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स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद|Source- velivada
सुविचार

“एक शब्द में, यह आदेश है कि तुम परमात्मा हो”- स्वामी विवेकानंद

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AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

12 जनवरी 1863 में कोलकत्ता के बंगाल प्रेसीडेंसी (ब्रिटिश इंडिया) में जन्मे स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया में हिन्दू धर्म का प्रचार-प्रसार किया। अमेरिका व यूरोप में दिए उनके भाषण आज भी विश्व प्रसिद्ध हैं। उन्होंने पूरी दुनिया में भारत का परचम लहरा दिया था।

आज हम आपको इस महान पुरुष के कुछ अनमोल विचारों को बताने जा रहें हैं, जिसने हम सभी को प्रेरित किया-

उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्म हो, स्वच्छंद जीव हो,धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है, तुम तत्व के मालिक हो ।
स्वामी विवेकानंद
जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुंद्र में मिला देती हैं, उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवन तक जाता है।
स्वामी विवेकानंद
किसी की निंदा ना करें- अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ज़रूर बढ़ाएँ, अगर नहीं बढ़ा सकते, तो अपना हाथ जोड़िये, आपके भाइयों को आशीर्वाद दीजिये और उन्हें उनके मार्ग पर जाने दीजिये।
स्वामी विवेकानंद
कभी मत सोचिये की आत्मा के लिए सब कुछ असम्भव है, ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है।अगर कोई पापी है, तो वह यही है, ये कहना की तुम निर्बल हो या अन्य निर्बल हैं।
स्वामी विवेकानंद
अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ़ बुराई का  ढेर है और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है।
स्वामी विवेकानंद
हम वह हैं,जो हमें हमारी सोचा ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिये कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं, विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं।
स्वामी विवेकानंद