उदय बुलेटिन
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बार्ने की तस्वीर उसके फेसबुक अकाउंट से ली गई है<br>
बार्ने की तस्वीर उसके फेसबुक अकाउंट से ली गई है
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विदेश

शराब ऐसी चढ़ाई कि अब रुकने का नाम नहीं, बस रास्ता नापा जा रहा है !

भारत में शराब पीने के बाद अक्सर ऐसा बोलते हुआ सुना जाता है, “चार पैग अन्दर, बंदा सिकंदर” लेकिन इस कहानी में में बंदा सिकंदर नहीं बास्कोडिगामा बन गया।

Shivjeet Tiwari

Shivjeet Tiwari

Summary

नशा वैसे तो नाश का रास्ता दिखाता है, लेकिन कभी-कभी नशे में भी इंसान वह काम कर देता है जिसकी उसे उम्मीद ही नहीं रहती, खैर नशे में चलना आम बात है, लोग तो नालियों, गड्ढों में लोटते नजर आ जाते है लेकिन यहाँ का माजरा कुछ अलग है

नाम है बार्ने रूल , शहर चेस्टर और स्कॉटलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग में इतिहास और राजनीति विज्ञान में दिल डुबाऊ पढ़ाई जारी है, लेकिन एक रोज बार्ने रूल के साथ कुछ ऐसा हो गया जिसकी कोई कल्पना नही थी, सितंबर के शुरुआत के दिनों में ही एक शाम रूल ने अपने दोस्तों के साथ जाकर क्लब में पार्टी की, और पार्टी का मतलब जी भरके शराब पी और फिर क्या था शराब अपने शबाब पर और बार्ने साहब निकल लिए दूसरे वास्कोडिगामा बनने।

बिना किसी नाव और पतवार के बार्ने बिना किसी रुकावट के रात भर चलता रहा, जब शराब ने दिमाग में खाली जगह छोड़ी बार्ने को लगा कि उसने कुछ अलग किया है, वह चल रहा है, उसे रुकना नही है चलना उसकी फितरत है, फिर बार्ने ने निश्चय किया कि वह लगातार चलेगा और तब तक चलेगा जब तक स्पेन नही पहुँच जाता, बार्ने अपनी पैदल यात्रा में अबतक 800 किमी से ज्यादा रास्ते की दूरी तय कर चुका है और इस वक्त वह फ्रांस बीच से गुजर रहा है।

बकौल बार्ने “ मैं लगातार लोगों से मिल रहा हूँ, उनके कल्चर और साहित्य को समझने का प्रयास कर रहा हूँ, मैंने थोड़ी बहुत फ्रेंच भी सीख ली है, अब मुझे ये सब बेहद आसान लग रहा है”

एक रिपोर्ट के मुताबिक बार्ने ने अपनी यूनिवर्सिटी को छोड़ने का मकसद बताया की " ऐसा नही की वो जगह मेरे लिए बेहतर नही थी, या मुझे उस यूनिवर्सिटी में दिलचस्पी नहीं थी, बस वो मेरे लिए ठीक नही थी, या दूसरे शब्दों में मैं उस यूनिवर्सिटी के लिए नही था"

बार्ने बेहद कम उम्र के मालिक है करीब 20 साल की उम्र का लड़का अनजाने में ही अपने पैशन और लक्ष्य के करीब जाने को तत्पर है,  बार्ने के पिता जोनाथन रूल अपने बेटे के सबसे करीबी है, इस कदर करीबी की एक तश्वीर में बेटे और बाप एक साथ हाँथ में शराब के पेग लिए नजर आ रहे है, हालांकि विदेशो में ये सब सामान्य है, भारत मे ऐसा करते पाए जाने पर जूतम पैजार की स्थिति हो सकती है।

बार्ने ने अपने लक्ष्य के लिए जो निर्धारित किया है वो कभी भी आसान नही, हालाँकि शिक्षा को इस तरह से बीच मे छोड़ देना ठीक नही ,लेकिन आत्मसंतुष्टि भी कोई चीज होती है।