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विदेश

भारत का विरोध करना नेपाल को महंगा पड़ा, नेपाल के लोगों का निकला दिवाला

भारत से पंगा लेना नेपाल को महंगा पड़ रहा है, खाने-पीने की चीज़ों की रिकॉर्ड महंगाई।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

चीन के चक्कर मे नेपाल ने भारत से विरोध तो कर लिया लेकिन अब यही विरोध नेपाल के लिए सरदर्द बन गया है। नेपाल में भारत के सीमावर्ती इलाकों में राशन संबंधी वस्तुओ में मानो आग सी लग गयी है और आम जनता भारत विरोध को लेकर नेपाल सरकार के सामने आड़े आने लगी है।

तीर तो चला दिया लेकिन उल्टा लग गया:

चीन की चुगली में आकर नेपाल ने भारत से बैर मोल तो ले लिया लेकिन अब यही मनमुटाव नेपाल के लिए नया सिरदर्द बन गया है। सीमावर्ती इलाके के बाशिंदे लगभग हर उपभोग की वस्तु के लिए भारत के ऊपर निर्भर रहते हैं। लेकिन नेपाल की हरकत के बाद भारत ने भी बंदिशें लगानी शुरू कर दी है उसके बाद नेपाल के निवासियों की आंखे निकलना शुरू हो चुकी हैं। आम उपभोग की वस्तुओं के दाम कुछ दिन पहले से ही आसमानों के ऊपर चढ़ गए है। जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।

महंगाई हुई बेकाबू:

भारत और नेपाल में रोटी बेटी का संबंध रहा है इसके साथ ही नेपाल का अधिकतर हिस्सा आवश्यक वस्तुओं के लिए भारत पर ही निर्भर रहता है लेकिन अब भारत के साथ नेपाल के रिश्ते तल्खी की भेंट चढ़ चुके है इसकी वजह से साधारण सी बस्तु नेपाल में 100 नेपाली रुपये की मिल रही है जो महज कुछ दिन पहले 16 नेपाली रुपये प्रति किलो की दर से मिल रहा था। खाद्य तेल ( सरसों का तेल) 200 रुपये प्रति किलो की जगह 800 नेपाली रुपये प्रति किलो बमुश्किल मिल रहा है। रिफाइन शुगर ( शक्कर ) 70 नेपाली रुपये की जगह 400 रुपये प्रति किलो बिक रही है। सब्जी में प्रयुक्त होने वाला मसाला जीरा 400 नेपाली रुपये कीमत वाला 2000 नेपाली रुपये प्रति किलो बिक रहा है।काली मिर्च 1600 रुपये प्रति किलो की जगह 3500, हल्दी 250 रुपये की जगह 800 रुपये और खाने में प्रयोग होने वाली तुअर ( अरहर दाल ) 250 की जगह 800 रुपये प्रति किलो बिक रही है।

महंगाई की यह भयानक आग केवल खाने की वस्तुओं में ही नहीं बल्कि भोजन पकाने और उजाला करने के लिए प्रयोग होने वाले केरोसिन ( मिट्टी का तेल ) उछलकर 400 रुपये प्रति लीटर पहुँच चुका है।

यहाँ आपको बताते चले कि नेपाल की मुद्रा भारत की मुद्रा के मुकाबले 60 भारतीय रुपये के सामने 100 नेपाली मुद्रा होती है और उस महंगाई में इस तरह के भाव चढ़ना सरकार के लिए एक बहुत बड़ी समस्या हो सकती है। चूंकि भारत मे किसानों पर चलाई गई गोली की वजह से नेपाल के लोगों का भारत मे विरोध पुरजोर तरीके से होने लगा है जिसकी वजह से नेपाल के लोगों के लिए रोजी रोटी की समस्या होने लगी है जिसकी वजह से लोगों का सरकार के विरोध में आना लाजमी हो गया है। आशंका यह भी है कि भविष्य में यह विरोध आंदोलन बनकर चीनी समर्थित कम्युनिस्ट सरकार के लिए संकट न खड़ा हो जाये। स्थानीय लोगों के अनुसार वह भारत के साथ ही संबंध रखना चाहते है।

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उदय बुलेटिन
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