शपथ ग्रहण के बाद अब हो रही है प्रोटेम स्‍पीकर की चर्चा, जानें क्या है इसकी शक्तियां !

शपथ ग्रहण समारोह के समाप्त होते ही प्रोटेम स्पीकर के पद को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही है, अब देखना ये है कि आखिर ये जिम्मेदारी किस व्यक्ति के हिस्से में जाती है। 
शपथ ग्रहण के बाद अब हो रही है प्रोटेम स्‍पीकर की चर्चा, जानें क्या है इसकी शक्तियां !
प्रोटेम स्पीकरgoogle

17 वीं लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद कल शाम प्रधानमंत्री समेत कुल 58 मंत्रियों ने अपने पद और गोपनीयता के लिए शपथ ग्रहण किया। अब इसके बाद से ही प्रोटेम स्पीकर को लेकर चर्चा शुरू हो गई। इस बार लोगों की दिलचस्पी राजनीतिक क्षेत्र में काफी ज्यादा बढ़ गई है इसलिए वो एक-एक प्रक्रिया को जानने की इच्छा रखने लगे हैं। इसी तरह से प्रोटेम स्पीकर ‘Protem speaker’ को लेकर भी कई लोगों के मन में काफी सारे सवाल है और आज हम आपको उन सभी सवालों के जवाब देने जा रहे हैं।

प्रोटेम स्पीकर
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क्या होता है प्रोटेम स्पीकर

सबसे पहले तो ये जानना जरूरी है कि प्रोटेम स्पीकर जिसे लेकर इतनी चर्चा हो रही है वो है क्या ? अब जल्द ही लोकसभा का कार्यकाल शुरू होने वाला है ऐसे में सदन के अध्यक्ष के पद पर लोकसभा व विधानसभा में एक 'अस्थाई अध्यक्ष' नियुक्त किया जाता है जिसे 'प्रोटेम स्पीकर' (Protem speaker) कहा जाता है। मतलब नए सरकार की नियुक्ती के बाद जबतक सदन के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष नहीं चुने जाते तब तक उनकी सारी जिम्मेदारी प्रोटेम स्पीकर पर ही रहती है।

प्रोटेम स्पीकर का कार्य

संसद सदस्यों को शपथ दिलाना, बहुमत का परीक्षण या फिर नए अध्यक्ष के चुनाव के लिए सभा का नेतृत्व करना ही प्रोटेम स्पीकर का काम होता है। जब नई लोकसभा का गठन होता है तो ऐसे में राष्ट्रपति सदन के उस सदस्य को प्रोटेम स्पीकर के लिए चुनते हैं जिसे सदन का सबसे लंबा अनुभव होता है या आप यूं कह सकते हैं कि सबसे वरिष्ठतम सदस्य को इस पद के लिए नियुक्त किया जाता है। इसके अलावा अगर कार्यकाल के दौरान अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का पद खाली होने पर (अर्थात असमय मृत्यु होने व इस्तीफा देने पर) ही ‘प्रोटेम स्पीकर’ (Protem speaker) की नियुक्ती की जाती है।

अब प्रोटेम स्पीकर के पद को लेकर 2 लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। खबरों की मानें तो मेनका गांधी को प्रोटेम स्पीकर बनाया जा सकता है। सुल्तानपुर से विजेता बनी मेनका को पीएम मोदी के कैबिनेट में मंत्री की कुर्सी नहीं मिली है, यही वजह है कि उनको प्रोटेम स्पीकर का पद दिया जा सकता है लेकिन अभी तक ये कंफर्म नहीं हो पाया है। पीएम मोदी के पिछले कार्यकाल में मेनका गांधी महिला एवं बाल विकास मंत्री थीं। इसके अलावा बरेली से 8 बार सांसद रह चुके संतोष गंगवार का नाम भी इस पद के लिए सामने आ रहा है जो कि पिछली सरकार में वित्त राज्यमंत्री थे।

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प्रोटेम स्पीकर व स्पीकर में अंतर

कई बार जानकारी के अभाव में लोग प्रोटेम स्पीकर व स्पीकर को एक ही समझ बैठने की भूल कर लेते हैं। ऐसे में हम आपको स्पष्ट कर दें कि ये दोनों पद अलग हैं। सबसे पहले तो ये जान लें कि लोकसभा अध्यक्ष को 'स्पीकर' (speaker) के नाम से जाना जाता है, जबकि प्रोटेम स्पीकर ‘कार्यवाहक अध्यक्ष’ को कहते हैं। प्रोटेम का अर्थ ही होता है, 'कुछ समय के लिए'। इससे आप साफ समझ गए होंगे कि ये अस्थायी अक्ष्यक्ष का पद होता है।

नई लोकसभा के निर्माण के दौरान जब तक सांसद सदन में शपथ ग्रहण नहीं करते हैं तब तक उन्हें इसका सदस्य नहीं माना जाता है इसलिए प्रोटेम स्पीकर का सबसे पहला काम होता है उनको शपथ ग्रहण करवाना। वहीं स्पीकर का कार्य लोकसभा के निर्माण के बाद उसकी अध्यक्षता करना, उसमें अनुसाशन गरिमा व प्रतिष्ठा बनाए रखना होता है।

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उदय बुलेटिन
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