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लाइफस्टाइल

चरखारी बुंदेलखंड का कश्मीर !

शिवाजी महाराजा की नगरी !

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

"बजरंगी भाईजान फ़िल्म का एक सीन तो याद ही होगा ,जब दिवंगत कलाकार ओमपुरी का किरदार नवाजुद्दीन से कहता है कि एक कश्मीर हमारे पास भी है"

जी हाँ ऐसे ही हम आप पाठकों से रूबरू कराना चाहेंगे बुंदेलखंड के कश्मीर से जिसका नाम है चरखारी। यह लंबे समय तक बुंदेलखंड की एक बड़ी रियासत रही है । जिसका क्षेत्र सरीला की सीमा से होकर गौरिहार मध्यप्रदेश और करीब 125 किलोमीटर के दायरे में रहा।

यहां चंदेल वंशी राजाओं द्वारा सैकड़ों वर्षो शासन करने के बाद बुंदेलखंड के शिवाजी महाराजा छत्रसाल के पुत्र जगतराज ने अपना आधिपत्य जमाया, और मुड़िया पर्वत पर स्थित अकूत संपदा को बीजक के माध्यम से सुवर्ण मुद्राओं से भरे कलश प्राप्त किये। इस गुप्त धन के बारे में यह कहा जाता है कि यह धन महोबा के चंदेल राजा परमाल (परिमर्दिदेव) का था। जब दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर आक्रमण किया और, ऊदल, ब्रम्हा मलखान इत्यादि युद्ध मे खेत रहे, और आल्हा के बारे में कोई जानकारी नहीं हुई, तब राजा परमाल अपनी रानी मल्हना के साथ ,अपनी अकूत सम्पदा को चरखारी के मुड़िया पर्वत पर छुपा कर चले गए। कालांतर में यही धन जगतराज के लिए संजीवनी साबित हुआ।

 पहाड़ पर स्थित पुराणा किला
पहाड़ पर स्थित पुराणा किला
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जगतराज ने इस धन से अपने राज्य को सुदृढ़ किया और उसे आस-पास के राज्यों के समक्ष एक मजबूत राज्य बनाकर उबारा। जगतराज ने इस प्राप्त धन से पिता छत्रसाल के निर्देश पर इस धन को अपने पास नहीं रखा ना ही निजी उपयोग में लिया, बल्की इस धन से बीस हजार के करीब कन्याओं का कन्यादान किया। जिसमें समूचा विवाह शामिल था और 22 विशाल तालाबों का निर्माण कराया ,जिन्हें अपनी विशालता के कारण सागर नामों से जाना गया।

इसी धन से जगतराज ने चंदेल-कालीन तालाबों, और जीर्ण चंदेल मंदिरों का पुनर्निर्माण कराया। चरखारी में ही जमीन से लगभग 300 फुट की ऊँचाई पर एक किले का अद्वितीय निर्माण कराया जो पूरी तरह से महाभारत कालीन युद्ध व्यूह चक्रव्यूह पर आधारित था। जिसकी सुरक्षा तोड़ना किसी सेना के लिए भी मुश्किल काम था।

इस किले में मुख्यतः तीन द्वार थे जो चरखारी रियासत के लिए बहुत महत्वपूर्ण थे। इनके नाम सूपा द्वार (सूपा एक गांव है जिसकी आबादी काफी ज्यादा है और चरखारी से मात्र 12 किमी की दूरी पर स्थित है) जिस द्वार से किले की कुमुक को रसद एवं हथियार मिलते थे। दूसरा हांथी द्वार, जिसका उपयोग सेना के आने जाने और हथियों के अस्तबल के लिए प्रयोग किया जाता था।

मुकदमे में सरकार से जीता गया ड्योढ़ी द्वार 
मुकदमे में सरकार से जीता गया ड्योढ़ी द्वार 
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तीसरा और अहम द्वार, यह द्वार सामरिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। इसमें विदेशी (दूसरे राज्य) के व्यापारियों , राजाओं, रानियों, और अन्य निजी कार्यों के लिए होता था। इसमें राजा की विशेष विश्वासपात्र सैनिकों की सुसज्जित टुकड़ी होती थी।

जगतराज ने दुर्ग को इतना विशालतम और अद्भुद बनाया था कि की आज भी लोग उस समय की कारीगरी को देखकर दंग रह जाते है, इस किले पर पानी की वर्ष भर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जगतराज ने सात तालाबों का निर्माण कराया था। जिनके नाम राधा सागर, बिहारी सागर, सिद्ध कुंड, रामकुंड, जल चौपरा, महाबीर कुंड, और बख्त बिहारी कुंड, इन तालाबों के नाम मे कुछ नाम संसय उत्पन्न करते है। कालांतर में मुस्लिम शासकों के आधिपत्य में आने पर इनके नाम परिवर्तित किये गए होंगे।

छोटी ड्योढ़ी 
छोटी ड्योढ़ी 
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इसे किले के अंदर सुरक्षा के लिए एक बड़ा तोपखाना उपस्थित है। जिसमें बड़ी-बड़ी अष्टधातु की टोपे अभही भी अच्छी स्थिति में है। उनमें कुछ के नाम धरती धौकन, काली सहाय, कड़क बिजली ,और सिद्ध बख्शी आदि शामिल है। हालांकि आज इस किले के दुर्भाग्य के कारण ,यह किला पूरी तरह से सेना की ऑर्डिनेंस कोर के अधीनस्थ है तथा इस पुरातन पर्यटन स्थल पर किसी भी आम ओ खास के आने-जाने पर मनाही है। यहां तक कि नजदीक से फोटो खींचने भी आपको मुसीबत में डाल सकता है।

