उदय बुलेटिन
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kulbhushan jadhav icj verdict
kulbhushan jadhav icj verdict|Goggle Images
विदेश

आई.सी.जे में भारत को भले ही मिली हो बढ़त, लेकिन कुलभूषण पर संशय बरकरार।

अन्तर्राष्ट्रीय कोर्ट किसी भी देश के फैसले को बदल नही सकती, वह सिर्फ यथास्थिति को देख समझकर, देश को यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश जारी कर सकता है” 

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

देश मे कुलभूषण को लेकर आत्मिक जुड़ाव है, उनकी रिहाई को लेकर पूरे देश मे एक उम्मीद न सिर्फ कायम है बल्कि, यह भी है कि दबावों के आगे पाकिस्तान झुककर उन्हें अभिनंदन की तरह वापस करेगा।

कुलभूषण जाधव के भारत की तरफ से वकील हरीश साल्वे ने अपनी मजबूत दलीलों से न सिर्फ पूरे विश्व को इस मामले की तरफ आकर्षित किया बल्कि इस मामले में भारत की बढ़त को आगे बढ़ाने का काम किया, लेकिन जिस प्रकार से अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस ने अपने फैसले को खुद संशय में डाल दिया है उससे चिंताएं पैदा होती है।

शुरुआत में ही पाकिस्तान ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया कि कुलभूषण जाधव भारत के एक सर्विंग नेवी ऑफिसर हैं तथा वो भारत के लिए जासूसी कर रहे थे, पाकिस्तान का यही कदम भारत के लिए मूलबिन्दु साबित हुआ, कोर्ट के अनुसार जब जाधव भारत का नागरिक है , और पाकिस्तान की एजेंसियों ने उसे आतंकी और जासूस करार दिया है , तो भला कौन सा ऐसा जासूस है जो किसी देश मे अनाधिकृत तरीके से जासूसी करने अपने देश का पासपोर्ट लेकर जाएगा।

हालांकि फांसी की सजा को लेकर अभी भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, अदालत ने पाकिस्तान को निर्देश दिया की वह कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस दे, वहीँ पाकिस्तान ने फांसी माफ करने की बात अदालत द्वारा न कहे जाने पर अपनी जीत बताया है,

भारत के अनुसार जाधव अब किसी सेना का सक्रिय अंग नही है तो इस मामले को आम अदालत में ट्रायल कराया जाए, जबकि अब तक पाकिस्तान सैन्य अदालत का डंका पीट कर ट्रायल करता रहा है इसी बात को लेकर अंतराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को इशारों-इशारों में समझाया है, न्यायालय के अनुसार जाधव के केश को सीधे सैन्य अदालत में चलाकर और दूतावास द्वारा काउंसलर एक्सेस न देकर पाकिस्तान ने सीधे-सीधे वियना संधि के आर्टिकल 36 के पैरा 1 (बी) का उल्लंघन किया है

जाधव पर पाकिस्तान का कोई भी कदम घातक सिद्ध होगा:

हालांकि गेंद अभी भी पाकिस्तान के पाले में है, पाकिस्तान चाहे तो विश्व मे अपनी छवि सुधारने हेतु जाधव को उसके समस्त अधिकार दिलाकर या फिर भारत को ही सौप सकता है, अगर पाकिस्तान के पास कोई सुबूत है तो भारत मे हुए तमाम हमलों के बाद दिए गए डोजियर की तरह सौंप सकता है,

लेकिन अगर पाकिस्तान अपने पुराने अड़ियल रवैये पर खड़ा रहा तो दोनों देशो के बीच तमाम अंतराष्ट्रीय संधियों को नष्ट करने जैसा होगा।

फैसला 15-1 के अंतर से आया है:

हालांकि यह सुनने में थोड़ा अटपटा लग रहा होगा कि इस अंतराष्ट्रीय न्यायालय में 15 जज ही उपस्थिति थे फिर इस फ़ैसले में 16 वा जज कहाँ से आ गया, तो बात यह है कि भारत की तरफ से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जज पहले से मौजूद है लेकिन पाकिस्तान की तरफ से अब तक कोई जज मौजूद ही नही था, अतः इस न्यायालय में यह नियम है कि अगर दो देशों के बीच कोई वाद चलता है तो फैसले में दोनो देशो के जज की उपस्थिति अनिवार्य है, इसलिए पाकिस्तान के एक जज की एडहॉक नियुक्ति की गई थी, हालांकि सारे 15 जजो ने इस फैसले को एकतरफा बनाया , हालांकि पाकिस्तान की तरफ से आये जज ने हर दलील में भारत का विरोध किया, वो कही से भी जज दिखाई ही नही दिए।