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पुलवामा के बाद कश्मीर में जारी एनकाउंटर
पुलवामा के बाद कश्मीर में जारी एनकाउंटर |IANS
देश

पुलवामा के बाद कश्मीर में जारी एनकाउंटर को देख कर नहीं लगता कि इस हिंसा का हल नजदीक है 

जम्मू एवं कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय और पाकिस्तानी सेनाओं के बीच बीती रात से शुरू हुई भारी गोलाबारी बुधवार तड़के तक जारी रही।

AKANKSHA MISHRA

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जब बंदूक से गोली निकलती है, तो वह ये देख कर नहीं लगती कि समने वाला हिन्दू है या मुस्लिम, सिख है या ईसाई। इस गोली से मरता एक इंसान है। 14 फ़रवरी को पुलवामा आतंकी हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे। CRPF के काफिले पर आतंकियों का यह हमला जम्मू कश्मीर के हाइवे पर किया था। इस हमले को अंजाम देने वाला आदिल डार जम्मू कश्मीर का स्थानीय युवक था। आदिल का घर हाइवे से केवल 10 किलो मीटर की दुरी पर है।

इस हमले को अंजाम देने से 10 महीने पहले ही आदिल डार ने अपना घर छोड़ दिया था और जैश ऐ मोहम्मद में शामिल हो गया था। आदिल डार की मौत के बाद उसके परिवार वाले दुखी हैं, उन्हें गम है कि उन्होंने अपने बेटे के जनाज़े को कंधा नहीं दिया। आदिल डार के पिता गुलाम हसन डार के जीवन में बेटे की मौत के बाद अधूरापन है, उन्हें दुःख है कि उनके बेटे की लाश तक घर नहीं आई, बेटे को दफनाया तक नहीं गया। लेकिन उन्हें मालूम था कि ऐसा होने वाला है, उनका बेटा लाश बन कर ही लौटेगा।

आदिल डार
आदिल डार
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आदिल डार जैश ऐ मोहम्मद के लिए काम करता था, लेकिन कश्मीर में इसके अलावा भी कई संगठन है जो आतंकी गतिविधियों में लिप्त है। जानकारों का मानना है कि कश्मीर में जैश ऐ मोहम्मद, लश्कर-ए-तैबा और हिज़्बुल मुजाहिदीन सबसे ज़्यादा सक्रिय है।

हिज़्बुल मुजाहिदीन

हिज़्बुल मुजाहिदीन के प्रमुख 33 वर्षीय रियाज़ नाइकू हैं। वे कभी गणित के टीचर हुआ करते थे। पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा लेने के बाद रियाज़ नाइकू ने हथियार उठा लिया और अब वे कश्मीर घाटी के मोस्ट वांटेड लोगों की लिस्ट में शामिल हैं। रियाज़ नाइकू भी भारत द्वारा संचालित कश्मीर के रहने वाले हैं। उनका परिवार भी आदिल डार के परिवार की तरह मान बैठा है कि अब देर सवेर उनके घर में रियाज़ नाइकू की लाश आएगी। लेकिन रियाज़ के परिवार को लगता है, रियाज़ मुस्लिम धर्म का पालन कर रहे हैं, रियाज़ के पिता कहते हैं, "एक मुस्लिम होने के नाते, यह गर्व की बात है, हम ये नहीं कहेंगे कि यह गलत है, अगर वो ड्रग्स या अवैध गतिविधियों में शामिल होता, तो हमारा नाम खराब होता, लेकिन हमें राहत है कि वो सही काम कर रहा है।"

रियाज़ नाइकू
रियाज़ नाइकू
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आतंकियों को स्थानीय लोग बढ़ावा देते हैं ?

कश्मीर में आतंक फ़ैलाने वाले कश्मीरी है, कश्मीर के स्थानीय लोग इन्हें मदद करते हैं। सेना और प्रशासन दोनों ये बात जानती हैं। जब कोई डार या गुरु मरता है तो उसके परिवार को समाज में ऊंचा दर्जा मिलता। आतंकियों और चरमपंथियों को कश्मीर के स्थानीय लोगों का पूरा साथ मिलता है। लोग इन आतंकियों को पनाह देते हैं, खाने पीने का इंतजाम करते हैं और जब सेना इन पर कार्रवाई के लिए आती है तो इन्हें भागने में मदद भी करते हैं और जब जरुरत पड़ी तो पत्थर बाज भी बन जाते हैं। अगर पुलिस के आने पर उन्हें आगाह नहीं किया जाये तो कब तक ये आतंकी बच सकते हैं ?

कश्मीरी
कश्मीरी
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आगे क्या हो सकता है ?

कश्मीर के स्थानीय लोगों का मनना है कि कश्मीर को समस्या केंद्र और राज्य सरकार ही बना रही है, इस समस्या का समाधान केवल बातचीत ही है। भारत- पाकिस्तान-कश्मीर में बातचीत हो और इस हिंसा को रोका जाये। कश्मीर के लोग न तो अपने बच्चे को मिलिटेंट बनने से रोक करते हैं और न उनके विचारों में फ़ैल रही हिंसा को।

पुलवामा हमले के बाद भी कश्मीर में एनकउंटर जारी है। कभी राजौरी, कभी नौशेरा कभी पुंछ तो कभी पुलवामा। आखिर कब तक सेना यहां संघर्ष करती रहेगी ? न जाने अब तक कितने सैनिक शहीद हुए हैं और कितने कश्मीरी मिलिटेंट बने। इस समस्या का हल अगर बातचीत है तो पहल करें।