US President Donald Trump on Coronavirus
US President Donald Trump on Coronavirus|Uday Bulletin
विदेश

दुनिया त्राहिमाम कर रही है और अमेरिका लाशों का आंकड़ा लगा रहा है 

अमेरिका के तुलाने विश्वविद्यालय के मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर रॉबर्ट गैरी ने कहा कि कोरोना वायरस वुहान सीफूड बाजार में पैदा नहीं हुआ। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

ये वक्त मौतों को कम करने का है लेकिन ट्रम्प चचा तो इससे आगे बढ़कर मरने वालों की संख्या में उलझ गए हैं। बकौल ट्रम्प अगर हम मौतों की संख्या को एक लाख तक समेटने में सफल रहे तो ये हमारे लिए एक उपलब्धि होगी।

दुनिया कराह रही है और चीन मस्त है:

कैसा लगेगा जब आपको पता हो कि जिसने ये बीमारी दी वो अपने घर मे पॉपकॉर्न चबा रहा है, इसका ताजा उदाहरण चीन है जहां से दुनिया को खतरे में पहुंचाने वाली बीमारी कोरोना निकली और दुनिया भर में छा गयी। लेकिन जब दुनिया इससे जूझ रही है तब चीन अपना बिजनेस बढ़ा रहा है। इस बीमारी की जद में विश्व का लगभग 95 प्रतिशत भाग है और शायद ही गिनती के कुछ देश बचे हो जहाँ इसका प्रकोप न हो। बल्कि इटली, स्पेन और अमेरिका इन दिनों देश मे मरने वालों की लाशों को ढोने में व्यस्त है।

ट्रम्प बड़े संतोषी निकले :

वैसे अगर ट्रम्प के बयान को देखा जाए तो ये बड़ी पीड़ा देता है। एक ओर जहां अमेरिकी जनता मौत के मुंह मे समा रही है वहीँ अमेरिका इस बात को कहकर खुद को अपनी जीत का एहसास दिला रहा है कि अगर हम मरने वालों की संख्या को एक लाख तक रोकने में कामयाब रहे तो ये हमारी जीत होगी। यहाँ आपको बता दें कि इस वक्त दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना अमेरिका में फैल रहा है यहाँ प्रति चौबीस घंटों में हजारो लोग मौत के आगोश में समाते जा रहे है और एक दिन में ही करीब उन्नीस हजार लोग संक्रमित पाए जा रहे है।

क्या है चीन का भविष्य :

अपनी खान-पान शैली और अजीबोगरीब रिवाजों के चलते चीन पहले भी दुनिया को सार्स जैसी बीमारी भेंट कर चुका है लेकिन विश्व हमेशा मानवता की दुहाई देकर चीन को सर आंखों पर बैठाता रहा है। ताजा मामला इटली का है जहां के लोगों ने नस्लीय भेदभाव ( वायरस के चलते) को मिटा कर सबको गले लगाने की बात कही थी और ऐसा हुआ भी। जिसका खामियाजा इटली बराबर भुगत रहा है। वहां मरने वालों को विधिवत अंतिम संस्कार तक मुहैया नहीं कराया जा रहा बल्कि लाशों के लिए ताबूत कम पड़ रहे हैं। जानकारो की माने तो वर्तमान में चीन मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और इसे मुख्य विश्वधारा से अलग-थलग करने के निजी प्रयासों पर जोर देना चाहिए क्योंकि यूनाइटेड नेशन के बलबूते यह कभी संभव भी नहीं होगा। क्योंकि चीन उसका स्थायी सदस्य भी है।

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उदय बुलेटिन
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