उदय बुलेटिन
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इलेक्शन बुलेटिन

लोकसभा चुनाव 2019: यूपी में महागठबंधन और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचातानी की असल वजह क्या है !

लोकसभा चुनाव की तारीख जैसे जैसे समाने आ रही है, नेताओं के बीच वार पलटवार तेज हो गया है।

Anuj Kumar

Anuj Kumar

देश के सबसे ज्यादा सीटों वाला राज्य यूपी, जिस पर सभी राजनीतिक दलों की बेहद खास दिलचस्पी रहती है। ऐसे में नेशनल पार्टियों से लेकर रीजनल पार्टियों तक सभी का एक ही मकसद होता है कि यूपी में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर अपना कब्जा हो। यूपी में लगभग समाप्त हो चुकी कांग्रेस को अब प्रियंका का ही सहारा है। प्रियंका ने भी इसके लिए कमर कस ली है। सोमवार को प्रियंका ने वोट यात्रा कर पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से चुनावी बिगुल फूंक दिया है। लेकिन कांग्रेस के लिए ये राय इतनी आसान नहीं होने वाली है।

दरअसल, प्रियंका गांधी के वोट यात्रा से पहले यूपी कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने एक प्रेस कॉन्फेस कर एसपी और बीएसपी गंठबंधन के लिए सात सीटें छोड़ने की बात कही थी। कांग्रेस की तरफ से महागठबंधन को ये रिटर्न गिफ्ट था। लेकिन मायावती को कांग्रेस का ये गिफ्ट पसंद नहीं आया। मायावती ने ट्वीट कर कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस किसी भी तरह का कोई भ्रम न फैलाए। मायावती के ट्वीट को रिट्वीट कर अखिलेश ने भी मायावती का साथ दिया।

दरअसल, एसपी- बीएसपी के गठबंधन के वक्त ये तय हुआ कि दोनों पार्टिया 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बची हुई चार सीटे आरएलडी और कांग्रेस के लिए छोड़ी गई। लेकिन बाद में तीन सीटों पर समझौता कर आरएलडी तो महागठबंधन में शामिल हो गई। लेकिन कांग्रेस लगातार इस गठबंधन में घुसने की जद्दोजहद में लगी हुई थी।

यूपी में अगर कुछ सीटों को छोड़ दे तो कांग्रेस का कुछ खास प्रभाव है नहीं। ऐसे में महागठबंधन ने कांग्रेस से दूरी बनाने का फैसला किया है। खबरों की मानें तो कांग्रेस लगातार अखिलेश यादव से महागठबंधन की कवायद कर रही थी। लेकिन मायावती को ये मंजूर नहीं था। यही कारण है कि यूपी में लगातार पिछले कई दिनों से प्रियंका गांधी के दौरे रद्द हो रहे थे। महागठबंधन के दरवाजे बंद होने के बाद आखिरकार सोमवार को प्रियंका ने बोट यात्रा कर अपने अभियान की शुरूआत कर ही दी। अब इसका कितना फायदा अगामी चुनाव में होगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।