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राम मंदिर पर नरम पड़े बाबा रामदेव, जानिए क्या है वजह

राम मंदिर एक ऐसा मुद्दा रहा है जिस पर हर रोज कुछ न कुछ बयानबाजी होती ही रहती है। ताजा बयान बाबा रामदेव का है। बाबा ने कहा कि राम मंदिर मक्का, मदीना या वेटिकन सिटी में तो नहीं बनेगा ? 

Anuj Kumar

Anuj Kumar

राम मंदिर एक ऐसा मुद्दा रहा है जिस पर हर रोज कुछ न कुछ बयानबाजी होती ही रहती है। ताजा बयान बाबा रामदेव का है। बाबा रामदेव ने पत्रकार द्वारा राम मंदिर पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि राम मंदिर मक्का, मदीना या वेटिकन सिटी में तो नहीं बनेगा ? राम मंदिर अयोध्या में ही बनेगा।

दरअसल, योग गुरु बाबा रामदेव इन दिनों गुजरात में है। अहमदाबाद से लगभग 70 किलोमीटर दूर खेड़ा जिले में बाबा रामदेव ने कहा कि ये निर्विवाद सत्य है कि राम का जन्म अयोध्या में हुआ और राम केवल हिन्दुओं के ही नहीं बल्कि मुसलमानों के भी पूर्वज हैं।

बाबा रामदेव के इस बयान पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा कि बाबा रामदेव जैसे लोग चुनाव से पहले बीजेपी की मदद कर उनके पक्ष में माहौल बनाने का काम करते हैं। ये लोग मोदी सरकार और बीजेपी की मदद करते है ताकि अगले पांच साल के लिए और अधिक लाभ उठा सके। लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर क्यों राम मंदिर पर संत समाज और संघ मोदी सरकार पर दवाब बनाने के वजह लोगों को धैर रखने की बात कर रहा है। क्योंकि ये वही रामदेव हैं जो प्रयाग में हुए धर्म सभा में राम मंदिर पर संत समाज के सब्र का बांध टूटने की बात कही थी।

दरअसल, प्रयाग में हुए धर्म सभा के बाद ये कयास लग रही थी कि राम मंदिर का मुद्दा भी 2019 के चुनाव में जोर शोर से उठेगा। इसी धर्म सभा में जब मोहन भागवत ने संतों से सब्र रखने की बात कही थी तो सभा में मोहन भागवत के खिलाफ वीएचपी के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की थी। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर के निर्माण के लिए 6-7 महीने तक सब्र करने को कहा। साथ ही भागवत ने कहा कि 2019 लोकसभा चुनाव के बाद राम मंदिर निर्माण शुरू किया जाएगा।

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Mohan Bhagwat

क्या है रणनीति

2019 चुनाव में राम मंदिर के मुद्दे पर मोदी सरकार पर किसी भी तरह का दवाब नहीं बनाया जाएगा। संघ राम मंदिर पर बीजेपी को कोई चुनाव नुकसान के पक्ष में नहीं है। दरअसल, राम मंदिर मुद्दे पर मोदी सरकार अपने ही संगठनों द्वारा घिरती हुई दिख रही थी। वीएचपी लगातार धर्मसभा कर सरकार पर दवाब बनाने की कोशिश में लगा हुआ था। तो दूसरी तरफ मोदी सरकार पर संघ का दवाब। इस कसमकस में मोदी सरकार विपक्षी महागठबंधन से लड़ने के वजह अपने ही संगठनों को जवाब देते नहीं बनता था। जिसका नुकसान मोदी सरकार को 2019 के आम चुनाव में हो सकता था।

ये ही कारण है कि राम मंदिर पर मुद्दे को अब वीएचपी ने भी ठंडे बसते में डालने का फैसला किया है। मोहन भागवत ने भी देहरादून के एक कार्यक्रम में कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद किसी की भी सरकार बने हम मंदिर निर्माण पर काम शुरू हो जाएगा।