MP Govt Job Reservation
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म.प्र. बुलेटिन

शिवराज सिंह ने जारी किया फरमान, सरकारी नौकरियों में बाहरी बिल्कुल नहीं

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि मप्र की सरकारी नौकरी सिर्फ स्थानीय लोगों को ही दी जाएगी

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

भारत एक संघीय ढांचे का देश है जिसे कई राज्य मिलकर एक देश बनाते है जिसके तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी राज्य में जाकर निवास कर सकता है, जमीन खरीद कर व्यवसाय कर सकता है, सरकारों द्वारा निर्धारित जगहों पर नौकरियों के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन अब शायद मध्यप्रदेश में ऐसा संभव नहीं हो पायेगा। लेकिन असल सवाल यह है कि अगर सबने यही शुरू कर दिया तो फिर क्या होगा?

सरकारी नौकरी में बाहरी बिल्कुल नही:

अब इसमें प्रदेश के युवाओं को लुभाने की बात हो या कुछ और लेकिन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल में ही एक घोषणा की है जिसके तहत मध्यप्रदेश राज्य में मिलने वाली सभी सरकारी नौकरियों को मध्यप्रदेश के लोगों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर मध्यप्रदेश में किसी नौकरी के लिए 100 पदों की वैकेंसी निकलती है तो उसमें सभी के सभी पद के आवेदनकर्ताओं को मध्यप्रदेश का होना पहली अनिवार्यता माना जायेगा और बाहरी राज्यो जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों को मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जायेगा।

इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाकायदा बयान जारी किया है जिसमे मुख्यमंत्री के द्वारा यह बताने की कोशिश की गई है कि मध्यप्रदेश की शासकीय नौकरियों में केवल मध्यप्रदेश के लोग ही भर्ती किय्ये जाएंगे और मध्यप्रदेश को केवल मध्यप्रदेश का युवा ही चलाएगा।

शिवराज ने यह भी कहा कि हम सिर्फ बेरोजगारी भत्ता देने में यकीन नही रखते अब सरकारी नौकरियों में मध्यप्रदेश के लोगों के लिए दरवाजे खुलेंगे। हम इसके लिए कानूनी प्रावधान करने जा रहे है।

शुरू होने लगा है विरोध:

लोगों ने शिवराज सिंह के ऊपर देश को बांटने जैसे आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं लोगो ने शिवराज को याद दिलाया कि जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली के लोगों के इलाज की बात कही थी तो भाजपा समेत तमाम नेताओं ने विरोध जताया था लेकिन अब किसी को कोई तकलीफ नहीं हो रही है।

लोगों ने कहा कि आप देश को टुकड़ो में बांट रहे है।

अगर देखादेखी अन्य राज्यों ने भी ऐसा किया तो?

अगर इतिहास को देखे तो भारत में इससे पहले भी इस तरह के राजनैतिक प्रयोग किये गए है लेकिन इस तरह के राजनैतिक स्टंट और अधूरे प्रयोग हमेशा असफल ही साबित हुए हैं। दरअसल किसी राज्य द्वारा उठाया गया यह कदम भारत के संघीय ढांचे को चोट पहुंचाता है जिसकी वजह से राज्यों के बीच दूरियां बढ़ना संभव है।

यहाँ जानकारों द्वारा यह भी आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में अन्य राज्यों की जनता अपनी-अपनी सरकारों पर भी इस तरह के कड़े प्रावधानों को लाने का दबाव बना सकती है जिसकी वजह से इस तरह के देश मे रचे बसे संघीय ढांचे को खासा नुकसान पहुँचेगा। देखना यह है कि मामा शिवराज का यह स्टंट महज राजनीतिक स्टंट साबित होता है या फिर केंद्र के हस्तक्षेप के बाद इसे वापस लिया जाता है।

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उदय बुलेटिन
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