उदय बुलेटिन
www.udaybulletin.com
 धर्मांतरण यज्ञ
धर्मांतरण यज्ञ |google site
लाइफस्टाइल

उत्तर प्रदेश में 25 दलितों ने अपनाया बौद्ध धर्म 

देश के लोगों में जातिवादी मानसिकता भरी हुए है।

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

लखनऊ/शामली | उत्तर प्रदेश के शामली जिले में कथित भेदभाव का आरोप लगाकर एक दलित परिवार के 25 सदस्यों ने सोमवार को एक समारोह में हिंदू धर्म छोड़ कर बौद्ध धर्म अपना लिया।

बौद्ध धर्म अपनाने वाले एक दलित बुजुर्ग ने कहा 'हम अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। हम दलित है। समाज का हर वर्ग हमारा शोषण करता है , हमारे ऊपर जूठे मुकदमे लिख कर जेल भेज देते हैं। हमारा उत्पीड़न किया जाता है। वहीं एक व्यक्ति रमेश कुमार का कहना है था कि 'समाज हमें हीन भवन से देखता है। कुछ साल पहली हमारी जते के लोगो ने सिख धर्म अपना लिया था। तब से हर कोई हमें आदर देता है 'सरदार जी' कहता है। देश के लोगों में जातिवादी मानसिकता भरी हुए है। बाकी लोगों के साथ मुजफ्फरनगर जिला निवासी सरदार अली ने भी बौद्ध धर्म की दीक्षा ली है।

वही उत्तर प्रदेश पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजेश कुमार तिवारी ने बताया, "समारोह का आयोजन बिना किसी दबाव के आयोजित हुआ था और संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत दलित समुदाय के 25 सदस्यों को बौद्ध भिक्षु प्रज्ञाशील ने बौद्ध दीक्षा दी है।"

 धर्मांतरण यज्ञ
धर्मांतरण यज्ञ
google site

उधर, धर्म परिवर्तन करने वाले दलित नेता देवदास जयंत ने कहा, "हिंदू धर्म में रहते हुए उनके साथ भेदभाव और अत्याचार किया जाता रहा है, इसी से तंग आकर उन्होंने अपने परिवार के 25 सदस्यों के साथ हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म अपनाया है।"

आपको बता दें कि, धर्मांतरण यज्ञ का नेतृत्व कर रहे बौद्ध विद्वान डॉक्टर चन्द्रकीर्ति कहते है कि इस धर्मांतरण आयोजन में लोग अपनी मर्जी से शामिल हुए थे। लकिन पिछले दिन अनुसूचित जाती और जनजातीयों पर हो रहे अत्याचार का असर भी धर्मांतरण के तौर पर देखने को मिल रहा है। बड़ी तादात में दलित हिन्दू बौद्ध धर्म , सिख धर्म अपना रहे है। सरकार इन लोगों पर ध्यान नहीं देती।

धर्मांतरण के बाद सरकार पर भी इसका असर पड़ेगा और सरकार सोचने को मजबूर होगी। देश और समाज को विकसित करने के लिए नेताओं को और सरकार को जाट पात की राजनीती से ऊपर उठना होगा। जातिविहीन समाज की स्थापना करनी होगी। विदेशों में नस्लभेद आदि कम हुआ है, कुछ जगह मिट गया है, ऐसे आयोजन से भारत में भी भेदभाव की स्थित में कमी आएगी।