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सामने आई राफेल सौदे से जुड़ी चिठ्ठी
सामने आई राफेल सौदे से जुड़ी चिठ्ठी|Google
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Rafale fighter jet deal: सामने आई राफेल सौदे से जुड़ी चिठ्ठी, PMO और फ्रांस के राष्ट्रपति का ऑफिस सीधे इस मामले में नजर रख रहा था

Rafale fighter jet deal: राफेल विमान सौदे से जुड़े एक दस्तावेज के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी सरकार कटघरे में आ गए है। बीजेपी को अब सामने आ कर सफाई देनी पड़ रही है। 

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: Rafale fighter jet deal: राफेल लड़ाकू विमान सौदे का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर फ्रांस के साथ लड़ाकू जेट राफेल सौदे में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप लगाया और इस सौदे के बारे में पत्रकारों से समानांतर वार्ता की। उन्होंने सम्मेलन में कहा, "हम एक साल से अधिक समय से कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री राफेल घोटाले में सीधे तौर पर शामिल हैं। आज द हिंदू अखबार ने भी साफ शब्दों में यही खुलासा किया है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री स्वयं फ्रांस के साथ समानांतर वार्ता कर रहे थे।" जिसके बाद यह मुद्दा लोकसभा में छाया रहा जहां एकजुट विपक्ष ने एक अखबार की खबर का हवाला देते हुए मामले की संयुक्त संसदीय समित (जेपीसी) से जांच कराने तथा प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की।

वहीं मोदी सरकार ने आरोप लगाया कि विपक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निहित स्वार्थ से जुड़े तत्वों के हाथों में खेल रहा है और उसका प्रयास गड़े मुर्दे उखाड़ने जैसा है।

सामने आई राफेल सौदे से जुड़ी चिठ्ठी
सामने आई राफेल सौदे से जुड़ी चिठ्ठी
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दरअसल 'द हिंदू' द्वारा शुक्रवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित करने के बाद की जिसमें अखबार ने कहा, "रक्षा मंत्रालय ने राफेल वार्ता को कमजोर करने के लिए पीएमओ का विरोध किया था।" जिसके बाद राहुल ने भी प्रधानमंत्री पर आरोप लगते हुए कहा, "आज द हिंदू अखबार ने भी साफ शब्दों में यही खुलासा किया है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री स्वयं फ्रांस के साथ समानांतर वार्ता कर रहे थे।"

'द हिन्दू' अखबार के मुताबिक 24 नवंबर 2015 को रक्षा मंत्रालय के एक नोट में कहा गया कि PMO के दखल के चलते बातचीत कर रहे भारतीय दल और रक्षा मंत्रालय की पोज़िशन कमज़ोर हुई। रक्षा मंत्रालय ने अपने नोट में तब के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का ध्यान खींचते हुए कहा था कि हम PMO को ये सलाह दे सकते हैं कि कोई भी अधिकारी जो बातचीत कर रहे भारतीय टीम का हिस्सा नहीं है उसे समानांतर बातचीत नहीं करने को कहा जाए। इस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधे पीएम मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने इसमें घोटाला किया है।

इस हंगामे पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने अखबार पर सवाल उठाते हुए कहा, "एक समाचारपत्र ने रक्षा सचिव की नोटिंग को प्रकाशित किया। अगर कोई समाचारपत्र एक नोटिंग को छापता है, तो पत्रकारिता की नैतिकता की मांग है कि तत्कालीन रक्षामंत्री का जवाब भी प्रकाशित किया जाए। "दूसरी ओर समाचार एजेंसी ANI की पहुंच उस दस्तावेज़ तक बनी है, जिसमें तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने रक्षा मंत्रालय के राफेल सौदे से जुड़े असंतुष्टि नोट पर जवाब दिया था - "रक्षा सचिव (जी मोहन) को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव से सलाह-मशविरा कर इस मुद्दे को हल करना चाहिए।" पूर्व रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने भी बयान दिया है कि राफेल की कीमत को लेकर रक्षा मंत्रालय ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

इसी तरह के एक जवाब में मनोहर पर्रिकर ने कहा, ऐसा लगता है कि बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय और फ्रांस के राष्ट्रपति का ऑफिस सीधे इस मामले में नजर रख रहा है। 5वें अनुच्छेद में लिखी गई जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया है।

यह मामला अब इससे अधिक और स्पष्ट नहीं हो सकता। यह एकदम साफ नजर आ रहा मामला है जिसमें रक्षा मंत्रालय कह रहा है कि प्रधानमंत्री ने खुद एक समानांतर वार्ता की थी।

आईएएनएस