उदय बुलेटिन
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भोजेश्वर मंदिर
भोजेश्वर मंदिर|Source- Google Image
म.प्र. बुलेटिन

“भोजपुर” भगवान शिव का निवास  

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 28 कि.मी की दुरी पर भगवान शिव की नगरी है , (1010 -1053 ई.) के बीच धार के राजा “परमार राजा भोज” ने इसकी स्थापना कि थी, और यह स्थान आज “भोजपुर” के नाम से जाना जाता है

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 28 किमी की दुरी पर रायसेन जिले में भगवान शिव की नगरी बस्ती है ,इसे “भोजपुर” या “भोजेश्वर मंदिर” भी कहा जाता है, (1010 -1053 ई.) के बीच धार के राजा “परमार राजा भोज” ने “भोजपुर” का निर्माण बेतवा नदी के तट और विंध्य पर्वतमालाओं के बीच करवाया था , हालांकि इसका कारण आज भी ज्ञात नहीं है।कुछ किंदवंत कथाओं की माने तो हस्तिनापुर के राजा पांडवों ने मुख्य मंदिर की स्थापना कि थी ,“भोजपुर मंदिर” को उत्तर का सोमनाथ मंदिर भी कहा जाता है।

भोजेश्वर मंदिर के निर्माण की अनेक कथाएं प्रचलित हैं ,स्थानीय लोगों की माने तो भगवन शिव ने राजा भोज को उनके स्वप्न में आकर उनकी नगरी बसाने का आदेश दिया था। जिसे धार के राजा “परमार राजा भोज” ने पूरा किया और साथ ही भगवान शिव के मंदिर की स्थापना कि। यह मंदिर उत्कृष्ट वास्तुशिल्प और नक्काशीदार वास्तुकला चित्र का अतभुद मेल है। मंदिर का विशाल गुम्बज संकेत है इस्लाम आगमन का , मंदिर में उरेकी पाषाण कला हिन्दू मंदिर के स्थापत्य कला का ज्ञान देती है , यह मंदिर आज भी निर्माणधीन अवस्था में है, जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है की अगर “भोजपुर मंदिर” का पूर्ण निर्माण सम्भव हुआ होता तो शायद आज यह देश की सबसे बड़ी हिन्दू मंदिर होने का गौरव प्राप्त करता। मंदिर का निर्माणधीन होना कई मायनों में फादेमंद भी हैं, विद्वान 11 वीं सदी के इस मंदिर को देख कर प्राचीन निर्माण तकनीक को समझ सकते हैं।

इतिहास

मंदिर का गौरवशाली इतिहास दो मतों को दर्शाता है :

पौराणिक मत के अनुसार पांडवों की माता कुंती ने भगवान शिव की आराधना के लिए पांडवों को शिव मंदिर बनाने को कहा , पांडवों ने एक रात्रि में मंदिर निर्माण करने कि शपथ ली, जो पूरा न हो सका ,इसलिए यह मंदिर आज भी निर्माणधीर है।

ऐतिहासिक मान्यताओं की माने तो धार के राजा “परमार राजा भोज” ने इस मंदिर का निर्माण कराया था और इसके साथ ही एक बांध का निर्माण भी कराया था जो अब टूट चूका है। राजा भोज को मध्य भारत में निर्माण -कला , स्थापत्य और विद्या के महान संरक्षक के तौर पर जाना जाता है। मान्यता है की राजा भोज ने एक रात में भोजेश्वर मंदिर निर्मित करने की ठानी, लेकिन छत का काम पूरा होने से पहले सुबह हो गई और मंदिर अधूरा रह गया। राजा भोज के इस मंदिर निर्माण का समर्थन यहां के शिल्पों से भी मिलता है, इन शिल्पों में मंदिर निर्माण की तिथि (1035 ई.) अंकित है। महाकवि दशबल द्वारा रचित पुस्तक "चिंतामणि सरणिका" (1055 ई.) भी राजा भोज के इस मंदिर निर्माण कि पुस्टि करता है।

इस पवित्र स्थान पर प्रतिवर्ष 2 भव्य मेले “महाशिवरात्रि” और “मकर संक्रांति” का आयोजन किया जाता है, जिसमें लोग दूर-दूर से शामिल होने आते हैं। मंदिर परिसर में स्थित झील का विस्तार भोपाल शहर तक है।

वर्तमान

सन 1950 के बाद भोजेश्वर मंदिर काफी कमजोर हो गई थी ,लगातार वर्षा के कारण जल रिसाव से मंदिर का आंतरिक भाग क्षतिग्रस्त हो गया था ,जिसके बाद भोजेश्वर मंदिर परिसर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को दे दिया गया जिसे सर्वेक्षण विभाग ने राष्ट्र धरोहर में शामिल किया , और अब इसके पुनरुद्धार का कार्य जोरो पर है |

प्राथमिक अवस्था में सर्वेक्षण विभाग द्वारा मंदिर के चबूतरों और आंतरिक भागों की मरम्मत कि गई , एवं हटाए पत्थरों को पुनःस्थापित किया गया। मंदिर के अन्यय भागों में पुनःनिर्माण का काम किया जा रहा है। सर्वेक्षण विभाग इस मंदिर को फिर से वही रूप देना चाहती है।

मंदिर के द्वार पर लगे सर्वेक्षण विभाग के शिलालेख को देखने से पता चलता है की इस मंदिर के प्रांगण में स्थित शिवलिंग देश भर के मंदिरों में सबसे ऊँचा व विशालकाय शिवलिंग है।मंदिर का प्रेवश द्वारा अन्यय हिन्दू मंदिरों की तरह विशाल है। मंदिर प्रांगण में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा निर्मित पुरातत्व संग्रहालय बना है। राज्य सरकार प्रतिवर्ष महशिवरात्रि के अवसर पर भोजपुर उत्सव का आयोजन करती है।

मंदिर की वर्तमान उपयोजिता

  • यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अधीन है।
  • मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से २८ किमी की दुरी पर होने के कारण यहाँ पर्यटक एवं श्रद्धालुओं का लगातार आवागमन बना रहता है।
  • सन 2015 में भोजेश्वर मंदिर को सर्वोत्तम अनुरक्षित एवं दिव्यांक सहायी स्मारक होने का राष्ट्रीय पर्यटक पुरस्कार दिया गया था।
  • इस मंदिर को आज भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए उपयोग किया जाता है।
  • महाशिवरात्रि उत्सव पर राज्य सरकार द्वारा मेले का आयोजन किया जाता है, इसे भोजपुर उत्सव भी कहते हैं।

कैसे जा सकते हैं भोजपुर

  • मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 28 किमी की दुरी पर राजा भोज विमानस्थल है , यहाँ के लिए आप किसी भी राज्य से विमान सुविधा ले सकते हैं।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन हबीबगंज व भोपाल स्टेशन है।
  • भोजपुर के लिए भोपाल से बस सेवा उपलब्ध है |