उदय बुलेटिन
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पीएम मोदी की जीत 
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इलेक्शन बुलेटिन

मोदी के विरोधियों ने ही फिर से दिलाई मोदी को जीत

लोकसभा चुनाव के अंतिम परिणाम आने के बाद एनडीए की भारी बहुमत से जीत हासिल करने के बाद अब उनके जीतने की वजह पर लगातार चर्चा हो रही है।  

Puja Kumari

Puja Kumari

लोकसभा चुनाव 2019 (Loksabha Election 2019) के परिणाम में एनडीए भारी मतों से विजयी रही और देश में एक बार फिर से मोदी सरकार बनी। लेकिन इन सभी चीजों के सामने आने के बाद भी कई सवाल ऐसे हैं जो लगभग हर किसी के मन में आ रहे हैं। जिनमें से एक अहम सवाल है मोदी का इस तरह से दोबारा से भारी मतों से विजयी होने का क्या कारण है?

वैसे देखा जाए तो इसपर अगल-अलग राजनीतिज्ञों व वरिष्ठ पत्रकारों की अपनी अलग राय है लेकिन एक वजह ऐसी है जिसे हर किसी ने माना है। दरअसल मोदी की जीत में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका उनकी विरोधी पार्टियों की ही रही है। ये सुनकर वाकई में आपको हैरानी जरूर हो रही होगी लेकिन अब क्या किया जा सकता है सच तो यही है। हम आपको कुछ ऐसी बातें बताएंगे जिसे जानकर आप खुद भी इस बात को मानने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

पीएम मोदी की जीत 
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अगर आप पिछले 5 सालों के मोदी कार्यकाल (PM Modi) को याद करें तो साल 2014 में चुनाव जीतने के बाद से ही मोदी सरकार ने एक-एक करके कई बड़े कदम उठाए जिसका विरोध विपक्षी पार्टियों ने बार बार किया। जनता के मन में मोदी के प्रति नफरत लाने के लिए कांग्रेस ने कई दाव अपनाएं चाहें वो नोटबंदी (Demonetisation) हो या सर्जिकल स्ट्राइक (Surgial Strike) सभी मुद्दो पर सवाल उठाया लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश को सबक सिखाने पर भी आखिर विरोधी पार्टियों ने क्यों सवाल उठाया। ऐसा करके उन्होने अपने लिए ही कुंआ खोद लिया क्योंकि जनता इतनी बेवकूफ नहीं है अपने भले और बुरे की समझ सभी को है।

कई पार्टियों ने मोदी (PM Modi) को तोड़ने के लिए तीखे व्यंग भी कसे जैसे ‘चौकीदार चोर है’ से लेकर ‘चायवाला तक और भी काफी कुछ। अगर हाल की बातों को ही याद कर लें तो चुनावी माहौल में भी सभी विपक्षी पार्टीयों ने मिलकर अपना पूरा जोर लगा दिया। हाल ही में भाजपा का साथ छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए पंजाब के मंत्री नवजोत सिद्धू ने तो सारी मर्यादा ही पार कर दी, उन्होने कहा कि, मोदी को ऐसा छक्का मारो कि सीमा पार जाकर गिरे

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इसके अलावा ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को गुंडा बताना हो या राहुल गांधी द्वारा मोदी नफरत फैलाने वाले नेता बताना हो, पर खास बात तो ये थी कि इनके एक-एक तंज मोदी के पक्ष में उनकी शक्ति बनते गए क्योंकि इनके सभी आरोप बेबुनियाद साबित होने लगे और जनता धीरे-धीरे समझने लगी कि आखिर मोदी ने जो भी फैसले लिए हैं वो देशहित को लेकर लिए गए हैं। इस तरह से मोदी पर कसा हुआ तंज ही उनको ये चुनाव जीताने में मददगार साबित हो गया।

इन विरोधी पार्टीयों द्वारा मोदी (PM Modi) को कुछ मुद्दों पर सवाल उठाना तो समझ आता था लेकिन अपनी हार के डर में ये ऐसी बातें करने लगे जिसके बारे में इनको खुद भी नहीं पता था कि इनका पासा उल्टा पड़ने वाला है।