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 परमहंस  योगानंद 
परमहंस योगानंद |Image credit - Ananda
सुविचार

“एक नश्वर प्राणी के रूप में आप सीमित हैं, लेकिन भगवन के बच्चे के रूप में आप असीमित हैं ”....

सुविचार

AKANKSHA MISHRA

AKANKSHA MISHRA

" मनुष्य के स्थूल शरीर में असंख्य खतरे रहते हैं और यह आसानी से घायल हो सकता है या इसके अंग भी आसानी से कट कर अलग हो सकते हैं। जब कि सूक्ष्म शरीर कभी-कभी कट सकता है या उसमे खरोंच आ सकती है। परन्तु इच्छामात्र से वह तुरंत ठीक भी हो जाता है।"

“एक नश्वर प्राणी के रूप में आप सीमित हैं। लेकिन भगवन के बच्चे के रूप में आप असीमित हैं। अपना ध्यान भगवान पर केंद्रित करें। और आपको जो चाहिए वह शक्तियाँ किसी भी दिशा में उपयोग करने के लिए मिल जायेंगी।”

“भीम के सामान प्रबल शक्तिशाली होते हुए भी अनेक व्यक्ति रॉयल बंगाल टाइगर के प्रचण्ड आक्रमण के सामने अत्यंत भयभीत और असहाय हो उठता हैं। इस प्रकार बाघ मनुष्य को उसके ही मन की कल्पना में एक साधारण बिल्ली की भयभीत अवस्था के सामान स्थिति में डाल देती है| परन्तु जिस मनुष्य में यथावत बलशाली शरीर के साथ-साथ अत्यंत ढृढ़ निश्चय हो, वह इस परिस्थिति को बाघ पर उल्टा सकता है और यह मानने पर विवश कर सकता है कि वह एक बिल्ली के सामान ही आत्मरक्षा में असमर्थ है| कितनी ही बार मैंने यही किया है|”

परमहंस योगानन्द