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लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह
लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह|Google
देश

लोकसभा इलेक्शन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन बड़े बीजेपी नेताओं से नहीं बनती

नरेंद्र मोदी के खिलाफ आवाज उठाने वाले बीजेपी के नेता नए नहीं हैं। 

AKANKSHA MISHRA

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे ब्रांड है जिनकी सफलता और विफलता कोई मायने नहीं रखती। मोदी के चाहने वाले न सिर्फ उनके राजनीतिक नेतृत्व के कायल हैं बल्कि उनके काम करने के ढंग, उनके अनुशासन के भी कायल हैं। कैमरे में रिकॉर्ड हुई नरेंद्र मोदी की हर मूवमेंट पर मीडिया की नज़र होती हैं, जब भी वे मीडिया के सामने आते हैं तो उनकी हर बात बहस की वजह बनती है और इन्हीं कारणों से बीजेपी के कुछ पुराने चावल खुद को मोदी के सामने छोटा महसूस करते हैं, और उनसे द्वेष रखते हैं।

आइए जानते हैं बीजेपी के कुछ नेताओं के बारे में जो मोदी के दुश्मन नहीं, पर दोस्त भी नहीं हैं-

आडवाणी और नरेंद्र मोदी 
आडवाणी और नरेंद्र मोदी 
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लाल कृष्ण आडवाणी

साल 2013 का समय था, बीजेपी संगठन ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को, उस समय के वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व उप-प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के अड़ने के बाद भी बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित क्या था। आडवाणी नहीं चाहते थे कि पार्टी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करे। उनकी नज़र में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रधानमंत्री पद के उपयुक्त दावेदार थे। जब पार्टी ने आडवाणी की बात अनसुनी कर दी तो उन्होंने कहा था -

“गुजरात के नरेंद्र भाई से ज्यादा बड़ा काम तो मध्यप्रदेश के शिवराज सिंह चौहान ने किया है, उन्होंने बीमारू राज्य मध्यप्रदेश को विकास के रास्ते पर चला दिया। गुजरात तो पहले से ही विकसित राज्य था।”

शिवराज को मोदी से बेहतर मुख्यमंत्री बताने के बाद आडवाणी और नरेंद्र मोदी के बीच के मनमुटाव को बार-बार हवा मिलती रही और इस बार बीजेपी ने आडवाणी की गांधीनगर सीट से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को उतारने का फैसला लिया है।

शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र मोदी 
शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र मोदी 
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शिवराज सिंह चौहान

भोपाल के जंबूरी मैदान में बीजेपी कार्यकर्ता महाकुंभ था। वहां बीजेपी के लाखों कार्यकर्ताओं की भीड़ मौजूद थी। मंच पर कुछ दिन पहले मनोनीत हुये पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी के साथ-साथ शिवराज सिंह चौहान भी थे। बीजेपी की तरफ से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय किये जाने के वाद, पहली बार पार्टी के ये तीनों बड़े नेता सार्वजनिक मंच पर एक साथ थे।इसलिए सबकी नजर सबसे ज्यादा मोदी और शिवराज पर थी । शिवराज इस सभा में मेजबान थे। मगर जब वो भाषण देने आते हैं तभी समने बैठे कार्यकर्ता मोदी -मोदी के नारे लगाने लगते हैं। और ये नारे धीरे-धीरे बढ़ते गए। ऐसा पहली बार हुआ जब शिवराज के मंच पर उन्हें ही बोलने का मौका नहीं मिला। शिवराज को नीचा दिखाने की यह कोशिश, बीजेपी के प्रायोजित समर्थकों ने की थी।

प्रधानमंत्री मोदी और यशवंत सिन्हा 
प्रधानमंत्री मोदी और यशवंत सिन्हा 
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यशवंत सिन्हा

साल 2014 में यशवंत सिन्हा, नरेंद्र मोदी के समर्थक हुआ करते थे। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को सिन्हा ने बड़े-बड़े नेताओं से मिलवाया था। यशवंत सिन्हा का कार्यकाल उस साल समाप्त होने वाला था, उनकी उम्र 81-82 हो रही थी। वे चाहते थे कि मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें ब्रिक्स बैंक का चेयरमैन बना दें। लेकिन नरेंद्र मोदी ने ऐसा नहीं किया। पार्टी ने भी इसका विरोध किया। जिसके बाद यशवंत सिन्हा पार्टी विरोधी हो गए। सिन्हा, लगातार प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांग रहे थे, उन्हें उनसे कुछ विषयों पर चर्चा करनी थी। लेकिन मोदी ने उन्हें समय नहीं दिया। जिसके बाद सिन्हा, हर फोरम पर प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलते नज़र आये।

प्रधानमंत्री मोदी और शत्रुघ्न सिन्हा
प्रधानमंत्री मोदी और शत्रुघ्न सिन्हा
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शत्रुघ्न सिन्हा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शत्रुघ्न सिन्हा की नाराजगी भी साल 2014 के बाद शुरू हुई। जब पटना से चुनाव जीत कर आये शत्रुघ्न सिन्हा को मोदी कैबिनेट में कोई जगह नहीं मिली और चुनाव हार कर आई टीवी एक्ट्रेस स्मृति ईरानी को कैबिनेट मंत्री बना दिया गया। जिसके बाद शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी से एक और गुजारिश की, शत्रुघ्न सिन्हा चाहते थे कि मोदी सरकार उन्हें पद्धमभूषण दें, और इसके लिए उन्होंने बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से पैरवी भी की। लेकिन उन्हें यह भी नहीं मिला। जिसके बाद शत्रुघ्न सिन्हा मोदी विरोधी बन गए।

शत्रुघ्न सिन्हा अब कांग्रेस ज्वाइन कर चुकें हैं।