उदय बुलेटिन
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CBI के खिलाफ ममता का आंदोलन
CBI के खिलाफ ममता का आंदोलन|Twitter
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लालू यादव की गिरफ़्तारी पर ममता ने किया था CBI को सपोर्ट, फिर आज क्यों है CBI के खिलाफ  

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शारदा चिटफंड घोटाले के आरोपी कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से CBI की पूछताछ के प्रयास के विरोध में धरने पर बैठी हैं।

AKANKSHA MISHRA

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बंगाल: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शारदा चिटफंड घोटाले के आरोपी कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से CBI की पूछताछ के प्रयास भर से ही विरोध प्रदर्शन शुरू करते हुए धरने दे दिया है। ममता बनर्जी बीते रविवार से धरने पर बैठी हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि, किसी राज्य की मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के आरोपी के समर्थन में इस तरह धरने पर बैठ गई है। ममता बनर्जी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे भ्रष्टाचारियों का समर्थन कर रही हैं। हालांकि ममता इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती हैं। उनका कहना है कि, हमारी लड़ाई किसी एजेंसी के खिलाफ नहीं है, हम मोदी सरकार के अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।”

सीबीआई के नाम पर राजनीती क्यों

अब सवाल ये भी है कि, क्या किसी राज्य में देश की सबसे प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई को कार्य करने की अनुमति नहीं है ? अगर अनुमति है तो ममता बनर्जी की सरकार ने सीबीआई के अधिकारों को हिरासत में क्यों लिया ? अगर किसी पुलिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप हो तो क्या सीबीआई पूछताछ नहीं कर सकती ? सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, जवाबी करवाई करते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें रातों-रात उनके पद से हटा दिया और उनके उनपर लगे भ्रष्टाचार मामले की जांच शुरू हुई। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आलोक वर्मा को दोबारा निदेशक पद पर सह-शर्त बहाल किया और जांच के आदेश किये। जब सीबीआई अपने निदेशक पर करवाई करते हुए उनसे पूछताछ कर सकती है तो कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से क्यों नहीं।

CBI के खिलाफ ममता का आंदोलन
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नब्बे के दशक में भी हुआ है ऐसा

ममता बनर्जी की सरकार और सीबीआई के बीच उठता यह विवाद तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब सबको ऐसा लगता है कि कोलकाता पुलिस बनाम सीबीआई या ममता बनर्जी बनाम केंद्र का यह टकराव ऐतिहासिक स्तर का होने वाला है। लेकिन क्या आप जानते हैं नब्बे के दशक में इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला वाकया सामने आया था। यह घटना बिहार की है। उस समय राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री हुआ करती थी। तत्कालीन सीबीआई जॉइंट डायरेक्टर यू.एन. बिस्वास चारा घोटाले की जांच कर रहे थे। साल 1997 की बात है, बिस्वास राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार करना चाहते थे। उस समय भी सीबीआई को लालू यादव के खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट को लागू करने में कोई मदद नहीं मिली थी। राज्य सरकार की मशीनरी लालू यादव की गिरफ्तारी अड़चनें डाल रही थी। तब बिस्वास ने सीबीआई के पटना स्थ‍ित एसपी से कहा कि वह लालू प्रसाद को गिरफ्तार करने के लिए सेना की मदद लें। लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। राज्य के DGP, SP सभी सरकारी दबाव में थे। जिसके बाद सीबीआई को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा। कोर्ट ने असहयोग के लिए बिहार के डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

सीबीआई के तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर यू.एन. बिस्वास कि ईमानदारी की तारीफें भी हुई। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की जीन सीबीआई अधिकारीयों को ममता सरकार ने हिरासत में रखा था उन्हें सीबीआई अधिकारी को ममता ने अपनी पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था। जी हाँ, यू.एन. बिस्वास ममता बनर्जी की पार्टी में शामिल हुए थे। ममता ने उन्हें अपनी सरकार में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का मंत्री बनाया।

इन राज्यों में नहीं है सीबीआई को करवाई की इजाजत

  • पश्चिम बंगाल
  • आंध्र प्रदेश
  • छत्तीसगढ़

आपको बात दें कि, सीबीआई गठन कानून के मुताबिक किसी भी राज्य में सीबीआई को कार्रवाई करने से पहले वहां की राज्य सरकार से अनुमति लेने का प्रावधान है। राज्य सरकार की अनुमति के बिना सीबीआई उस राज्य के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकती है। ममता बनर्जी का आरोप है कि, सीबीआई ने करवाई से पहले राज्य सरकार से अनुमति क्यों नहीं ली ?