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देश में बनने वाले 65 प्रतिशत मोबाइल फोन का निर्माण उत्तर प्रदेश के नोएडा में होता है
देश में बनने वाले 65 प्रतिशत मोबाइल फोन का निर्माण उत्तर प्रदेश के नोएडा में होता है|Google
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भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता, उत्तर प्रदेश ने दिलाई पहचान

देश में बनने वाले 65 प्रतिशत मोबाइल फोन का निर्माण उत्तर प्रदेश के नोएडा में होता है।

AKANKSHA MISHRA

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लखनऊ: चीन (China) दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक देश है। लेकिन भारत भी अब मोबाइल उत्पादन में पीछे नहीं है। ICA की रिपोर्ट के अनुसार भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है। यह जानकारी दी है उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) ने। उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) ने सोमवार को कहा कि देश में निर्मित 65 प्रतिशत मोबाइल फोन अकेले नोएडा में ही बन रहे हैं।

उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) ने कहा, ‘‘देश में बनने वाले 65 प्रतिशत मोबाइल फोन का निर्माण उत्तर प्रदेश के नोएडा में होता है। हमने यह उपलब्धि महज डेढ़ साल में हासिल की है। मोबाइल उत्पादन के मामले में हम तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से आगे निकल चुके हैं। इससे रोजगार के लिये दूसरे राज्य में लोगों का पलायन रुका है।’’

उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा
उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा
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उन्होंने प्रदेश की सूचना-प्रौद्योगिकी नीति को देश में सर्वश्रेष्ठ बताया। शर्मा (Dinesh Sharma) ने कहा कि इसकी अहम वजह उनकी सरकार द्वारा राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार लाना है। सरकार ने उद्योगों और कारोबारों के अनुकूल नीतियां बनायी हैं। हमने एकल खिड़की प्रणाली लागू की जिसकी पूरे देश में सराहना हुई। यहां तक कि महाराष्ट्र जैसे राज्य भी हमारी आईटी नीति का अध्ययन करने आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश निवेशक सम्मेलन के दौरान 42 हजार करोड़ रुपये का निवेश आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आया है। उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी बनाने जा रही है। इसके लिये राजधानी लखनऊ के नादरगंज इलाके में जमीन अधिग्रहीत की गयी है। इसके अलावा मेरठ, आगरा, गोरखपुर, कानपुर, वाराणसी, लखनऊ और बरेली में आईटी पार्क भी खोले जाएंगे।

शर्मा ने बताया कि नोएडा के टेगना में इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर्स स्थापित किये जाएंगे। उम्मीद है कि चीन और ताइवान की कंपनियां वहां 500 करोड़ रुपये का निवेश करेंगी।