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शांति वार्ता में महिलाओं की भागीदारी अब भी शून्य: संयुक्त राष्ट्र

“सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समितियों को सशस्त्र संघर्षो में यौन और लिंग आधारित हिंसा में शामिल आतंकवादियों और संस्थाओं को सक्रिय रूप से सूचीबद्ध करने के मुद्दे से निपटने की आवश्यकता है।”

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

न्यूयॉर्क: दुनिया भर में संघर्ष के समाधान में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो जाने के बावजूद उन्हें शांति वार्ता से बाहर रखे जाने की संयुक्त राष्ट्र ने निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र महिला की कार्यकारी निदेशक फुमजिल म्लाम्बो-नगकुका ने गुरुवार को कहा, "महिलाओं को शांति प्रक्रिया से महज इसलिए बाहर नहीं रखा जा सकता, क्योंकि वे युद्ध में शामिल नहीं होती हैं।"

समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, म्लाम्बो ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में महिलाओं तथा शांति व सुरक्षा पर एक रपट पेश की, जहां इस मामले पर चर्चा हुई।

निदेशक ने कहा कि रपट एक सार्थक तरीके से महिलाओं को शांति प्रकिया में शामिल करने को लेकर प्रणालीगत असफलताओं पर 'चेतावनी की घंटी' है।

बड़े शांति वार्ताओं में 1990 से 2017 के बीच मध्यस्थों के रूप में महिलाओं की भागीदारी महज 2 %
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, बड़े शांति वार्ताओं में 1990 से 2017 के बीच मध्यस्थों के रूप में महिलाओं की भागीदारी महज दो प्रतिशत, वार्ताकारों के रूप में आठ प्रतिशत और गवाहों व हस्ताक्षरकर्ताओं के तौर पर पांच प्रतिशत रही है।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, बड़े शांति वार्ताओं में 1990 से 2017 के बीच मध्यस्थों के रूप में महिलाओं की भागीदारी महज दो प्रतिशत, वार्ताकारों के रूप में आठ प्रतिशत और गवाहों व हस्ताक्षरकर्ताओं के तौर पर पांच प्रतिशत रही है।

वहीं भारत की ओर ने अपना पक्ष रखते हुए पॉलोमी त्रिपाठी ने कहा " "यौन हिंसा, अपहरण और मानव तस्करी आतंकवादी संगठनों द्वारा सशस्त्र संघर्ष में युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।"

शांति और सुरक्षा तथा महिलाओं पर चर्चा में भाग लेने के दौरान उन्होंने कहा, "सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समितियों को सशस्त्र संघर्षो में यौन और लिंग आधारित हिंसा में शामिल आतंकवादियों और संस्थाओं को सक्रिय रूप से सूचीबद्ध करने के मुद्दे से निपटने की आवश्यकता है।"

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पीड़ित महिलाओं और लड़कियों को न्याय दिलाने के लिए अंतर-सीमा अपराधों में शामिल अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है। इससे पहले, गुटेरेस ने परिषद को बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने 2017 में संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के 800 से अधिक मामलों को दर्ज किया, जिसमें 2016 से 56 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली।

आईएएनएस द्वारा प्राप्त जानकरी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महिला की कार्यकारी निदेशक फुमजिल म्लाम्बो-नगकुका ने कहा कि 2017 में हस्ताक्षरित 11 समझौतों में से केवल तीन समझौतों में लैंगिक समानता के प्रावधान शामिल हैं। उन्होंने यमन में मौजूदा वार्ता में महिलाओं की अनुपस्थिति के साथ-साथ माली, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और अफगानिस्तान में उनकी सीमित उपस्थिति पर चिंता जाहिर की।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस बीच विभिन्न अध्ययनों पर प्रकाश डाला, जो महिलाओं की भागीदारी और शांति के बीच संबंध दर्शाते हैं और उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से पूर्ण लैंगिक समानता हासिल करने के प्रयासों को जारी रखने का आग्रह किया।