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सुप्रीम कोर्ट का फैसला -सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में ST /SC को मिलेगा आरक्षण 

सर्वाच्च न्यायालय ने राज्य सरकार व केंद्र सरकार दोनों की दलीलों को स्वीकारा सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में ST /SC को मिलेगा आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को दिया फैसला..

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

नई दिल्ली : SC /ST आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधानिक पीठ ने आज अपना अहम फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राज्य को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) वाले लोगों को पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए उनके पिछड़ेपन पर आंकड़े इकठ्ठा करने की जरूरत नहीं है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायामूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा अदालत के वर्ष 2006 में दिए गए फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए दाखिल याचिका पर यह बात कही। अदालत ने अपने पहले फैसले में एससी/एसटी को पदोन्नति में आरक्षण देने से पहले आंकड़े मुहैया कराने के लिए कहा था। "राज्य को पदोन्नति में आरक्षण के प्रावधान करने से पहले प्रत्येक मामले में अनिवार्य कारणों यानी की पिछड़ापन, प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता और समग्र प्रशासनिक दक्षता की स्थिति को दिखाना होगा।"

इस फैसले को नागराज मामले के नाम से जाना जाता है। जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संविधान पीठ ने कहा कि नागराज जजमेंट को सात जजों को रैफर करने की जरूरत नहीं है। लेकिन राहत के तौर पर पिछड़ेपन और सावर्जनिक रोजगार में उस वर्ग के प्रतनिधित्व की अपयार्प्तता दिखाने वाला मात्रात्मक डेटा जमा करने की जरूरत है।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायामूर्ति रोहिंटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा की पीठ ने एससी/एसटी के भीतर क्रीमी लेयर की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए पहले कहा था, "हो सकता है जो कुछ लोग (एससी/एसटी के भीतर आने वाले) इस दाग से उबर चुके हों लेकिन यह समुदाय इसका अभी भी सामना कर रहा है।" पीठ ने 30 अगस्त को इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दरअसल अक्टूबर 2006 में नागराज बनाम भारत संघ ने इस मामले पर पांच जजों की संविधान पीठ ने इस विषय पर निष्कर्ष निकला था की राज्य सरकार नौकरी के मामले में ST /SC के लिये आरक्षण करने को मजबूर नहीं है। लेकिन अगर वे अपना विशेष अधिकार का प्रयोग कर इस तरह का प्रावधान बनान चाहते हैं तो राज्य को ST /SC सार्वजनिक रोजगार में इस वर्ग को अपयार्प्तता दिखाने वाला मात्रात्मक डेटा एकत्र करना होगा।