उदय बुलेटिन
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Swine flu- Causes, symptoms and Prevention
Swine flu- Causes, symptoms and Prevention|Pixabay
लाइफस्टाइल

स्वाइन फ्लू(H1N1इनफ़्लुएंज़ा) - “कारण, लक्षण और बचाव”-जाने कुछ आसान उपाय इस बीमारी से बचाव के

स्वाइन फ्लू इन दिनों देश के कई भागों में बहुत तेज़ी से फैल रहा है, इससे बचाव का अच्छा उपाय है, इसके बारे मे पूरी जानकारी होना| क्या है स्वाईएन फ़्लू? इसके लक्षण और बचाव के तरीके? जाने इस पोस्ट में|

Surbhi Prapanna

Surbhi Prapanna

स्वाइन फ़्लू या H1N1 इनफ़्लुएंज़ा H1N1 virus के कारण होने वाली एक संक्रामक ( Infectious) बीमारी है| इस बीमारी ने 2009 मे एक महामारी का रूप धारण किया था| इस बीमारी के कारण कई हज़ार लोगों ने अपनी ज़ान असमय ही गँवाई है| और इस साल भी इस बीमारी के करीब 2000 केस दर्ज़ किए गये है|

क्या है स्वाइन फ्लू? कैसे होता है, इसका इन्फेक्शन? क्या है इसके लक्षण? और कैसे कर सकते है, इससे बचाव? जानने के लिए पढ़े ये पोस्ट|

क्या कहते है, आँकड़े?

देश के कई राज्यो मे यूँ तो स्वाइन फ़्लू के कई मामले दर्ज़ किए गये है, पर राजस्थान मे इसका असर सबसे ज़्यादा देखा जा रहा है! 2019 मे अब तक इस बीमारी के 1508 पॉज़िटिव केस अभी तक दर्ज़ किए गये है, और 56 लोगो की ज़ाने जा चुकी है|

कैसे होता है, स्वाइन फ़्लू?

यह बीमारी H1N1 virus के कारण होती है, जिसके वाहक (carrier) सुअर होते है| सबसे पहले यह virus सुअर के शवस्न तन्त्र यानी respiratory tract को प्रभावित करता है, और वही से ये मनुष्यों मे भी इन्फेक्षन का कारण बनता है| सुअर से फैलने के कारण ही इसे "स्वाइन फ़्लू" कहाँ जाता है|

क्या है, लक्षण?

इसके लक्षण भी साधारण फ़्लू की तरह ही होते है, जैसे,

  • · बुखार
  • · सर्दी
  • · खाँसी
  • · बदन दर्द
  • · गले मे दर्द
  • · नाक का बहना
  • · ठंड लगना
  • · थकान
  • · माँस-पेशियों और जोड़ों मे दर्द
  • · दस्त (diarrohoea)और उल्टी (vomiting)

· कैसे है स्वाइन फ़्लू साधारण फ़्लू से अलग?

यूँ तो साधारण फ़्लू और स्वाइन फ़्लू के अधिकांश लक्षण एक से ही होते है, पर पाचन तंत्र की समस्याएँ यानी उल्टी और दस्त की संभावनाएँ स्वाइन फ़्लू मे ज़्यादा रहती है, इसके साथ ही स्वाइन फ़्लू का इन्फेक्शन फेफड़ों को अधिक गहराई तक प्रभावित करता है|

किन लोगो को है, इस इन्फेक्षन के होने का ज़्यादा ख़तरा?

यूँ तो ये इन्फेक्षन किसी को भी हो सकता है, पर 5 साल से कम उम्र के बच्चो, बूढो, गर्भवती महिलाओं, और पुरानी बीमारियों जैसे अस्थमा आदि बीमारियों से ग्रस्त लोगो मे इसके होने की संभावना ज़्यादा रहती है|

कैसे करे बचाव?

स्वाइन फ़्लू से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है, हर वर्ष इसके वॅक्सीन को लगवाना| आप अपने डॉक्टर से इसके बारे मे पूरी जानकारी ले सकते है| इसके साथ ही ज़रूरी है, कुछ ऐतिहात बरतना जैसे,

  • · खाँसते समय या सर्दी होने पर अपने नाक और मुँह को अच्छी तरह से कवर करके रखे!
  • · अपने हाथों से अपने मुँह या चेहेरे को बार-बार ना छुएँ, इससे वाइरस के इन्फेक्शन का ख़तरा बढ़ जाता है|
  • · फ़्लू सीज़न होने पर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचे|
  • · अपने आस-पास सफाई रखे|
  • · बीमार होने पर घर पर ही रह कर आराम करें,
  • · हाथों को हैंडवॉश या साबुन से ज़रूर धोएँ, खास कर बाहर से आने के बाद!

क्या करे इन्फेक्षन होने पर?

यदि आपको लग रहा है, आपके फ़्लू लक्षण स्वाइन फ़्लू की तरह है, तो घबराएँ नही| तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, डॉक्टर आपके बॉडी फ्लूईड ( नाक या गले) से स्वॅब लेकर, उसका लॅबोरेटरी परीक्षण कर ये बता सकते है, की ये लक्षण साधारण फ़्लू के है, या स्वाइन फ़्लू के|

यूँ तो इन्फेक्षन का स्तर सामान्य होने पर किसी ट्रीटमेंट की ज़रूरत नही होती! घर पर रह कर, आराम करने और फ्लूईड लेवल मेनटेन रख कर कुछ ही दीनो मे ठीक हुआ जा सकता है| और ज़रूरत होने पर डॉक्टर antiviral मेडिसिन का उपयोग भी ट्रीटमेंट मे करते है|

सारांशतः "जागरूक रह कर इस बीमारी से बचाव संभव है"