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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)
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US-Shut-Down: अमेरिका में 23 दिनों से ठप है सरकारी काम-काज, गर्त में पहुंची अमेरिकी अर्थव्यवस्था

अमेरिका में शनिवार को आंशिक सरकारी कामबंदी (Government Shut-down) का 21वां दिन था और यह अमेरिका के इतिहास की सबसे लंबी कामबंदी रही। 

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

वॉशिंगटन: अमेरिका (America) में ठप पड़ा सरकारी (Government Shut-down) काम-काज रविवार बीतने के साथ ही इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा बंद बन गया है और हर गुजरते दिन के साथ विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (Economy) को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अमेरिका में 1976 के बाद से अब तक 21 बार सरकारी काम-काज ठप (Government Shut-down) पड़ चुका है हालांकि आर्थिक वृद्धि पर उसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला लेकिन इस बंद की अवधि के चलते यह कह पाना बहुत मुश्किल हो गया है कि इसका कितना बुरा प्रभाव पड़ेगा।

एस एंड पी ग्लोबल रेटिंग्स के प्रमुख अमेरिकी अर्थशास्त्री बेथ एन बोविनो ने बताया कि करीब एक चौथाई संघीय कार्यबल इस बंद के चलते प्रभावित हैं और यह अर्थव्यवस्था (Economy) से हर हफ्ते करीब 1.2 अरब डॉलर निकाल रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि इसके और लंबा खिंचने से ये आंकड़े बढ़ सकते हैं।

दरअसल, अमेरिका, मेक्सिको सीमा पर दीवार (US-Mexico Border Wall) के निर्माण के लिए ट्रंप (Donald Trump) की 5.7 अरब डॉलर के फंड की मांग को लेकर ट्रंप (Donald Trump) और सीनेटर्स के बीच गतिरोध कायम है। ट्रंप (Donald Trump) ने कहा था कि वह फंड नहीं मिलने पर देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर सकते हैं लेकिन वह इसकी तुलना में कांग्रेस के साथ तालमेल बैठाना अधिक पंसद करेंगे।

गौरतलब है कि शनिवार को आंशिक सरकारी कामबंदी (Government Shut-down) का 21वां दिन था और यह अमेरिका के इतिहास की सबसे लंबी कामबंदी रही। सीएनएन के मुताबिक, कामबंदी से एक चौथाई संघीय सरकार और हजारों संघीय कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक, फंडिंग रुकने से करीब 800,000 संघीय कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आर्थिक सलाहकार केविन हासेट ने संघीय सरकार की मौजूदा कामबंदी (Government Shut-down) की तुलना छुट्टियों से करते हुए कहा कि छुट्टियों पर भेजे गए कामगार ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं। सीएनएन ने हासेट के हवाले से कहा, "क्रिसमस और न्यूईयर के बीच बड़ी संख्या में सरकारी कामगार छुट्टियों पर जाने वाले ही थे और उसके बाद कामबंदी हो गई इसलिए वे काम पर नहीं जा सकते इसलिए उनकी छुट्टी है लेकिन उन्हीं अपनी छुट्टियों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ा इसलिए जब वे वापस आएंगे तो उन्हें अपना वेतन भी मिल जाएगा इस लिहाज से यह उनके लिए बेहतर स्थिति है।"