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दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया के निदेशक-ओबीई
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया और ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया के निदेशक-ओबीई |IANS
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दिल्ली सरकार की पहल अब छात्र सीखेंगे फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना, ब्रिटिश काउंसिल से करार 

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्रों और अध्यापकों को अंग्रेजी बोलने में कुशल बनाने के मकसद से आप सरकार ने मंगलवार को ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ एक अहम साझेदारी की।

AKANKSHA MISHRA

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नई दिल्ली: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में छात्रों और अध्यापकों को अंग्रेजी बोलने में कुशल बनाने के मकसद से आप सरकार ने मंगलवार को ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ एक अहम साझेदारी की। साझेदारी के तहत ब्रिटिश काउंसिल के प्रशिक्षक दिल्ली के सरकारी स्कूलों के छात्रों और शिक्षकों को फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना सिखाएंगे।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया और ब्रिटिश काउंसिल ऑफ इंडिया के निदेशक-ओबीई एलन गेमेल ने पूर्वी दिल्ली के पश्चिमी विनोद नगर स्थित राजकीय सर्वोदय कन्या बाल विद्यालय में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर ब्रिटिश काउंसिल (ग्लोबल) के चेयरमैन क्रिस्टोफर रोड्रिग्स भी मौजूद थे।

आईएएनएस द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, मनीष सिसौदिया ने कहा, "आप की सरकार बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर दे रही है, क्योंकि वे ही देश के भविष्य हैं। ब्रिटिश काउंसिल के साथ इस साझेदारी का मकसद युवाओं का कौशल विकास करना है। साथ ही कला व संस्कृति के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग बढ़ाना है।"

इस मौके पर एलन ने कहा कि दिल्ली सरकार और मैकमिलन एजुकेशन 12,000 युवाओं को अंग्रेजी भाषा के टूल्स यानी उपकरण प्रदान करेगी, जिससे उन्हें अपनी भाषिक क्षमता बढ़ाने और अपना भविष्य संवारने में मदद मिलेगी। क्रिस्टोफर रोड्रिग्स ने शिक्षा का बजट दोगुना करने के लिए दिल्ली सरकार की तारीफ की।

ब्रिटिश कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया

आपको बता दें, ब्रिटिश कॉउंसिल ऑफ़ इंडिया कि स्थापना 1934 में किंग जॉर्ज VI के द्वारा हुए थी। यह यूनाइटेड किंगडम की एक लघु इकाई है जो अंतरास्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों के द्वारा शैक्षिक और सांस्कृतिक अवसर प्रदान करती है। ब्रिटिश कॉउंसिल का उद्देश्य ब्रिटेन और अन्य देशों के बीच कुशल और लाभप्रद शैक्षिक व सांस्कृतिक सम्बन्धों का निर्माण करना। भारत के साथ साथ यह संस्था 100 से अधिक देशों में काम कर रही है, पूरी दुनिया में यह 233 स्थानों पर फैली हुए है। इसका मख्यालय सेंट्रल लन्दन के स्प्रिंग गार्डन में है।