उदय बुलेटिन
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 पूर्व विधायक किशोर समरीते
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म.प्र. बुलेटिन

चुनाव प्रचार के लिए कम हुए पैसे तो इस नेता ने कहा बेच दूंगा अपना गुर्दा

नेता जी 2 बार विधायक रह चुके हैं। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

इस चुनावी मौसम में सभी राजनीतिक पार्टियां और राजनेता चुनाव-प्रचार में व्यस्त है। प्रचार जितना रोबदार हो नेता जी की उतनी धाक बनती है, वोट मिलते हैं। प्रचार के लिए सभी साधनों का इस्तेमाल भी किया जाता है। हालांकि चुनाव आयोग, चुनाव में होने वाले खर्चों की निगरानी तो करता है लेकिन खर्चों का सही रिकॉर्ड जब नेता जी के पास नहीं तो भला चुनाव आयोग को कहाँ से पता चलेगा। वैसे तो चुनाव में नेता अंधाधुंध पैसे खर्च करते हैं लेकिन मध्य प्रदेश में एक ऐसे नेता भी हैं जिनके पास चुनाव लड़ने के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं है। और अब वे चुनाव लड़ने के लिए चुनाव आयोग से पैसे की मांग कर रहे हैं।

दरअसल मध्य प्रदेश के बालाघाट संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे पूर्व विधायक किशोर समरीते ने महंगे होते चुनाव और अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से आर्थिक मदद करने या फिर अपने गुर्दा को बेचने की अनुमति मांगी है।

समरीते ने बालाघाट के जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर कहा है, -

"लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के लिए अधिकतम व्यय सीमा 75 लाख रुपये है, मगर मेरे पास चुनाव लड़ने के लिए इतनी धनराशि नहीं है। वहीं, दूसरे उम्मीदवारों की संपत्ति हजारों करोड़ के आसपास है। इसके साथ ही चुनाव प्रचार की अवधि में महज 15 दिन शेष हैं, इस अवधि में जन सहयोग से राशि जुटाना संभव नहीं है।"

 चुनाव प्रचार के लिए कम हुए पैसे तो इस नेता ने कहा बेच दूंगा अपना गुर्दा
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समरीते ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि -

“आयोग 75 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराए अथवा बैंक से उक्त राशि बतौर कर्ज दिलाने में मदद करें। यह दोनों ही संभव नहीं हो तो उसे अपने दो में से एक गुर्दा बेचने की अनुमति दें।”

पूर्व विधायक किशोर समरीते

पूर्व में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके समरीते का कहना है कि वे 10 वर्ष बाद निर्वाचन प्रक्रिया में सम्मिलित हो रहे हैं। आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं है, लिहाजा चुनाव आयोग उनकी मदद करे.

समरीते ने कहा, "चुनाव प्रक्रिया महंगी होती जा रही है, इस स्थिति में कमजोर वर्ग के व्यक्ति के लिए तो चुनाव लड़ना बड़ा मुश्किल काम हो चला है। लिहाजा चुनाव आयोग को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे आम आदमी के लिए चुनाव लड़ना आसान हो।"

गुर्दा बेचने के सवाल पर समरीते का कहना है कि आज चुनाव लड़ने के लिए उनके पास रुपये नहीं है, कोई मदद करने की स्थिति में भी नहीं है। इस समय उनके पास एक ही विकल्प है और वह है अपना गुर्दा बेचकर आर्थिक इंतजाम करना।