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Australia Fire
Australia Fire|Uday Bulletin
विदेश

आस्ट्रेलिया की तश्वीरें अंदर से रुला देती है, सदी की महानतम त्रासदियों में से गिनी जाएगी।

एक ओर जहां विश्व अगले विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ा होकर विकृत हंसी हँस रहा है वहीँ धरती के एक हिस्से पर एक बड़ा भूभाग आग से जल रहा है , जैवविविधता लगभग समाप्त सी हो रही है। 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

आस्ट्रेलिया की जमीन जो धरती का एक बड़ा भूभाग कहलाता है वहां के बाशिंदे समेत जंगली जानवरों को एक बहुत बड़ी समस्या के आगे घुटने टेकने पड़ रहे है। लाखों करोड़ो की संख्या में जानवरों की प्रजातियों के समाप्त होने की समस्या खड़ी होती जा रही है। इस बड़ी आपदा के सांमने सरकारे भी हाँथ गिराकर खड़ी हो गयी है, इस घटना से जुड़े हुए ऐसे चित्र सांमने आ रहे है जिनसे ह्रदय अंदर से रोने के लिए मजबूर हो रहा है।

जानवर जान तक नहीं बचा पाए रहे, उन्हें अब इंसानों का भरोसा है :

वैसे तो वैज्ञानिकों के हिसाब से जंगली जानवर इंसानों से दूर रहने में ही भलाई समझते है क्योंकि उन्हें पता है कि स्वार्थी इंसान का दिमाग कब घूम जाए और उन्हें अपने स्वाद के लिए शिकार न बना ले। लेकिन जंगली जानवरों के दिमाग में आग से मौत का ख़ौफ़ इस कदर बैठ गया है कि जैसे ही वो किसी फायर फाइटर और आम बचाव दल को देखते है वो उनसे किसी अबोध बच्चे की तरह सिमट जाते है। ये यकीनी तौर पर सबसे ज्यादा मार्मिक हो जाता है, उन्हें उम्मीद है कि किसी प्रकार से कोशिस करके उन्हें सिर्फ इंसान ही इस आग से बचा सकता है, इसलिए अगर कही भी जंगल मे किसी इंसान की आहट होती है हर जानवर उन्हें जान बचाने की गुहार लगाता हुआ नजर आता है।

दुनिया इन मामलों में एकजुट क्यों नही होती :

दुनिया में कहने के लिए यूनाइटेड नेशंस और तमाम संस्थाएं बैठी हुई है। लेकिन जंगलों जिनसे मानवता को ऑक्सीजन जैसी जीवन के लिए महत्वपूर्ण चीजे उपलब्ध होती है उस पर आई समस्या के लिए सारे देश एकजुट होकर मदद करने के लिए एकमत क्यों नही होते। एक ओर जहां देश जाति, धर्म, समुदाय के लिए रोना गाना शुरू कर देते है वहां जंगल, हवा, जीव जिनपर मानवों का समूही अधिकार है उनका संरक्षण एकजुट होकर क्यों नहीं होता।

भारतीय रेस्तरां जंगल की आग के पीड़ितों को मुफ्त भोजन परोस रहा:

स्ट्रेलिया में स्थित एक भारतीय रेस्तरां के मालिक विक्टोरिया राज्य में जंगल में लगी आग से प्रभावित लोगों को मुफ्त में भोजन खिला रहे हैं। द डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंवलजीत सिंह और उनकी पत्नी कमलजीत कौर पूर्वी विक्टोरिया के बर्न्‍सडेल में देसी ग्रिल रेस्तरां के मालिक हैं, जहां आग ने घरों को नष्ट कर दिया और एक शख्स की मौत हुई है।

दंपति और उनके कर्मचारी करी और चावल पका रहे हैं, जो मेलबर्न स्थित चैरिटी सिख वॉलंटियर्स ऑस्ट्रेलिया द्वारा अस्थायी आश्रय में रहने वालों को दिया जा रहा है।

सिंह, छह साल से इलाके में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि उनके साथी आस्ट्रेलियाई लोगों की मदद करना उनका 'कर्तव्य' है।

उन्होंने मीडिया से कहा, "यह भयानक है। लोग गंभीर रूप से प्रभावित हैं और उन्हें भोजन और आश्रय की आवश्यकता है। यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी सेवा करें जब उन्हें हमारी सबसे ज्यादा जरूरत है।"

उन्होंने कहा, "हम सिखों के जिंदगी जीने के तरीके का अनुसरण कर रहे हैं। हम सिर्फ वही कर रहे हैं जो अन्य ऑस्ट्रेलियाई आज कर रहे हैं, और यह उन लोगों के लिए सेवा और प्रार्थना करना है जो इन जंगल में लगी भयावह आग से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।"

सिंह ने कहा कि उनकी टीम ने स्वयंसेवकों को नए साल की पूर्व संध्या पर 500 लोगों के लिए भोजन पकाने में मदद की।

डेली मेल ने सिंह के हवाले से कहा कि हमारे पास एक दिन में 1,000 लोगों के लिए खाना पकाने की क्षमता है। हमारे पास चावल, आटा और दाल का भंडार है। हमारा मानना है कि यह अगले सप्ताह के लिए पर्याप्त होना चाहिए।

सितंबर में आग लगने के बाद से विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स में कम से कम 20 लोग मारे गए हैं और दर्जनों लापता हैं।

आग ने अब तक 1,300 से अधिक घरों को नष्ट कर दिया है।