कोरोना संकट : स्वास्थ्य सेवाओं की दुहाई देकर पाकिस्तान करा रहा कर्ज माफ़ी

सारी दुनिया को कोरोना ने डरा रखा है मगर पाकिस्तान सरकार के रवैये को देखकर नहीं लगता की उसे इस बात खौफ है, असल में उसका ध्यान कही और है
कोरोना संकट : स्वास्थ्य सेवाओं की दुहाई देकर पाकिस्तान करा रहा कर्ज माफ़ी
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कोरोना के प्रकोप से तकरीबन सारा विश्व तबाह हुआ पड़ा है और विश्व के तक़रीबन 80 प्रतिशत देशों में इसका असर देखने को मिल रहा है जिसकी वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। इस वायरस की से अब तक दो लाख से भी ज्यादा लोग संक्रमित हैं और करीब करीब 8000 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। ये समस्या आज की तारीख में इतनी ज्यादा जटिल हो चुकी कि सभी देश इसके इलाज की खोज में लगे हुए है, मगर अभी तक किसी को भी कोई सफलता मिल नहीं पायी है।

इस विकट परिस्थिति में भी कुछ देश ऐसे है जो इस महामारी की आड़ में अपने फायदे निकालने की कोशिश में लगे हुए है। इस जानलेवा वायरस से अपने नागरिकों को बचाने की बजाय भारत का पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान जिसकी तक़रीबन पूरी अर्थव्यवस्था उधार पर चल रही है उसने कोरोना त्रासदी की आड़ में अपने कई सारे कर्ज को माफ़ करने की मांग की है।

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हैरानी इस बात की होती है कि ऐसे वक़्त में जब किसी भी देश के सरकार को अपने नागरिकों की सुरक्षा के विषय में कदम उठाने चाहिए उस समय में भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री तथा अन्य नेता किसी और ही विषय पर फोकस कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण ये है की अभी हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस को लेकर सार्क देशों की बैठक बुलाई थी। यह बैठक विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बुलाई गयी थी जिसमे पाकिस्तान को भी न्योता दिया गया था क्योंकि पाकिस्तान भारत का पड़ोसी देश है और ऐसे में वहां पर भी इसकी रोकथाम को लेकर कड़े कदम उठाये जाने बेहद आवश्यक है। मगर प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस पर जरा भी गम्भीरता नहीं दिखाई और अपनी जगह उन्होंने पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री को भेज दिया था।

कोरोना से बेख़ौफ़ हैं इमरान खान

इमरान खान के इस रवैये से यह साफ़ हो गया है कि विश्व व्यापी जानलेवा कोरोना वायरस को लेकर वो कितने गंभीर है। सिर्फ इमरान ही नहीं बल्कि उनकी जगह सार्क सम्मेलन में शामिल हुए स्वास्थ्य मंत्री ने भी कोरोना पर कोई खास गंभीरता नहीं दिखाई और यहाँ पर भी वो कश्मीर के राग को छेड़े हुए थे। बात जब जमीनी हकीकत की करी जाये तो आपको यह जानकर और भी ज्यादा आश्चर्य होगा की पाकिस्तान में कोरोना के संक्रमित लोगों के साथ कितना ज्यादा घटिया बर्ताव हो रहा। उन्हें ना तो सही से उपचार मिल पा रहा न ही उनके लिए इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए कोई खास तयारी है।

क्या है पाकिस्तान के क्वारंटाइन कैम्प का सच

बता दें की पाकिस्तान और ईरान की ताफ्तान सीमा पर बने क्वारंटाइन कैम्प में पाकिस्तानी नागरिकों को रखा गया है जो कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। एक तरफ WHO और हर देश इससे संक्रमित लोगों और असंक्रमित लोगों को भी बचाव तथा सावधानी बरतने आदि की लगातार अपील कर रही है, मगर पाकिस्तान सरकार जैसे चाहती ही नहीं है की उसके नागरिक ठीक हो। आपको बताते चलें कि कोरोना वायरस की वजह से पाकिस्तान में अब तक 250 से अधिक मामले सामने आ चुके है जिनमें से एक की मौत भी हो चुकी है।

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कोरोना से संक्रमित लोगों के लिए पाकिस्तान सरकार ने जो क्वारंटाइन कैम्प बनाया है वो मानकों के अनुसार कहीं से भी खरा नही उतरता। उसे देखने के बाद ऐसा लगता है जैसे वहां पर वो ठीक होंगे या नहीं इसकी तो कोई गारंटी नहीं दिख रही मगर कोरोना से पहले ही वो शायद इस दुनिया को छोड़ दें। ना तो वहां पर उनके रहने की अलग व्यवस्था है और ना ही ही खाने पीने का कोई बेहतर प्रबंध, लोग वहां पर खाना खाने की बजाय उसे फेंक देना बेहतर समझ रहे। दक्षिण एशियाई देशों में पाकिस्तान कोरोना वायरस का केंद्र बनता जा रहा है क्योंकि यहाँ पर इससे संक्रमित लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा।

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