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अकाली दल का मार्च 
अकाली दल का मार्च |Google Image
देश

अकाली दल ने 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के खातिर मार्च निकाला

पिछले 34 सालों से सिख समाज न्याय मांग रहा है। हजारों सिखों की हत्या कर दी गई थी ।

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

पंजाब : शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के सैकड़ों समर्थकों ने यहां शनिवार को 1984 सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय देने की मांग करते हुए मार्च निकाला। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में यह मार्च गुरुद्वारा प्रतापगंज से शुरू हुआ और संसद मार्ग पुलिस थाने के बाहर समाप्त हुआ।

प्रदर्शनकारियों में शामिल महिलाओं ने नारे लगाते हुए कहा कि 1984 में जनसंहार हुआ था, हम न्याय की मांग करते हैं। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में बैनर लिए हुए थे। वे एक बैनर के साथ आगे बढ़ रहे थे, जिसमें लिखा था सिख जनसंहार, न्याय से वंचित, हत्या जारी। प्रदर्शनकारियों ने यहां पुतला भी जलाया।

1984 के सिख विरोधी दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की ओर से आयोजित विरोध मार्च में हिस्सा ले रही केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों के बीच हुए झड़प के बाद पुलिस ने कुछ को हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

अकाली दल का मार्च 
अकाली दल का मार्च 
PTI

हिरासत में लिए जाने से पहले हरसिमरत कौर बादल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमारा समुदाय पिछले 34 साल से न्याय मांग रहा है। हजारों सिखों की हत्या कर दी गई, कई महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और कई लोगों ने अपने घर खो दिए। ऐसी नृशंसता भारत के इतिहास पर कलंक है। किसी को न्याय नहीं मिला। न्यायपालिका स्वत: संज्ञान क्यों नहीं ले रही है?’’

मार्च के दौरान हरसिमरत कौर ने कहा, "पिछले 34 सालों से हमारा समाज न्याय मांग रहा है। हजारों सिखों की हत्या कर दी गई। कई महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ, लोगों के घर उनसे हमेशा के लिए छिन गए। यह अत्याचार भारत के इतिहास पर एक धब्बा है। किसी को भी न्याय नहीं मिला। न्यायपालिका इस पर स्वत: संज्ञान क्यों नहीं ले रही।"

आपको बता दें कि, अकाली दल 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय देने की मांग कर रहा है। उस वक्त पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद भड़के दंगों में राष्ट्रीय राजधानी और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में सिख लोगों की हत्या हो गई थी।