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पुलवामा हमले के बाद सिद्धू का बयान
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बीजेपी सांसद नेपाल सिंह के इस बयान के बाद, सिद्धू से हमदर्दी होनी चाहिए ?

उत्तर प्रदेश के बीजेपी सांसद नेपाल सिंह ने पुलवामा हमले के शहीद जवानों का किया अपमान।  

आज देश में भयानक उथल पुथल मची हुई है। कश्मीर हमले के बाद पूरे देश में तनाव पूर्ण माहौल बन गया है। दोस्त और दुश्मन के बीच अंतर पता कर पाना भी असंभव सा लग रहा है। लोग बॉर्डर पर जा कर मरने-मारने को उतारू हो रहे हैं। लेकिन देशभक्ति साबित करने के लिए, किसी हमले की जरुरत क्यों पड़ती है हमें ?

सेना का खून देखे बिना देशभक्ति की चिंगारी लोगों के दिलों में क्यों नहीं फूटती है ? शहीद जवानों की विधवा पत्नियों की आखों में आंसू देखे बिना लोगों का दिल क्यों नहीं पसीजता ? बिना आतंकी हमले के देशभक्ति क्यों नहीं जागती है?

पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए हमें क्यों मरना पड़ता है ? क्यों मौके तलाशने पड़ते हैं ? या सिर्फ ये एक राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए बुना गया जाल है ? जिसमें आतंकवादी के नाम पर चारे डाले जाते हैं और देशभक्ति नाम के वोटर लपेटे जाते हैं ?

पुलवामा हमले के बाद सिद्धू का बयान
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जनमानस की माने तो पुलवामा हमले का बदला लेना चाहिए। राजनीति भी यही कहती है कि मौके का फायदा उठाया जाये और जब इसमें सोशल मीडिया का तड़का लग जाये तो मामला और भी स्वादिष्ट हो जाता है। वर्तमान सरकार पाकिस्तान को सबक तो सिखाना चाहती है लेकिन थोड़ा राजनीति का रंग मिला ही दिया जाता है और रंग में भंग तब पड़ जाता है जब ऐसे मसलों पर सोशल मीडिया में सच्चे देश भक्त होने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो जाती है।

देश भक्ति ऐसा मुद्दा है जो किसी को भी सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा सकता है वो भी तब जब लोकसभा चुनाव इतने करीब हो।14 फ़रवरी से पहले जहां हर तरफ राफेल सौदे में गड़बड़ी और बेरोजगारी की बात हो रही थी वही 14 फ़रवरी के बाद यह जगह देश भक्ति ने ले ली है। खैर जब बात देशभक्ति और कश्मीर हमले की हो रही हो तो इन सब के बीच एक जरुरी मुद्दा और है। पुलवामा हमले के बाद देश भर में कश्मीरियों के साथ जो दुर्व्यवहार किया जा रहा है उसे भी रोकना चाहिए।

पुलवामा हमले के बाद सिद्धू का बयान
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पूर्व बीजेपी नेता और वर्तमान कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू बड़बोले नेता हैं। पुलवामा हमले के बाद उन्होंने जो कहा उसके बाद पूरा देश आक्रोश में आ गया है, सिद्धू के कहा था कि आतंकवाद का कोई देश और धर्म नहीं होता, कुछ भी हो जाए कश्मीर मसले पर बातचीत से ही हल निकाला जा सकता है ,पाकिस्तान से हमें बातचीत जारी रखनी चाहिए।' सिद्धू के इस बयान के बाद उनकी काफी आलोचना हुए सोनी टीवी ने उन्हें 'द कपिल शर्मा शो' से निकालने की बात कही, मामला इतना बढ़ गया कि पंजाब विधानसभा से उन्हें निकालने की मांग उठने लगी। सोशल मीडिया भी उन्हें हर जगह से निकाल फेंकने को तैयार हो गया। लेकिन ठीक, उसी समय बीजेपी नेता नेपाल सिंह ने बयान दिया उन्होंने कहा कि ‘ये तो रोज़ मरेगें आर्मी में, कोई ऐसा देश है जहां आर्मी का आदमी न मरता हो, उन्हें इसी का तो वेतन मिलता है न ? ऐसे महान विचार रखने वाले नेता सत्ताधारी पार्टी और देशभक्ति का सर्टिफिकेट देने वाली पार्टी बीजेपी के सांसद है। उनके बयान को न तो सोशल मीडिया में वायरल हुआ और न ही उन पर कोई करवाई की मांग हुई।

2014 से पहले जब कोई आतंकी हमला हुआ तो खुद नरेंद्र मोदी ने उन सभी हमलों के लिए मनमोहन सरकार को जिम्मेवार बताया था। प्रधानमंत्री मोदी कहा करते थे कि दिल्ली सरकार के पास वो सीना ही नहीं जो आतंकवाद को रोक सके, अब अपनी 56 इंच की छाती से आतंकवाद को रोकने में नाकामयाब होने वाले प्रधानमंत्री मोदी, पहले पठानकोट, फिर उरी और अब पुलवामा हमले की जिम्मेवारी लेने से क्यों कतरा रहे हैं ?