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पीएम मोदी का AFSPA पर बयान 
पीएम मोदी का AFSPA पर बयान |Twitter-BJP
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कांग्रेस के घोषणा पत्र से सहमत हैं पीएम मोदी बोले - हम ऐसा हिन्दुस्तान चाहते हैं जिसमें AFSPA हो ही ना

कांग्रेस के पहले बीजेपी ने भी की AFSPA पर समीक्षा की बात कही है। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि "हम ऐसा हिन्दुस्तान चाहते हैं जिसमें आर्म फोर्सेज स्पेशल पॉवर एक्ट (AFSPA) हो ही ना।" प्रधानमंत्री मोदी का यह बयाना, कांग्रेस के जम्मू कश्मीर से AFSPA पर समीक्षा की घोषणा के बाद हो रही आलोचना के बाद आया है।

दरअसल जम्मू कश्मीर में AFSPA के तहत सेना को विशेष अधिकार दिया गया है। जिसपर कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में वायदा किया है कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इस कानून की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर के इसे मुद्दा बनाते हुए आलोचना शुरू कर दी। अरुण जेटली ने कहा -

"कांग्रेस का AFSPA की समीक्षा करना, देशद्रोह पूर्ण कार्य है। ऐसा करने वाली पार्टी को एक वोट भी नहीं मिलना चाहिए। "

लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी AFSPA को मुद्दा बनाते हुए बोल पड़े है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक न्यूज़ चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में कहा -

हम ऐसा हिन्दुस्तान चाहते हैं जिसमें AFSPA हो ही ना। त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों और मेघालय से सरकार पहले ही AFSPA हटा चुकी है। कश्मीर में स्थिति सामान्य होते ही, वहां से AFSPA वापस कर देंगे। लेकिन उससे पहले उस स्थिति का निर्माण तो किया जाना चाहिए, जिससे इसकी आवश्यकता ही ना पड़े। कांग्रेस जैसी पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर घोषणापत्र में ऐसी बात कर रही है। ऐसा उन्हें शोभा देता है क्या ? कांग्रेस ने 60 साल से भी अधिक साल तक देश पर राज किया है, उनके पास अनुभवी नेता हैं, लेकिन उन्होंने सबको निराश किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

क्या है AFSPA कानून ?

सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम ( AFSPA) भारतीय संसद द्वारा 11 सितंबर 1958 में पारित किया गया था। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड के ‘अशांत इलाकों’ में तैनात सैन्‍य बलों को शुरू में इस कानून के तहत विशेष अधिकार हासिल थे। कश्मीर घाटी में आतंकवादी घटनाओं में बढोतरी होने के बाद जुलाई 1990 में यह कानून सशस्त्र बल (जम्मू एवं कश्मीर) विशेष शक्तियां अधिनियम, 1990 के रूप में जम्मू कश्मीर में भी लागू किया गया। हालांकि राज्‍य के लदाख इलाके को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया।

इस कानून का विरोध करने वालों में मणिपुर की कार्यकर्ता इरोम शर्मिला का नाम प्रमुख है, इस कानून के खिलाफ इरोम शर्मिला ने 16 वर्षों तक उपवास किया। फिलहाल इरोम शर्मीला अपने पती के साथ बैंगलोर में रहती हैं। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2018 को मेघालय से AFSPA हटा लिया था।

2015 में भी उठी थी समीक्षा की मांग

आपको बता दें कि, साल 2015 में बीजेपी की सहयोगी पार्टी पीडीपी ने AFSPA कानून में समीक्षा की मांग उठाई थी और यहां तक कि साल 2015 में जम्मू-कश्मीर का विधानसभा चुनाव भी AFSPA को मुद्दा बना कर ही लड़ा गया था। 2015 में बीजेपी ने वायदा किया था कि चुनाव के बाद AFSPA को हटा दिया जायेगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ चुनाव के बाद बीजेपी और पीडीपी ने सरकार तो बनाई पर AFSPA पर कोई कार्यवाई नहीं हुई।

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने AFSPA पर कांग्रेस का समर्थन करते हुए कहा -

“ कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में AFSPA हटाने का वायदा कर के बड़ा साहस दिखाया है। लेकिन AFSPA को लेकर कांग्रेस जो इस लोकसभा चुनाव में कर रही है यह वायदा बीजेपी उसे पहले ही कर चुकी है। “