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विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज |IANS
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बीजेपी की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज नहीं लड़ेगी 2019 का लोकसभा चुनाव, जाने करण

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां मंगलवार को कहा कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी।

AKANKSHA MISHRA

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मध्य प्रदेश, इंदौर | भारतीय जनता पार्टी की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भाग नहीं लेंगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यहां मंगलवार को कहा कि वह 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करने के दौरान सुषमा स्वराज ने यह बड़ा ऐलान किया।

मध्य प्रदेश के इंदौर में प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यह बड़ा ऐलान किया। 66 वर्षीय सुषमा स्वराज ने कहा कि मैंने मन बनाया है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में मैं नहीं लड़ूंगी। भाजपा की वरिष्ठ नेता ने एक कार्यक्रम से इतर कहा, "उम्मीदवारों का चयन पार्टी द्वारा होता है लेकिन मैंने अपना मन बना लिया है कि मैं अगला चुनाव नहीं लड़ूंगी।" रिपोर्ट की मानें तो उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है।

सुषमा ने प्रेसवार्ता के दौरान यह भी कहा कि उन्होंने अपने फैसले से पार्टी को अवगत करा दिया है। हालांकि, सुषमा स्वराज ने यह भी कहा कि फैसला पार्टी को लेना है, मगर उन्होंने अगला चुनाव नहीं लड़ने का मन बना लिया है सुषमा स्वराज मध्य प्रदेश के विदिशा से लोकसभा सांसद हैं और बीजेपी की प्रमुख चेहरों में से एक हैं।

आपको बात दें कि, सुषमा स्वराज स्वस्थ कारणों से चुनाव नहीं लड़ सकती हैं। साल 2016 में बुखार और निमोनिया के लक्षण के साथ सीने में जकड़न की समस्या होने पर एम्स में भर्ती कराया गया था। इसी साल विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का गुर्दा प्रत्यारोपण भी कराया गया था। साल 2016 में 10 दिसंबर को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 50 डॉक्टरों के एक दल द्वारा सुषमा स्वराज का किडनी प्रत्यारोपण किया गया था।

विदेश मंत्री सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। ट्विटर के माध्यम से सुषमा स्वराज ने अक्सर लोगों की मदद करती रही हैं। वहीं वैश्विक मंचों पर भी सुषमा स्वराज काफी बेबाकी से भारत का पक्ष रखती हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ का मंच हो या फिर विदेश यात्रा, सुषमा स्वराज बेबाक तरीके से भारत का पक्ष रखती रही हैं और दुनिया को भारत के विचारों और आदर्शों का पाठ पढ़ती रही हैं। वर्ष 2014 में उन्हें भारत की पहली महिला विदेश मंत्री होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। जबकि इसके पहले इंदिरा गांधी दो बार कार्यवाहक विदेश मंत्री रह चुकी हैं।