उदय बुलेटिन
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इलेक्शन बुलेटिन

एग्जिट पोल 2019: यूपी में बुआ-बबुआ को भारी नुकसान, क्या है इसके सियासी मायने,  क्या फेल हो गया उप्र का जातिगत समीकरण !

एग्जिट पोल के नतीजों से मची राजनीतिक दलों में खलबली

Anuj Kumar

Anuj Kumar

23 मई जब पूरा देश ये जानेगा कि किसकी सरकार बनेगी और कौऩ विपक्ष में बैठेगा। लेकिन उससे पहले ही 19 मई को यानी रविवार को एग्जिट पोल के आंकड़ों ने सभी को चौंकाया है। खास तौर पर यूपी में। यूपी एक ऐसा राज्य जहां चुनावी शतरंज में हर एक दांव सिर्फ इसलिए चला जाता है ताकि विरोधियों को मात दिया जा सके। तभी तो यूपी के चुनाव में अगड़ी और पिछली जाति को लेकर खूब घमासान देखने को मिला। किसी को अली पसंद आए, तो किसी को बजरंग बली। सारा कुछ इसलिए की बस चुनाव जीता जाए और ज्यादा से ज्यादा सीटें मिल सके।लेकिन कहते हैं न लोकतंत्र में सबका मालिक जनता है। जनता जब चाहे किसी को राजा बना दे और जब चाहे किसी को रंक।

क्या कहता है एग्जिट पोल

फिलहाल एग्जिट पोल की बात करें तो यूपी में बीजेपी को अच्छी बढ़त दिख रही है। जबकि गठबंधन को लेकर जितनी कयासबाजी चल रही थी। उसका कुछ खास असर एग्जिट पोल में तो दिखाई नहीं दे रहा।

एबीपी के एग्जिट पोल के अनुसार बीजेपी को 33 सीटे मिलने का अनुमान है जबकि कांग्रेस को 2 और गठबंधन को 56 सीटें मिल सकती है। तो वहीं टाइम्स नाउ ने बीजेपी को 56 , कांग्रेस को 2 और महागठबंधन को 20 सीटें मिलने का अनुमान जताया है। वहीं आजतक के एग्जिट पोल की माने तो बीजेपी को 62-68 कांग्रेस को 1-2 और गठबंधन को 13-16 के बीच मिलने का अऩुमान है।

एक दो एग्जिट पोल को छोड़ दे तो ज्यादातर एग्जिट पोल में बीजेपी के लिए अच्छी खबर है। तो वहीं महागठबंधन के लिए बुरी खबर है। अगर एग्जिट पोल के आंकड़े ही 23 मई के नतीजे में तब्दील होते है तो गठबंधन के लिए ये अच्छी खबर नहीं होगी।

akhilesh and mayawati
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क्या टूट जाएगा एसपी बीएसपी का साथ ?

दरअसल, अखिलेश यादव ने अपने अरमानों का गला घोटकर बीएसपी से गठबंधन किया था और आरएलडी को अपने खाते से एक सीट की पेशकर की थी। यानी जहां एसपी बीएसपी के बीच 38-38 सीटें पर सहमति बनी थी। वहां अखिलेश यादव ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा था। ऐसे कई मामले थे जहां अखिलेश ने मायावती को मनाने की कोशिश भी की लेकिन वो नाकाम रहे । जैसे गठबंधन में कांग्रेस को शामिल करना। लेकिन मायावती इसके लिए तैयार नहीं हुई।

दरअसल, चुनावी बिसात में हर कोई खुद को बड़ा साबित करने में लगा हुआ था। अखिलेश यादव खुद को किंग मेकर की भूमिका में देख रहे थे, तो वहीं मायावती प्रधानमंत्री बनने के सपने संजोय हुए थे। अगर एग्जिट पोल के आकंड़े सही साबित हुए तो यूपी की राजनीति में एक नई सिरे से 'राज'नीती होगी। जहां सारी जातिगत समीकरणों का लेखा जोखा खत्म हो जाएगा। जानकारों का मानना है कि ऐसी स्थिति में एसपी बीएसपी गठबंधन भी खत्म हो जाएगा...

लेकिन शायद अभी कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी है, क्यों कि अभी भी एक दो ऐसे एग्जिट पोल है जहां गठबंधन के लिए अच्छी खबर भी है। चुनावी रंगमंच पर किसका दांव सटीक बैठेगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल यूपी के एग्जिट पोल के नतीजे ने न्यूज चैनलों और जनता के बीच बहस का एक मुद्दा दे दिया है। लेकिन असल नतीजे के लिए आपको 23 मई का इंतजार करना पड़ेगा।