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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर 
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर |Social Media
म.प्र. बुलेटिन

साध्वी प्रज्ञा पर पार्टी ने लगाया बैन !

विवादित बयान पर बीजेपी की प्रज्ञा को बड़ी नसीहत 

AKANKSHA MISHRA

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मध्य प्रदेश के भोपाल से भारतीय जनता पार्टी की लोकसभा सदस्य साध्वी प्रज्ञा ठाकुर एक फिर सुर्ख़ियों में हैं, लेकिन इस बार चर्चा का कारण उनके विवादित बयान नहीं हैं बल्कि उनके विवादित बयानों पर बीजेपी का एक्शन है। दरअसल साध्वी प्रज्ञा जब से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई हैं वो तब से अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रही है, और उनके सभी बयानों का हर्जाना पार्टी को भरना पड़ता है। लेकिन इस बार पार्टी ने तय कर लिया है कि साध्वी प्रज्ञा पर किसी भी तरह का रहम नहीं किया जायेगा और उन्हें सजा दी जाएगी।

बीजेपी ने साध्वी प्रज्ञा पर एक्शन लेते हुए पहले तो उन्हें विवादास्पद बयानों से दूर रहने की नसीहत और फिर कहा कि साध्वी प्रज्ञा किसी भी मुद्दे पर मीडिया से बातचीत नहीं करेंगी। पार्टी के शीर्ष नेतृत्च द्वारा उठाया गया यह कदम प्रज्ञा के लिए किसी सजा से कम नहीं है। बताया जा रहा है कि पार्टी ने यह कदम प्रज्ञा के उस बयान को लेकर उठाया है जिसमें प्रज्ञा ने अरुण जेटली की मौत से विपक्ष को जोड़ा था।

दरअसल, अगस्त महीने में भारतीय जनता पार्टी ने अपने तीन बड़े नेताओं को खो दिया, सबसे पहले पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, फिर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और फिर अंत में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली। साध्वी प्रज्ञा को इन बड़े नेताओं के जाने से गहरा धक्का लगा, प्रज्ञा ने बाबूलाल गौर और अरुण जेटली की शोक सभा में कहा कि 'विपक्ष भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ 'तंत्र-मंत्र' का प्रयोग कर रहा है, इसलिए बीजेपी के शीर्ष नेताओं की असमय मृत्यु हो रही है।

ज्ञात हो कि साध्वी प्रज्ञा इससे पहले भी कई बार विवादित बयान दे चुकी हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान साध्वी प्रज्ञा ने 'महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था’, जिसपर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें नसीहत भी दी थी और कहा था कि मैं साध्वी प्रज्ञा को कभी मांफ नहीं करूंगा।

इसके अलावा लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद साध्वी प्रज्ञा ने 26/11 आतंकी हमले मारे गए मुंबई पुलिस के शहीद जवान हेमंत करकरे पर विवादित बयान देते हुए कहा कि ‘मैंने हेमंत करकरे को श्राप दिया था इसलिए उसकी मृत्यु हुई।’ ज्ञात हो कि हेमंत करकरे उसी टीम का हिस्सा थे जिसने मालेगांव ब्लास्ट में प्रज्ञा से पूछताछ की थी।

इसके अलावा चुनाव जीतने के बाद प्रज्ञा ने कहा था कि ‘मैं नाला और टॉयलेट साफ़ करने के लिए मंत्री नहीं बनी हूं।’ज्ञात को कि इससे पहले पार्टी ने प्रज्ञा के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया था।