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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने निसान इंडिया और सेव लाइफ फाउंडेशन की शोध रिपोर्ट जारी की 
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने निसान इंडिया और सेव लाइफ फाउंडेशन की शोध रिपोर्ट जारी की |Nitin Gadkri-twitter
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98 फीसदी भारतीय है बेहद लापरवाह, नहीं लगाते कार में सीट बेल्ट - रिपोर्ट

निसान इंडिया के प्रेसिडेंट थॉमस क्वेहल ने कहा, “भारत में एक तरफ सड़क सुरक्षा (Road Safety) पर जोर दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ लोग रियर सीट बेल्ट का इस्तेमाल करने की अनदेखी कर रहे हैं।

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: भारत में 90 फीसदी लोग कार में पीछे की सीट पर बेल्ट नहीं बांधते हैं, जिससे उनकी जान को हमेशा खतरा बना रहता है। यह तथ्य शुक्रवार को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) द्वारा जारी निसान इंडिया (Nissan India) और सेव लाइफ फाउंडेशन (Save Life Foundation) की शोध रिपोर्ट में उजागर हुआ है। मालूम हो कि देश के मौजूदा कानून में कार की पीछे वाली सीट पर बेल्ट बांधना अनिवार्य है।

इस रिपोर्ट की पुष्टि दिल्ली, मुंबई, जयपुर, बेंगलुरू, कोलकाता और लखनऊ में किए गए सर्वेक्षण से हुई है, जहां 98 फीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि वे कार की पीछे वाली सीट पर बेल्ट नहीं बांधते हैं। सर्वेक्षण में 70 फीसदी लोगों ने कार की पीछे वाली सीट पर बेल्ट होने की पुष्टि की।

इस मौके पर गडकरी (Nitin Gadkari) ने कहा कि सरकार सड़क सुरक्षा (Road Safety) को अहम मानती है और इस दिशा में लोगों में जागरूकता लाने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि कॉरपोरेट और सिविल सोसायटी साथ मिलकर सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता लाने में सहयोग करेंगे।"

सर्वेक्षण में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, जिसमें दो-तिहाई लोगों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की और कहा कि भारत की सड़कें बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है।

हैरानी की बात है कि लोगों को मालूम है कि बच्चों के लिए हेलमेट का उपयोग किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी सुरक्षा होगी, फिर भी वे इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं।

सर्वेक्षण में 92.8 फीसदी लोगों ने कहा कि वे बच्चों के हेलमेट के बारे में जानते हैं, लेकिन महज 20.1 फीसदी लोगों ने ही बताया कि वे यात्रा के दौरान बच्चों के लिए हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं।

हाल ही में सड़क और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि 2017 में सड़क हादसों में 9,408 बच्चों की मौत हो गई। इससे जाहिर है कि देश की सड़कों पर रोजाना 26 बच्चों की मौत होती है।

निसान इंडिया और सेव लाइफ फाउंडेशन (Save Life Foundation) की शोध रिपोर्ट में कहा गया कि सर्वेक्षण के दौरान सिर्फ 27.7 फीसदी लोगों ने बताया कि उनको मालूम है कि देश के मौजूदा काननू में कार की पीछे वाली सीट पर बेल्ट बांधना अनिवार्य है।

रिपोर्ट में कहा गया कि 91.4 फीसदी लोग मानते हैं कि भारत में बच्चों के लिए सड़क सुरक्षा कानूनों को सख्त बनाने की जरूरत है।

निसान इंडिया के प्रेसिडेंट थॉमस क्वेहल ने कहा, "भारत में एक तरफ सड़क सुरक्षा (Road safety) पर जोर दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ लोग रियर सीट बेल्ट का इस्तेमाल करने की अनदेखी कर रहे हैं। हम इस पहल के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद करते हैं।"

सेव लाइफ फाउंडेशन (Save Life Foundation) के संस्थापक और सीईओ पीयूष तिवारी ने कहा, "रिपोर्ट में बाल सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दों पर रोशनी डाली गई है।"

उन्होंने कहा कि लोगों को बच्चों की सुरक्षा के लिए हेलटमेट का इस्तेमाल करना चाहिए और स्कूल जोन में सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही, स्कूल बसों के चालकों के लिए विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

--आईएएनएस