को मिलता है और पापा के साथ बात कर के सारी परेशानियों का हल ये मुझे वहां नहीं मिल पाता । घर से दूर रहने में काफी सारी दिक्कतें आती हैं।

दिल्ली में अच्छे टीचर है कोचिंग है। लेकिन मैंने खुद पर भरोषा किया और इंटरनेट का इस्तेमाल करती रही। मैंने सोशल मीडिया में अकाउंट कभी नहीं बनाया लेकिन इंटरनेट ने पढाई में मेरी मदद की। टेस्ट सीरीज से मेरी तैयारी अच्छी होती गई।

इंटरनेट और मेहनत रंग लाई

वैसे तो UPSC सृष्टि के बचपन का सपना था। लेकिन उनके इस सपने को पूरा करने में उनकी कोचिंग टीचर का भी योगदान है। सृष्टि कहती हैं, कोचिंग वालों ने मेरा मार्गदर्शन किया और मुझे पढाई करने के प्रेरित किया। मैं रोज 6 से 7 घंटे पढ़ती थी और जैसे-जैसे परीक्षा नजदीक आती गई मैं और ध्यान लगा कर पढ़ती गई। अच्छी तैयारी और सही मार्गदर्शन से कुछ भी असंभव नहीं होता। पर पढ़ाई करनी होती है।

सृष्टि का परिवार

सृष्टि के परिवार में पांच लोग हैं। सृष्टि की माँ एक प्राइवेट स्कूल में टीचर है। उनके पापा इंजीनियर हैं। छोटा भाई 7वीं क्लास में पढता है और घर पर दादी है। सृष्टि ने अपनी इस सफलता का श्रेय पूरे परिवार को दिया है।

सृष्टि कहती हैं UPSC परीक्षा एक लंबी यात्रा है जहां आपको 1-2 साल तक तैयारी करनी पड़ती है। मेरे माता-पिता, परिवार, दोस्तों और शिक्षकों ने मेरा समर्थन किया, इसलिए इसका श्रेय उन्हें जाता है। मैंने तय किया था कि मेरा पहला प्रयास मेरा आखिरी प्रयास होगा।और मैंने इसे एक प्रयास में सफल करने के लिए दृढ़ संकल्प लिया था जो पूरा हुआ।

महिलाओं के लिए मिशाल

सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी सरल नहीं है और इसे एक प्रयास में पास करना और भी मुश्किल है ऊपर से महिलाओं के सामने तो अलग अलग तरह की चुनौतियां आती रहती हैं। UPSC की मुख्य परीक्षा में इस बार 10,468 स्टूडेंट शामिल हुए थे। जिसमें 759 स्टूडेंट को सफलता मिली है। जिसमें 182 महिलाएं हैं। टॉप 25 स्टूडेंट्स में भी 10 लड़कियां शामिल हैं। सृष्टि जयंत देशमुख UPSC की तैयारी करने वाली हर लड़की के लिए मिशाल है।