जगतराज के बाद विजय बहादुर ने गद्दी संभाली ,ये बड़े ही साहित्य प्रेमी राजा हुए। खुद इन्होंने भी विकर्मविरुदावली नामक खण्डकाव्य की रचना की, जो काफी प्रशिद्ध हुआ। इन्होंने निर्माण कार्य भी काफी किये जिसमे वर्तमान के मौदहा (जिला हमीरपुर उत्तर प्रदेश) का किला, अतिथि गृह, और अन्य सरोवरों के बीचों बीच कोठिया और महल शामिल है।

इसके बाद तो चरखारी में वंशावली बढ़ती रही और राजा आते रहे। श्रुतियों के अनुसार एक पंक्ति है जिसे लोग अक्सर बोलते सुने जाते है जिसमें छत्रसाल के बाद जिन राजाओं ने चरखारी में राज किया उनका वर्णन आता है।

चरखारी तालाब का दृश्य
चरखारी तालाब का दृश्य
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" छत्रसाल जगतेश जू, कीरत पृथ्वी मान,

विजय बहादुर ,रतन सिंह,जयसिंह अरु मलखान"

जयन्त या ज्येन्त सिंह इस रियासत के असली अंतिम शासक हुए। इसके बाद इस रियासत के विलय भारत गणराज में किया गया इसके बाद सिर्फ नाम के राजा गद्दी पर बैठते रहे जो आजतक कायम है। अंतिम राजा महाराज जयंत सिंह और उनकी पत्नी उर्मिला सिंह गद्दी पर आसीन हुए, और उनके निधन के बाद राजमाता उर्मिला ने अपने बड़े पुत्र जयसिंह जूदेव का राजतिलक 2015 में किया। हालांकि उनके वर्तमान निवास की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है । चरखारी में सिर्फ राजमाता उर्मिला सिंह राव बाग स्थित महल में निवास करती है।

हालांकि अब महल की संपत्ति पर कब्ज़ा ही कब्जा है। ड्योढ़ी जो कि नगर का प्रवेश द्बार है उस पर यह के लोगों ने अदालत के सामने ऊटपटांग स्वांग रचकर मुकदमे जीत लिए ,और ऐतिहासिक बिल्डिंगे आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। किले को पर्यटन स्थल बनाकर सरकार और आमजन की आर्थिक स्थिति को बढ़ाया जा सकता है।

कब्जे में पुराना किला 
कब्जे में पुराना किला 
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छोटे बड़े मंदिरनुमा महल लोगों के कब्जे में है:

सैकड़ों छोटे बड़े मंदिर निजी कब्जे में है। जिनका उपयोग निजी तौर पर गैर कानूनी रूप से किया जा रहा है। लोग मंदिरनुमा महलों के अंदर पालतू पशु बांध कर पुरातन संपत्तियों का दुरुपयोग कर रहे है और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।

चरखारी तालाब का दृश्य
चरखारी तालाब का दृश्य
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पानी की समस्या से मिल सकती है निजात :

चरखारी को बुंदेलखंड के कश्मीर सिर्फ इस लिए कहा जाता है की यहाँ बड़े तालाबों या दूसरे शब्दों में झील कहा जा सकता है। इनपर लोगों का अवैध कब्जा चालू है। लेकिन अगर इनका कब्जा हटाकर इन्हें प्राकृतिक तरीके से भरने दिया जाए तो ये न सिर्फ चरखारी की ही प्यास बुझा सकते है बल्कि समूचे क्षेत्र को जलापूर्ति समेत सिचाई के लिए पामी उपलब्ध हो सकता है।

तालाबों को प्राकृतिक रूप से भरने का तात्पर्य यह है कि इन तालाबों की बनावट ऐसी है कि आस-पास के स्थान जैसे पहाड़ मैदान का बरसा हुआ पानी सीधे तालाबों में आता है। तथा अधिकांश तालाब आपस मे आंतरिक रूप से जुड़े हुए है सो किसी तालाब में पानी के कम होने की समस्या नहीं होगी।

चरखारी तालाब का दृश्य
चरखारी तालाब का दृश्य
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पर्यटन से चमकेगी किस्मत

वर्तमान में यहां के लोगों का मुख्य कार्य खेती और पारंपरिक व्यवसाय ही है , बुंदेलखंड में पर्यटन खजुराहो तक ही सिमट जाता है। जबकि अगर चरखारी को विकसित करके पर्यटन का रूप दिया जाए तो हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से आर्थिक लाभ होगा तथा पलायन जैसी समस्या का निदान भी होगा।

चरखारी तालाब का दृश्य
चरखारी तालाब का दृश्य
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कैसे जायें चरखारी

अब जब कभी भी झांसी और खजुराहो घूमने जाए, तो वहां से चरखारी कोई ज्यादा दूर नहीं है। अगर आप ट्रेन से यात्रा करते है, तो झांसी से मात्र 60 रुपये में चरखारी पहुंचा जा सकता है। और खजुराहो से 30 रुपये के अंदर आप चरखारी में होंगे। नजदीकी स्टेशन चरखारी रोड, एवं महोबा है,बस मार्ग भी बेहद सुगम एवम मनोरम है।

भृमण के लिए बारिश का माह बेहद उत्तम रहेगा, तो आइए बुंदेलखंड के नैसर्गिक आनंद को प्राप्त करने।