उदय बुलेटिन
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भोपाल गैस त्रासदी
भोपाल गैस त्रासदी|Google
म.प्र. बुलेटिन

जलियांवाला बाग हत्याकांड की तरह भोपाल गैस त्रासदी भी दुनिया की सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से एक है !

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1919 के बाद भोपाल त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक थी। 

AKANKSHA MISHRA

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 3 दिसम्बर 1984 को एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई। इसे भोपाल गैस कांड, या भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है। भोपाल के यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से एक ज़हरीली गैस का रिसाव हुआ जिसमें सरकारी आकड़ों के मुताबिक लगभग 15000 से अधिक लोगों की जान गई तथा बहुत सारे लोग शारीरिक अपंगता का शिकार हुए थे।

इस भयानक त्रासदी पर संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट पेश की है। जिसमें कहा गया है कि ‘हजारों लोगों को मौत के मुंह में धकेलने वाली 1984 की भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की ‘‘सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं’’ में से एक है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि हर साल पेशे से जुड़ी दुर्घटनाओं और काम के चलते हुई बीमारियों से 27.8 लाख कामगारों की मौत हो जाती है।’

भोपाल गैस त्रासदी
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संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश की राजधानी में यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक संयंत्र से निकली कम से कम 30 टन मिथाइल आइसोसायनेट गैस से 600,000 से ज्यादा मजदूर और आसपास रहने वाले लोग प्रभावित हुए थे।

इसमें कहा गया है कि सरकार के आंकड़ों के अनुसार 15,000 मौतें हुई। इस क्षेत्र में जहरीले कण अब भी मौजूद हैं और हजारों पीड़ित तथा उनकी अगली पीढ़ियां श्वसन संबंधित बीमारियों से जूझ रही है तथा उनके अंदरुनी अंगों एवं प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि 1919 में भारत में हुआ जलियांवाला बाग हत्याकांड की तरह भोपाल गैस त्रासदी भी दुनिया की सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में से एक है। साल 1919 के बाद अन्य नौ बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में चेर्नोबिल और फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना के साथ ही राणा प्लाजा इमारत ढहने की घटना शामिल हैं।

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि हर साल होने वाली मौतों की मुख्य वजह नौकरी या पेशे में तनाव, काम के लंबे घंटे और बीमारियां है। आईएलओ की मनाल अज्जी ने यूएन न्यूज से कहा कि, “36 प्रतिशत कामगार बेहद लंबे घंटों तक काम कर रहे हैं मतलब कि हर सप्ताह 48 घंटे से ज्यादा।’’