उदय बुलेटिन
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अपनी डेढ़ साल की बेटी के साथ मैट जर्बो
अपनी डेढ़ साल की बेटी के साथ मैट जर्बो|Social Media
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बेटी के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए पिता ने महज 20 महीने में लिखी 334 कहानियां 

इससे पहले भी बच्चों के लिए 4 उपन्यास और 8 किताबें लिख चुके हैं मैट जर्बो

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आज के समय में माँ-बाप का अपने बच्चों को अच्छे संस्कार, सीख और प्रेरणा देना कितना जरूरी है ये बताने के लिए एक पिता ने अपनी डेढ़ साल की बच्ची के लिए 334 कहानियां लिखी हैं। और इन कहानियों के जरिए उन्होंने बाप-बेटी के खूबसूरत रिश्ते को बताया है। दरअसल यह घटना है तस्मानिया में रहने वाले मैट जर्बो की। जिन्होंने अपनी छोटी सी बेटी के लिए 365 कहानियों को लिखने की चुनौती ली है। जिसमें से 13 जुलाई तक उन्होंने 334 कहानियां लिखी है। सीप फार्म में काम करने वाले पिता दिन में काम करते हैं और रात में कहानियां लिखते हैं।

बेटी को प्रेरणा देना चाहते हैं मैट

मैट अपनी बेटी को इस खूबसूरत दुनिया से अपने किताबों के जरिये वाकिफ कराना चाहते हैं। इससे पहले भी उन्होंने बच्चों के लिए 4 उपन्यास और 8 किताबें लिखी थीं। फार्म में काम करने के बाद रात में घर लौट कर 10 बजे से मैट लिखना शुरू करते हैं और रात 1 बजे तक एक कहानी लिखकर पोस्ट कर देते हैं। मैट की लिखी कहानियां बच्चों को काफी पसंद आती हैं। अपनी बेटी के लिए मैट कहते हैं कि मैं उसे विरासत में अच्छी सीख देना चाहता हूं। उसे बेहतर इंसान बनाना चाहता हूं। अगर वो इन किताबों से कुछ भी सीख पाए तो मुझे अच्छा लगेगा।

लेखन ने दी नई ज़िंदगी

अपनी किताबों के बारे में मैट कहते हैं ‘आज दुनिया में हर तरफ हिंसा हो रही है, हर तरफ अज्ञानता फैली है। ऐसे में अगर मेरी किताब बच्चों को प्रेरणा देगी तो मुझे खुशी होगी। मैट आगे कहते हैं कि जब मैं दो साल का तब अपने परिवार से अगल हो गया था। मेरे साथ कोई रहने वाला नहीं था। इसलिए मुझे दुनिया देखने का मौका नहीं मिला। कभी-कभी मन करता था खुदकुशी कर लूं। लेकिन फिर मैंने लिखना शुरू किया।’

“ कुछ समय बाद मुझे सीप फ्रॉम में नौकरी मिल गई। तीन साल पहले मैं मेरी वाइफ एलिना से मिला था। वह वेनेजुएला से है। वो यहाँ घूमने आई थी। हमारी तभी मुलाकात हुई। और हमने साथ रहने का फैसला लिया। करीब डेढ़ साल पहले मेरी बेटी का जन्म हुआ। और जब वो तीन साल की हो जाएगी तो उसे ये तोहफे में दूंगा।”

मैट ने 1997 में अपना पहला उपन्यास लिखा था। जिसे उस साल ऑस्ट्रेलिया में बुक ऑफ़ द ईयर का अवार्ड मिला था।