उदय बुलेटिन
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म.प्र. बुलेटिन

मध्यप्रदेश की राजनीति में भावी भूकम्प के पहले आने वाले झटके महसूस हुए, हो सकता है बड़ा बदलाव। 

क्या मध्य प्रदेश कांग्रेस टूट जाएगी।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

मध्य प्रदेश का विधानसभा चुनाव जहां चुनाव के पहले नेतृत्व विशेष को एक तगमा दिया गया था कि आप मजबूती के साथ चुनाव लड़िये और राज्य की सत्ता आप के हाँथ में होगी, हालांकि यह अनुमान भी साबित हो सकता है।यह दूसरे मायनो में इस तरह से देखा जा सकता है कि हो सकता हो उस नेतृत्व ने खुद को ही मुख्यमंत्री का पक्का दावेदार मान लिया हो, लेकिन जैसे ही चुनाव हुआ, यह पार्टी प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, प्रदेश की राजनीति में राष्ट्रीय नेतृत्व हावी हो गया, जिसके कारण लॉलीपॉप खाते हुए बच्चे से उसका लॉलीपॉप दूसरे को पकड़ा दी गयी।आखिर वह बच्चा कब तक नहीं रोता, अब वक्त बदल रहा है, हवा पक्ष में आने पर वह बच्चा जिसके हाँथ से सत्ता की लॉलीपॉप छिन गयी थी वह सुबकने लगा है।जाहिर है कुछ दिनों बाद जी भर चीख मारकर रोयेगा, और फायदा यह होगा कि कोई तमाशबीन मौकेबाज उसे दूसरी चाकलेट पकड़ा देगा।

ये भूकंप तरंगे अभी की नही है :

मध्यप्रदेश में राज्य चुनाव बीते हुए दो दिन भी नही हुए थे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मध्यप्रदेश के दिग्गज नेता कमलनाथ को सत्ता की चाभी देने के संकेत दिखाए, जिसकी वजह से मध्यप्रदेश में रहकर जमीन पर रहकर मेहनत करने वाले युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को खिन्नता समझ आयी और, उनके समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की जिद करने लगे, और यह मांग दिनों दिन प्रबल होती गयी, उसी क्षण यह आसार नजर आए थे कि ज्योतिरादित्य सिंधिया दूसरा विकल्प तलाश सकते हैं, हालांकि गोवा जैसे राज्य में बेहद कम संख्या होने के बावजूद राज्य में अपनी सरकार बनाने वाली पार्टी भाजपा जो इस तरह के मामलों में तगड़ी पकड़ रखती हैं उसकी तरफ से भी अंदरूनी हिस्सों पर ऐसे संकेत मिले थे कि भाजपा सरकार बनाने पर अपनी सहमति दर्शा सकती है। लेकिन कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने इसे बखूबी निबटाया।

हालांकि "सब दिन होत न एक समान" की कहावत चरितार्थ होने को आई है, अब मध्यप्रदेश कांग्रेस के युवा नेता का विद्रोह रह-रह कर सांमने आ रहा है जिसके तहत ट्विटर जैसी सोसल मीडिया पर संकेत आने शुरू हो गए है।

क्या है संभावना ?

ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश के चर्चित और युवा नेता है जमीनी स्तर और युवाओं के बीच काम करने वाले नेता है, शिक्षित होने के साथ दूसरे दलों के नेताओ के साथ संबंध मधुर है, जिसकी वजह से ज्योतिरादित्य लोकप्रिय नेताओं की श्रेणी में आ जाते है , और भारतीय जनता पार्टी और वर्तमान के चाणक्य इस मौके को भुनाने की कसर नही छोड़ेंगे।

और जानकारों के अनुसार तो यह भी कहा जा रहा है कि सत्ता को लेकर बात इतनी आगे बढ़ चुकी है कि ज्योतिरादित्य कभी भी अपने समर्थक विधायकों को लेकर भाजपा के समर्थन के साथ मध्यप्रदेश में सत्ता हासिल करने का दावा ठोक सकते है।

भाजपा घाटे में भी कर सकती है समर्थन :

चूँकि अब महाराष्ट्र में कांग्रेस छुपे रुस्तम की तरह राजनीति कर रही है ऐसे में कांग्रेस की पकी-पकाई खीर को कांग्रेस के मुँह से बाहर निकालने के लिए भाजपा किसी भी स्तर तक जा सकती है, लोगों के अनुसार या तो ज्योतिरादित्य सिंधिया एक अलग पार्टी का एलान कर सकते है या फिर वो खुद अपने विधायक समूह के साथ भाजपा में शामिल हो सकते है।

खैर जो भी हो इस समय असली मजा तो देश की जनता लूट रही है टॉम एंड जेरी की तरह नोकझोंक और छीनाझपटी को लेकर जनता मदमस्त हो रही है।