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गंगा
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जिसे माँ कह पूजा करते हैं , उसे इतना दूषित कर चुके हैं की, वो समय दूर नही जब गंगा पूरी “मैली” हो जाएगी....

माँ  “गंगा” अपने उद्गम स्थल गंगोत्रि से निकलकर उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, बिहार, पश्चिमी बंगाल के रास्ते 2525 किलोमीटर का सफ़र तय करती है|

Divyanshu Singh

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मानव जाति का इतिहास हमेशा से किसी ना किसी नदी का आभारी रहा है | या यूँ कहा जाये कि अगर आज मानव जिस भी जगह तरक्की या ऊंचाइयों को छू रहा है ,तो इसकी शुरुवात में कहीं ना कहीं नदियों का विशेष स्थान रहा है | प्राचीन मिश्र की सभ्यता रही हो, या सिन्धु घाटी की सभ्यता इनका जन्म और इनका विकास नदियों पर ही निर्भर था | इनका अंत कैसे हुआ ये आज भी शोध का विषय है, और वैज्ञानिकों में अलग अलग राय है |

बात करें भारत की, तो भारत अपने आप में एक अद्भुत देश है | जिसका इतिहास बड़ा ही गौरवशाली रहा है ,और भारतीय संस्कृति में नदियों का विशेष योगदान रहा है , इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की प्राचीन कहानियों के अनुसार राजा भागीरथी ने घोर तपस्या कर गंगा को पृथ्वी पर लाया था | ये तो एक प्राचीन कहानी थी, पर भारतीयों के लिए गंगा का विशेष महत्त्व है, ये ना सिर्फ एक बहुत बड़े भूभाग को खेती के लिए जल उपलब्ध कराती है बल्कि कई कल कारखाने जो भारतीय अर्थव्यवस्था में अपना बड़ा योगदान दे रहे हैं, वो भी गंगा के किनारे ही स्थित है |

ganga in varanasi
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आस्था की नज़र से गंगा भारतवर्ष के लिए माँ सामान है, और आस्था के अनुसार गंगा में डूबकी लगाने से एक इंसान पवित्र हो जाता है | प्राचीनतम शहरों में एक शहर भारत की “आध्यात्मिक राजधानी” बनारस(काशी) भी गंगा के किनारे ही स्थित है | सनातन धर्म के अनुसार काशी के घाट पर अंतिम संस्कार करने से और अस्थियों को गंगा में प्रवाह करने से उस मृत व्यक्ति को मोक्ष प्राप्ति होती है | इतना ही नही विश्व का सबसे बड़ा आयोजन “कुंभ” जिसमें भारत ही नही बल्कि पुरे विश्व से लोग आते हैं , वहां योग, ध्यान, आध्यात्म और संस्कृति का अनुभव होता है | यह आयोजन भी गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम स्थान पर होता है |

खरकई नदी
खरकई नदी
Divyanshu Singh

इतनी अनोखी संस्कृति होने के बावजूद हम इंसान जिसे माँ कह पूजा करते हैं , समय के साथ उसे इतना दूषित कर चुके हैं की अगर गंगा में प्रदूषण का यही लेवल रहा तो वो समय दूर नही जब गंगा भी पूरी “मैली” हो जाएगी, हर दिन गंगा में लाखों टन गन्दापानी, कूड़ा, कचरा मिलता आ रहा है , चूँकि भारत में हर चीज़ पर राजनीति होती है, चाहे वो एक मोहल्ले का मुद्दा हो या धर्म और आस्था का मुद्दा हो, और तो और भारत की राजनीती का मुख्य केंद्र बिंदु धर्म और आस्था ही रहा है , शायद जिसका थोडा सा फायदा गंगा को मिला और गंगा को स्वच्छ करने के लिए सन 2014 से “नमामि गंगे” के अंतर्गत 230 प्रोजेक्ट की शुरुवात की गयी जिसमे 20000 करोड़ रूपए दिए गए | जिसमे कई सारे काम किये जाने थे जैसे घाटो की सफाई ,नगरपालिका सीवेज का उपचार,औद्योगिक प्रवाह का उपचार,नदी के सतह की सफाई ,ग्रामीण स्वच्छता,वनीकरण, जैव विविधता ,जागरूकता पैदा करना, सार्वजनिक पहुँच बनाना इत्यादि | जिसमे से 63 प्रोजेक्ट कम्पलीट हो चुके हैं, और बाकी सारे प्रोजेक्ट्स क्रियावांकन के विभिन्न चरणों में हैं |

“नमामि गंगे प्रोजेक्ट सफल होगा, मार्च 2019 तक गंगा की सफाई 70 से 80 प्रतिशत करने का उद्देश्य है” :- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

ये तो गंगा की बात थी नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू हुआ पर पुरे भारत में कितनी ही ऐसी नदियाँ हैं जो प्रदुषण की चपेट में या तो विलुप्त होने के कगार पर है या उनका पानी इतना जहरीला हो चुका है की उससे अब खेती भी नही की जा सकती है |

”जब जागो तब सवेरा” अब भी ज्यादा कुछ नही बिगड़ा है , अगर अब से भी हम नदियों की सफाई की ओर पूरी लगन से ध्यान दे तो वो समय दूर नही, “जब हर नदी गंगा जैसी पवित्र हो जाएगी ” |