रूसी कोरोना वैक्सीन की दुनिया भर में मांग, भारत समेत बीस देशों ने मांगी वैक्सीन।

रूस द्वारा बनाई गयी वैक्सीन का नाम स्पुतनिक-5 (Sputnik V) है। रूस का दावा है कि इस वैक्सीन से कोरोना वायरस के खिलाफ 2 साल के लिए इम्यूनिटी विकसित की जा सकती है।
रूसी कोरोना वैक्सीन की दुनिया भर में मांग, भारत समेत बीस देशों ने मांगी वैक्सीन।
Russian corona vaccineGoogle Image

रूस ने वैक्सीन के प्रयोग की जानकारी देकर न सिर्फ दुनिया के चौंकाया है बल्कि इसके प्रभाव को दर्शाने और सुरक्षित होने की गवाही देने के लिए इसकी एक डोज खुद पुतिन की छोटी बेटी को दी गयी है, रूस ने भरोसा दिलाया है कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है।

रूस ने मारी बाजी:

लंबे वक्त से रूस पर दुनिया के कई देशों द्वारा रिसर्च को चुराने समेत कई आरोप लगते रहे है लेकिन इसी बीच रूस ने अपने देश मे वैक्सीन बनाकर सबको आश्चर्य में डाल दिया है। गौरतलब हो कि वैक्सीन विशेषज्ञों के अनुसार बिना किसी पूर्ण पड़ताल के किसी वैक्सीन का प्रयोग किसी महामारी से भयानक हो सकता है। हालांकि इन सभी आशंकाओं को दरकिनार करते हुए रूसी वैक्सीन "स्पूतनिक वी" को लांच कर दिया है। इस होड़ में अमेरिका, चीन, फ्रांस, जापान और भारत समेत दुनिया के तमाम देश लगे हुए थे लेकिन रूस ने वैक्सीन को लांच करके एक बड़ी कामयाबी अपने नाम कर ली है।

पुतिन की बेटी को भी दी गयी वैक्सीन की डोज:

अब इसे दुनिया पर मनोवैज्ञानिक दबाव कहे या कुछ और चूंकि रूसी राष्ट्रपति ब्लामदिर पुतिन का बेटियों से उनका स्नेह दुनिया से छुपा नहीं है, रूसी वैक्सीन पर दुनिया का नजरिया सामान्य और भरोसेमंद साबित हो जाये इसीलिए पुतिन की छोटी बेटी कैटरीना पर इस दवा का उपयोग किया गया है।

दो साल तक दवा रहेगी कारगर:

रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुरास्को ने विश्व मीडिया को यह जानकारी दी कि इस दवा के द्वारा करीब दो साल तक के लिए इम्यूनिटी बिल्ड अप की जा सकती है कुलमिलाकर दावे के अनुसार इस वैक्सीन की डोज लेने के बाद कोई भी व्यक्ति कोरोना से दो साल तक के लिए सुरक्षित रह सकता है।

वैक्सीन के साइडइफेक्ट न के बराबर:

अगर स्वास्थ्य मंत्री और रूसी वैज्ञानिकों की माने तो इस वैक्सीन के मिनिमम साइडिफेक्ट भी है जिनमे नींद आने और हल्के बुखार आने के लक्षण शामिल है लेकिन ये बेहद सामान्य तरीके से होंगे। बुखार आने पर मात्र पैरासिटामोल दवा से ही कंट्रोल और ठीक किया जा सकेगा। सनद रहे कि इस दवा के परीक्षण और विश्वास के लिए जिस दवा कंपनी गामालेया इंस्टीट्यूट ने इसे विकसित किया है उसके वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन को खुद पर आजमाया हुआ है।

दुनिया भर से उठी वैक्सीन की मांग:

रशियन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट फंड के चीफ किरिल दमित्रियेव ने बताया कि करीब 20 देशों ने इस वैक्सीन में रुचि दिखाई है और करोड़ो की डोज की मांग रखी है। कुछ देशों के साथ तो डील भी हो चुकी है और कुछ पर विचार किया जा रहा है। किरिल ने बताया कि इस वैक्सीन के तीसरे चरण का ट्रायल सऊदी अरब, यूएई और अन्य एशियाई देशों में कराया जा सकता है। किरिल ने जानकारी दी कि हम इस दवा के बड़ी मात्रा में निर्माण के लिए दुनिया भर में बात कर रहे है ताकि इस दवा का निर्माण हो सके लेकिन किसी भी हालत में इस दवा की गुणवत्ता पर असर नहीं पड़ेगा।

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उदय बुलेटिन
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